×
×
×

अरबईने हुसैनी में इमाम महदी अ.स. की हुकूमत की झलक

इमाम ज़माना अ.स. की हुकूमत में इतना आराम की ज़िंदगी और इतनी सुहूलतें होंगी कि लोगों का दुनियावी आराम और सुकून से दिल भर चुके होंगे, लोगों के इर्द गिर्द सोना चांदी रखा होगा लेकिन वह उसकी ओर ध्यान भी नहीं देंगे।

विलायत पोर्टलः  पैग़म्बर स.अ. से रिवायत है कि इमाम महदी अ.स. को दौर में लोगों की आर्थिक हालत इतनी बेहतर हो चुकी होगी कि ढ़ूंढ़ने से भी कोई ऐसा शख़्स नहीं मिलेगा जिसे ज़कात दी जा सके। (बिहारुल अनवार, जिल्द 52, पेज 337)

इसका मतलब यह है कि इमाम ज़माना अ.स. की हुकूमत में इतना आराम की ज़िंदगी और इतनी सुहूलतें होंगी कि लोगों का दुनियावी आराम और सुकून से दिल भर चुके होंगे, लोगों के इर्द गिर्द सोना चांदी रखा होगा लेकिन वह उसकी ओर ध्यान भी नहीं देंगे।

जब यह हदीस मैंने पढ़ी तो कुछ समय तक यह बातें मुझे समझ में नहीं आईं कि आख़िर कैसे हो सकता है कि सोना चांदी, क़ीमती सामान, माल और दौलत रखा हुआ हो और यह लालच का मारा इंसान उसकी तरफ़ हाथ तक न बढ़ाए....

लेकिन यह सच्चाई अब मेरे लिए रौशन हो चुकी है कि हां ऐसा हो सकता है और बिल्कुल हो सकता है। 

मैं अरबईन यानी इमाम हुसैन अ.स. के चेहलुम पर इराक़ आया और यहां इमाम अली अ.स. के शहर नजफ़ से पैदल कर्बला का सफ़र किया, जो लगभग 90 किलोमीटर का रास्ता है, यहां मैंने ख़ुद देखा है कि एक तरफ़ कर्बला की तरफ़ जाने वाला करोंड़ों का मजमा है तो दूसरी तरफ़ इराक़ी अवाम मेहमान नवाज़ी का बे मिसाल इतिहास रच रहे हैं।

यहां पानी के टैंकर हैं, अनेक तरह के बेहतरीन खाने हैं, दुनिया भर से आए हुए अलग अलग बीमारियों के स्पेशलिस्ट डॉक्टर हैं जो फ़्री में इलाज कर रहे हैं, दर्ज़ी फ़्री में हाथों हाथ फटे पुराने कपड़े सिल रहे हैं, बड़े बड़े घरानों के जवान लड़के हाथों में ब्रश लेकर जूतों की पॉलिश करने को इस तरह बेचैन रहते हैं जैसे इससे बड़ी कोई सेवा ही न हो, हद तो यह है कि जैसे ही दूर से आते हुए इमाम हुसैन अ.स. के ज़ायरीन को देखते हैं दौड़ कर उनके पैरों को चूमने लगते हैं और जल्दी जल्दी उनके जूतों को साफ़ करना शुरू कर देते हैं, हर थोड़ी दूर पर कुछ जवान पैदल चल कर थक जाने वाले ज़ायरीन के मसाज के लिए लाइन में खड़े रहते हैं, वाशिंग मशीनें लगी हुई हैं, धूल मिट्टी से अटे हुए कपड़ों को धो और सुखा कर लोग दोबारा अपने बचे हुए सफ़र पर चल देते हैं, सोने के लिए बेहतरीन बिस्तर का बंदोबस्त है, शाम होते ही सड़कों पर बेहतरीन लक्ज़री गाड़ियां लिए कुछ लोग दिखाई देंगे जो ज़ायरीन से मंज़िल या मबीत कहते हुए मिलेंगे जिसका मतलब यह होता है कि हमारा घर आपके आराम के लिए हाज़िर है, और यह लोग विनम्रता पूर्वक निवेदन और बड़ी मिन्नतें करते हुए ज़ायरीन को अपने घर ले जाते हैं और जिसकी जितनी हैसियत होती है उससे बढ़ कर वह इमाम हुसैन अ.स. के ज़ायरीन की मेहमान नवाज़ी करता है और सुबह होते ही जहां रात को गाड़ी से बिठा कर लाए थे वहीं ला कर यह कह कर पहुंचा आते हैं कि हम आपकी ख़िदमत नहीं कर सके हमें माफ़ कर दीजिएगा।

