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अंगप्रदर्शन सबसे बड़ी जानलेवा बीमारी

सांस्कृतिक बीमारियों में से एक अंगप्रदर्शन है भी है कि जहां आज इंसान अपने नंगे घूमने को अपनी तरक़्क़ी से जोड़ कर देख रहा है जबकि उसका सीधा मतलब यह है कि उसका ज़मीर मर चुका है और उसे बेशर्मी की बीमारी लग चुकी है जिसके इलाज की सख़्त ज़रूरत है।

विलायत पोर्टलः इक्कीसवीं शताब्दी की दुनिया भी अजीब दुनिया है, जबकि इंसान ने विज्ञान और टेक्नोलॉजी द्वारा एक से एक नई नई खोज की हैं, और टेक्नोलॉजी द्वारा तरक़्क़ी की नई नई ऊंचाइयों पर अपनी कामयाबी के झंडे गाड़ दिए हैं, और आज इंसान पिछले दौर से ज़्यादा नेमतों से फ़ायदा उठा रहा है और यह भी हक़ीक़त है कि जितनी ज़्यादा उसके पास नेमतें हैं उतना ही उसे अल्लाह का शुक्र अदा करना चाहिए था लेकिन इसके विपरीत हम देख रहे हैं कि उसके यहां नेमतों से फ़ायदा उठा कर अल्लाह को भुला देने वाले कीटाणु ज़्यादा पनप रहे हैं।

आज इस चकाचौंध से भरी दुनिया में इंसान घमंड और तकब्बुर के नशे में इतना चूर है कि वह अपनी हक़ीक़त ही भूल गया और बहुत सी ऐसी सांस्कृतिक और सामाजिक बीमारियों में गिरफ़्तार हो चुका है जिनके इलाज से भी ग़ाफ़िल है और हर पल दुनिया की चकाचौंध और शहवत के दलदल में धंसता जा रहा है।

उन्हीं सांस्कृतिक बीमारियों में से एक अंगप्रदर्शन है भी है कि जहां आज इंसान अपने नंगे घूमने को अपनी तरक़्क़ी से जोड़ कर देख रहा है जबकि उसका सीधा मतलब यह है कि उसका ज़मीर मर चुका है और उसे बेशर्मी की बीमारी लग चुकी है जिसके इलाज की सख़्त ज़रूरत है।

आज आप अपने आसपास बहुत सारे लोगों को देखते हैं जो अपने समय और कमाई का एक बड़ा हिस्सा अपने लुक और ख़ुद के अच्छे और हैंडसम दिखने और कपड़ों के स्टाइलिश बनाने में ख़र्च करते हैं या यूं कहा जाए वह अपनी ज़ाहिरी दुनिया संवारने के चक्कर में अपनी रूह अपनी आख़ेरत अपने ज़मीर से लापरवाह हो चुके हैं और उन्हें यह एहसास भी नहीं है कि उन्हें कोई ख़तरनाक बीमारी लग गई है और ऐसी बीमारी जिसका असर उसकी नस्लों पर भी पड़ने वाला है और उन्हें यह ख़्याल नहीं है आज इंसानियत के लिए इससे ख़तरनाक कोई और समस्या नहीं है।

जैसाकि शहीद मुतह्हरी र.अ. अपनी किताब "मसअलए-हिजाब" में इस ख़तरनाक बीमारी के बारे में इस तरह लिखते हैं:

बेशक अंगप्रदर्शन हमारे दौर की एक ज़बर्दस्त और फैली हुई बीमारी है, अभी हो या कुछ देर बाद ही सही लोग इस बीमारी को ज़रूर पहचान लेंगे और अगर मान लीजिए कि हम इस अंगप्रदर्शन में यूरोप की अंधी तक़लीद भी करें तो जल्द ही यूरोपीयन स्कॉलर और इस घटिया कल्चर को बढ़ावा देने वाले ख़ुद इस बीमारी को स्वीकार करते हुए उसके नुक़सान का ऐलान कर देंगे, लेकिन अगर हम उनके ऐलान और स्वीकार करने का हाथ पर हाथ धरे इंतेज़ार करते रहे तो मुझे इस बात का डर है कि कहीं देर न हो जाए।

यूरोप की एक मशहूर सेलिब्रेटी एक ख़त में अपनी बेटी को अंगप्रदर्शन की शूटिंग की अनुमति देते हुए कहती है कि फ़िल्म और हुनर दिखाने के लिए तुम शूटिंग पर नंगी जा सकती हो लेकिन अपने उस अंगप्रदर्शन को केवल फ़िल्म के सेट तक सीमित रखना और यह काम तुम्हारा केवल एक आर्ट की हद तक ही सीमित रहे, वह लिखती है:

अंगप्रदर्शन हमारे दौर की सबसे प्रचालित बीमारी है मैं बूढ़ी हो चुकी हूं और हो सकता है कि मेरी बातें तुम्हें मज़ाक़ लगे लेकिन मेरे ख़्याल में तुम्हारा अंगप्रदर्शन इसलिए होना चाहिए कि तुम जिसकी नंगी रूह को पसंद करती हो और इसमें कोई बुराई नहीं है कि इस बारे में अगर तुम्हारे ख़्याल तुम्हें 10 साल पहले वाले कपड़े पहनने के दौर में ले जाएं तो तुम बूढ़ी नहीं होगी, और उम्मीद है कि अंगप्रदर्शन जैसी प्रथा की पैरवी करने वाली और बढ़ावा देने वाली आख़िरी औरत हो। (मसअलए-हिजाब, पेज 14-15)

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