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Date of publication : 3/9/2015 19:12
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प्रतिबंध न हटे तो कोई समझौता नहीं होगाः सुप्रीम लीडर

इस्लामी रिवाल्यूशन के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाहिल उज़्मा सय्यद अली ख़ामेनई ने परमाणु सहमति के मसौदे की ईरानी संसद में समीक्षा किए जाने पर ज़ोर दिया है।

विलायत पोर्टलः इस्लामी रिवाल्यूशन के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाहिल उज़्मा सय्यद अली ख़ामेनई ने परमाणु सहमति के मसौदे की ईरानी संसद में समीक्षा किए जाने पर ज़ोर दिया है। विशेषज्ञ परिषद के अध्यक्ष और सदस्यों ने सुप्रीम लीडर से गुरुवार को मुलाक़ात की। इस मौक़े पर उन्होंने कहा कि परमाणु सहमति के मसौदे संयुक्त व्यापक कार्य योजना की समीक्षा और उसे पारित या रद्द करने के संबंध में वे संसद से किसी प्रकार की अनुशंसा नहीं करेंगे। सुप्रीम लीडर ने पाबंदियों को बाक़ी रखने पर आधारित अमरीकी अधिकारियों के बयान के बारे में ज़ोर दिया कि वार्ता का उद्देश्य पाबंदियों को उठाना है, अगर हमने बातचीत में कुछ विशिष्टताएं दीं तो इसलिए कि पाबंदियां ख़त्म हों वरना हम मौजूदा 19 हज़ार सेन्ट्रीफ़्यूज की संख्या को कम समय में 50 से 60 हज़ार तक पहुंचा सकते हैं और युरेनियम संवर्धन भी जारी रख सकते हैं। आयतुल्लाहिल उज़्मा सय्यद अली ख़ामेनई ने कहा कि क्षेत्र के संबंध में अमरीका की नीति प्रतिरोध को पूरी तरह ख़त्म करने और सीरिया तथा इराक़ पर क़ब्ज़ा करने की है और वे अपेक्षा रखते हैं कि ईरान भी इसी फ़्रेमवर्क में ख़ुद को ढाल ले लेकिन ऐसा नहीं हो सकता। सुप्रीम लीडर ने साम्राज्यवादी मोर्चे की, अन्य देशों पर अपने गढ़े हुए शब्दों को थोपने की कोशिश का उल्लेख करते हुए कहा कि साम्राज्यवादी व्यवस्था, आतंकवाद और मानवाधिकार शब्द का ख़ास मतलब निकालती है। उसके नज़दीक यमन की जनता पर छह महीने से लगातार हमला और ग़ज़्ज़ा की बेगुनाह जनता की हत्या, जनसंहार नहीं है और मताधिकार की मांग कर रही बहरैनी जनता का दमन, मानवाधिकार का उल्लंघन नहीं है। उन्होंने कहा कि वर्चस्ववादी व्यवस्था की नज़र में लेबनान और फ़िलिस्तीन में प्रतिरोध की ओर से अपनी क़ानूनी प्रतिरक्षा आतंकवाद है लेकिन क्षेत्र में अत्याचारी और अमरीका के निकटवर्ती देशों की कार्यवाहियां, मानवाधिकार के ख़िलाफ़ नहीं हैं। सुप्रीम लीडर ने कहा कि वर्चस्ववादी व्यवस्था के नज़दीक ईरान के परमाणु वैज्ञानिकों की हत्या आतंकवाद नहीं है जबकि ख़ुद ज़ायोनियों ने साफ़ तौर पर इसे स्वीकार किया है और इसी प्रकार कुछ यूरोपीय देशों ने भी ईरानी वैज्ञानिकों की हत्या के इस्राईल के क़दम का समर्थन करने की बात स्वीकार की है लेकिन वर्चस्ववादी व्यवस्था इसे आतंकवाद नहीं समझती।
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तेहरान रेडियो


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