बस इतना समझ लीजिए अरबईन मिलियन मार्च में इराक़ी अवाम और दूसरे कुछ देशों के भी कुछ कैम्पस की तरफ़ से इतना राहत और आराम का इंतेज़ाम रहता है कि इंसान की अक़्ल हैरान रह जाती है।

हाल यह है कि...

पानी वाला फ़रियाद कर रहा कि ठंडा पानी पी लो....

खाना बांटने वाली टीम चिल्ला चिल्ला के कह रही है कि ऐ इमाम हुसैन अ.स. के ज़ायरों खाना खा लो...

इराक़ी अवाम का यह मजमा हाथों को जोड़ जोड़ कर विनती करते हुए खाने और पीने के लिए बुलाता है तो दूसरी तरफ़ ज़ायरीन का उमड़ा हुआ करोड़ों का सैलाब यह कह कर माफ़ी मांगते हुए आगे बढ़ जाता है कि हमें भूख और प्यास नहीं है अभी कुछ देर पहले ही दूसरी जगह खाना खा चुका हूं।

यही वह जगह है जहां मुझे पैग़म्बर स.अ. की इस हदीस का मतलब समझ में आया कि जब इमाम हुसैन अ.स. के नाम पर यह मुमकिन है कि जब दिल चाहा, जहां पर भी दिल ने कहा, जिस तरह के खाने पीने की तलब हुई उसी जगह बिना किसी रोक टोक के खा पी ली, 80 से 90 देशों के लोग आते हैं लेकिन बिना किसी भेदभाव के किसी भी ख़ैमे में जा कर सो गए, तो जब आज के दौर के हुसैन अ.स. यानी इमाम ज़माना अ.स. का ज़ुहूर होगा तो इंसानियत और अख़लाक़ अपनी ऊंचाईयों पर पहुंच चुका होगा, दुनियावी चीज़ों से मुंह मोड़ चुके होंगे, उस समय यक़ीनन हालत यह होगी कि सोना रखा है, चांदी पड़ी है, हीरे जवाहेरात बिखरे हैं, नेक और ख़ैर करने वाले बहुत होंगे लेकिन ऐसा कोई नहीं होगी जो मोहताज और ज़रूरतमंद हो।

ख़ुदाया तेरी आख़िरी हुज्जत इमाम महदी अ.स. की हुकूमत कितनी ख़ूबसूरत होगी, ख़ुदाया तुझसे दुआ है कि अगले बरस इमाम हुसैन अ.स. के चेहलुम के मौक़े पर कर्बला जाएं तो हमारे सरों पर हुसैन अ.स. के लाल और हमारे आख़िरी इमाम अ.स. की हुकूमत का साया हो।

हुज्जतुल इस्लाम मौलाना मोहम्मद कुमैल शहीदी


लाइक कीजिए
3
0
Shadab Hussain 19 May 2019
Imam Hussain ziyarat
जवाब
0
Qazi Asghar Abbas Abdi. 20 October 2019
Mashaallah. Labbaik YA Hussain Labbaik YA ZAHRA LABBAIK YA ABBAS Labbaik YA SaiyadeSajjad Labbaik YA Zainab Labbaik YA Menhdi.
जवाब
फॉलो अस
नवीनतम