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Code : 81905
Date of publication : 1/9/2015 18:46
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धमकी, ज़ोर-ज़बरदस्ती बेअसर और एक्सपायर हथियार।

ईरान के संसद सभापति ने कहा है कि परमाणु मामले में ईरानी राष्ट्र ने यह दिखा दिया है कि धौंस-धमकी पुराने व बेअसर हथियार हैं।


विलायत पोर्टलः ईरान के संसद सभापति ने कहा है कि परमाणु मामले में ईरानी राष्ट्र ने यह दिखा दिया है कि धौंस-धमकी पुराने व बेअसर हथियार हैं। डाक्टर अली लारीजानी ने सोमवार को न्यूयार्क में “प्रजातंत्र, शांति व टिकाऊ विकास की सेवा में” शीर्षक के अंतर्गत आयोजित होने वाले अंतर्राष्ट्रीय अंतरसंसदीय संघ के सदस्य देशों के सभापतियों के सम्मेलन में कहा कि आज की दुनिया में कुछ शक्तियां अब भी यह सोचती है कि वे शक्ति, ज़ोर-ज़बरदस्ती, दबाव और प्रतिबंध से अपने राजनैतिक लक्ष्य प्राप्त कर सकती हैं जबकि ईरान ने परमाणु मामले में दबाव और धमकी के मुक़ाबले में प्रतिरोध द्वारा यह दिखा दिया कि ये सब पुराने हथियार हैं और अब इनकी कोई औक़ात नहीं रह गई है। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन में मुख्य सवाल यह होना चाहिए कि आज की दुनिया में क्या वास्तव में प्रजातंत्र, शांति व टिकाऊ विकास की सेवा में है? ईरान के संसद सभापति ने कहा कि टिकाऊ विकास राजनैतिक स्थिरता, लोकतंत्र और संतुलित आर्थिक प्रगति पर निर्भर है लेकिन अफ़सोस की बात है कि राजनीति की दुनिया में आज सही व अच्छे विचार पेश किए जाने के बावजूद, बल प्रयोग के तर्क का शासन है और जब तक यह विरोधाभास बाक़ी रहेगा तब तक संसार में हिंसा, युद्ध और लोगों के बेघर होने के दृश्य देखे जाते रहेंगे। ईरान के संसद सभापति अली लारीजानी ने कहा कि कुछ सरकारें जो अपनी जनता के लिए प्रजातंत्र चाहती हैं, अपनी सीमा के बाहर तानाशाहों और अत्याचारी सरकारों का समर्थन करती हैं और यही सरकारें हैं जो बम और बंदूक़ के माध्यम से अन्य देशों में प्रजातंत्र स्थापित करना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि इसी तरह का रवैया आज की दुनिया में बहुत से युद्ध शुरू होने का वजह बना है और फ़िलिस्तीन की अत्याचार जनता की पीड़ादायक स्थिति, ज़ायोनी शासन के युद्ध प्रेम, इराक़ व अफ़ग़ानिस्तान के नाजाएज़ क़ब्ज़े व यमन तथा सीरिया के युद्धों को इसका उदाहरण समझा जा सकता है।
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तेहरान रेडियो


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