Delicious facebook RSS दोस्तों को भेजें। प्रिंट सेव करें। XML TEXT PDF
Code : 78389
Date of publication : 11/7/2015 1:57
Hit : 368

जुमे की नमाज़ के लिए इस्राईल ने लगाई थीं शर्तें

इस्राईल ने पवित्र रमज़ान के अन्तिम जुमे की नमाज़ पढ़ने वालों के लिए कुछ शर्तें लगाई थीं।


विलायत पोर्टलः इस्राईल ने पवित्र रमज़ान के अन्तिम जुमे की नमाज़ पढ़ने वालों के लिए कुछ शर्तें लगाई थीं। ज़ायोनी शासन के अधिकारियों ने मुसलमानों के पहले क़िब्ले मस्जिदुल अक़सा में जुमे की नमाज़ पढ़न वालों के लिए कुछ शर्तों का एलान किया है। इसमें पहली शर्त यह है कि 16 साल से लेकर 30साल के लोग मस्जिदुल अक़सा में जुमे की नमाज़, पढ़ ही नहीं सकते। दूसरी शर्त यह है कि 30 साल से 50 साल की उम्र के लोग भी आज्ञापत्र होने की स्थिति में ही मस्जिदुल अक़सा में दाख़िल हो सकते हैं वरना उन्हें मस्जिद में दाख़िल होने की इजाज़त नहीं होगी। मालूल रहे कि पवित्र रमज़ान के आख़िरी शुक्रवार के दिन ज़ायोनी शासन ने मस्जिदुल अक़सा को एक छावनी में बदल कर दिया है। शुक्रवार के दिन पूरे बैतुल मुक़द्दस नगर ख़ासकर मस्जिदुल अक़सा की कड़ी सुरक्षा कर दी गई है। मस्जिद के चारों और भारी संख्या में इस्राईल सैनिक तैनात हैं। इस्राईली सैनिक गुरूवार की रात से ही नमाज़ियों को मस्जिदुल अक़सा में जाने से रोक रहे हैं। पिछले तीन जुमों में लाखों की संख्या में फ़िलिस्तीनी नमाज़ी मस्जिदुल अक़सा पहुंचे थे। अधिक संख्या के भय से इस्राईली सैनिक फ़िलिस्तीनी नमाज़ियों को मस्जिदुल अक़सा में जाने से रोक रहे थे।
................
तेहरान रेडियो


आपका कमेंट



मेरा कमेंट शो न किया जाये
Security Code :

नवीनतम लेख

इंसान मौत के समय किन किन चीज़ों को देखता है? हिटलर की भांति विरोधी विचारधारा को कुचल रहे हैं ट्रम्प । ईरान, आत्मघाती हमलावर और आतंकी टीम में शामिल दो सदस्य पाकिस्तानी : सरदार पाकपूर सीरिया अवैध राष्ट्र इस्राईल निर्मित हथियारों की बड़ी खेप बरामद । ईरान को CPEC में शामिल कर सऊदी अरब और अमेरिका को नाराज़ नहीं कर सकता पाकिस्तान। भारत पहुँच रहा है वर्तमान का यज़ीद मोहम्मद बिन सलमान, कई समझौतों पर होंगे हस्ताक्षर । ईरान के कड़े तेवर , वहाबी आतंकवाद का गॉडफादर है सऊदी अरब अर्दोग़ान का बड़ा खुलासा, आतंकवादी संगठनों को हथियार दे रहा है नाटो। फिलिस्तीन इस्राईल मद्दे पर अरब देशों के रुख में आया है बदलाव : नेतन्याहू बहादुर ख़ानदान की बहादुर ख़ातून यह 20 अरब डॉलर नहीं शीयत को नाबूद करने की साज़िश की कड़ी है पैग़म्बर स.अ. की सीरत और इमाम ख़ुमैनी र.अ. की विचारधारा शिम्र मर गया तो क्या हुआ, नस्लें तो आज भी बाक़ी है!! इमाम ख़ुमैनी र.ह. और इस्लामी इंक़ेलाब की लोकतांत्रिक जड़ें हज़रत फ़ातिमा ज़हरा स.अ. के घर में आग लगाने वाले कौन थे? अहले सुन्नत की किताबों से