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Date of publication : 20/8/2015 17:29
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अब मुसलमानों को एक हो जाना चाहिएः राष्ट्रपति रूहानी

राष्ट्रपति डाक्टर हसन रूहानी ने कहा कि मुसलमानों के मध्य इस्लामी पहचान की सुरक्षा और इस्लामी शिक्षाओं के प्रचार के लिए होशयारी एवं जागरुकता आवश्यक है।


विलायत पोर्टलः राष्ट्रपति डाक्टर हसन रूहानी ने कहा कि मुसलमानों के मध्य इस्लामी पहचान की सुरक्षा और इस्लामी शिक्षाओं के प्रचार के लिए होशयारी एवं जागरुकता आवश्यक है। आज तेहरान में विश्व मस्जिद दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित होने वाली १३वीं बैठक में भाषण देते हुए उन्होंने कहा कि मस्जिद महत्वपूर्ण इस्लामी केन्द्र है और प्राचीन समय से इस्लामी आर्किटेक्चर में मस्जिद को शहर और समाज के मुख्य केन्द्र के रूप में पेश किया गया है। राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया है कि मस्जिद उपासन, आध्यात्म, नैतिकता और प्रशिक्षा स्थल है। उन्होंने कहा कि आज विश्व में मस्जिद का स्थान मदरसा, कालेज, विश्व विद्यालय और सांस्कृतिक केन्द्र नहीं ले सकते लेकिन मस्जिद शिक्षा- प्रशिक्षा और इस्लामी नैतिकता का केन्द्र है। ईरान के राष्ट्रपति ने ज़ोर देकर कहा कि अभी विश्व में ऐसी मस्जिदें मौजूद हैं जिनमें अहलेबैत के ख़िलाफ़ खुत्बे दिये जाते हैं। उन्होंने कहा कि वास्तविक मस्जिद वह है जो मुसलमानों के मध्य शिक्षा- प्रशिक्षा और एकता का केन्द्र हो और उससे एकता की बात की जाती हो न कि उससे अत्याचार और अतिक्रमण की आवाज़ आये। राष्ट्रपति ने कहा कि ईरान की इस्लामी रिवाल्यूशन में मस्जिदें केन्द्र थीं और स्वर्गीय इमाम ख़ुमैनी मस्जिद में भाषण देते थे। ईरान के राष्ट्रपति ने मस्जिदुल अक़्सा को आग लगाये जाने की वर्षगांठ की ओर इशारा करते हुए कहा कि मुसलमानों के पहले क़िबले में आग लगाये जाने का अर्थ यह था कि ज़ायोनी शासन मानवीय और सामाजिक किसी भी सिद्धांत को अहमिय्यत नहीं देता है। राष्ट्रपति ने कहा कि यह दिन उस चीज़ की याद दिलाता है कि जायोनी शासन न केवल फिलिस्तीनी बच्चों और महिलाओं पर दया नहीं करता है और अतिक्रमण को जारी रखे हुए है बल्कि वह मुसलमानों के पहले को भी कोई महत्व नहीं देता है जबकि उसे समस्त आसमानी धर्मों में सम्मान व महत्व प्राप्त है। ज्ञात रहे कि मुसलमानों के पहले क़िबले मस्जिदुल अक़्सा को २१ अगस्त वर्ष १९६९ को जायोनियों ने आग लगा दी थी जिससे इस मस्जिद को काफ़ी नुक़सान पहुंचा था। ................
तेहरान रेडियो


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