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अमेरिका की ईरान विरुद्ध शत्रुतापूर्ण कार्यवाहियां समाप्त होने का नाम ही नहीं ले रही हैं

अमेरिका ने ईरान के खिलाफ़ जो प्रतिबंध लगाया है और लगातार उन्हे बढ़ा रहा है जिसे वह इतिहास के सबसे कड़े प्रतिबंध का नाम देता है।

विलायत पोर्टलः अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने आठ मई को ईरान के धातु उद्योग पर भी प्रतिबंध लगा दिया। ज्ञात रहे कि पिछले वर्ष आठ मई को ही अमेरिका एक पक्षीय रूप से परमाणु समझौते से निकल गया था।

उसके बाद अमेरिका ने ईरान के खिलाफ प्रतिबंधों के पहले चरण को अगस्त और दूसरे चरण को नवंबर 2018 में लागू किया था। अमेरिका के एक पक्षीय प्रतिबंधों को सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव नंबर 2231 सहित अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन समझा जाता है।

अमेरिका ने ईरान के खिलाफ जो प्रतिबंध लगाया है और लगा रहा है उसे वह इतिहास के सबसे कड़े प्रतिबंध की संज्ञा देता है। अभी आठ मई को अमेरिका ने ईरान के धातु उद्योग पर जो प्रतिबंध लगाया है उसमें लोहा, फौलाद, अल्मोनियम और तांबा भी शामिल है।

इस प्रतिबंध का लक्ष्य इनके निर्यात से ईरान को होने वाली आय को कम करना है। इसी प्रकार आठ मई को ईरान के खिलाफ लगने वाले अमेरिकी प्रतिबंध के अंतर्गत वाशिंग्टन उन लोगों की संपत्तियों को सील कर देगा जो ईरान के धातु उद्योग से जुड़ी गतिविधियों में शामिल हैं।

साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कहा है कि अगर ईरान व्यवहार को नहीं बदलेगा तो उसे और दबावों का सामना होगा।

अमेरिका ने परमाणु समझौते से निकलने के बाद ईरान के खिलाफ प्रतिबंध लगाने और दबाव को अधिक से अधिक करने की नीति को गति प्रदान कर दी है।  

ईरान के संबंध में अमेरिकी क्रिया- कलापों का आधार ज़ोर ज़बरदस्ती और धमकी रहा है और पिछले चालिस वर्षों से ईरान के संबंध में अमेरिकी नीति का आधार यही रहा है परंतु ईरानी राष्ट्र वर्चस्ववादियों विशेषकर अमेरिका की वर्चस्ववादी नीतियों के मुकाबले में अदम्य साहस के साथ डट हुआ है और उसने अपने साहसिक प्रतिरोध से अमेरिकी षडयंत्रों व चालों को विफल व प्रभावहीन बनाया है।

ईरान की इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामनेई ने 9 जनवरी 2019 को कहा था कि अमेरिकी प्रसन्नता के साथ कहते हैं कि इस समय ईरानी राष्ट्र पर जो दबाव है वह इतिहास में अभूतपूर्व है किन्तु इस संबंध में ईरानी राष्ट्र उन्हें ऐसी पराजय देगा जो इतिहास में अभूतपूर्व होगी।"

बहरहाल ईरान ने अपने अमल से सिद्ध कर दिया है कि वह अमेरिकी प्रतिबंधों पर काबू और ट्रंप सरकार की शत्रुतापूर्ण नीतियों का मुकाबला कर सकता है।

विदेशमंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ के उस बयान को इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा सकता है जिसमें उन्होंने कहा है कि ईरान के मुकाबले में ट्रंप की नीतियां विफल हो चुकी हैं। और ईरानी कभी भी अमेरिकी दबावों के सामने घुटने नहीं टेकेंगे।

पारस टुडे

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