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Date of publication : 7/4/2015 23:21
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यमन पर हमले तुरंत बंद किये जायें।

इस्लामी इंक़ेलाब के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनई ने कहा है कि ईरान का रुख यमन सहित सभी देशों के संबंध में विदेशी हस्तक्षेप के विरोध पर आधारित है।


विलायत पोर्टलः इस्लामी इंक़ेलाब के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनई ने कहा है कि ईरान का रुख यमन सहित सभी देशों के संबंध में विदेशी हस्तक्षेप के विरोध पर आधारित है। इसलिए यमन के संकट का समाधान भी इन हमलों को बंद करना और यमनी जनता के खिलाफ बाहरी हस्तक्षेप को रोकना है। इस्लामी इंक़ेलाब के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह सैयद अली ख़ामेनई ने मंगलवार दोपहर में तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब ओर्दोग़ान के साथ बैठक में कहा कि हमने हमेशा इसी बात पर बल दिया है। इस्लामी देश, अमेरिका और पश्चिमी देशों पर भरोसा करके कोई फायदा हासिल नहीं कर सकते और आज भी यह मुस्लिम देश क्षेत्र में पश्चिम की इस्लाम विरोधी कार्यवाहियों को स्पष्ट रूप से देख रहे हैं। इस्लामी इंक़ेलाब के सुप्रीम लीडर ने क्षेत्र के कुछ देशों की स्थिति और सीरिया और इराक़ में आतंकवादियों की बर्बर कार्यवाहियों की ओर इशारा करते हुए कहा कि अगर कोई इन घटनाओं के पीछे गुप्त हाथों को न देखे तो उसने खुद को धोखे में रखा है।

आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनई ने इस तथ्य की ताईद में, क्षेत्र की स्थिति से अमेरिका और ज़ायोनी सरकार की खुशी का उल्लेख करते हुए कहा कि इस्राईल और कई पश्चिमी सरकारें और सबसे बढ़कर अमेरिका इन घटनाओं से खुश है, वह आईएसआईएल को समाप्त करना नहीं चाहते। इस्लामी इंक़ेलाब के सुप्रीम लीडर ने यह सवाल उठाते हुए कि वह कौन हैं जो तकफीरी तत्वों का समर्थन कर रहे हैं? कहा कि पश्चिमी देश निश्चित रूप से यह नहीं चाहते कि यह समस्याएं हल हों इसलिए यह मुस्लिम देशों की जिम्मेदारी है कि अपनी समस्याओं के समाधान के लिए खुद कदम उठायें और ठोस फैसला करें। लेकिन अफसोस कि सामूहिक रूप से कोई उचित और रचनात्मक निर्णय नहीं लिया जाता है।

उन्होंने इस्लामी जागरूकता के माध्यम से दुनिया भर में उत्पन्न होने वाले महान परिवर्तन को इस्लामी दुश्मनों की चिंता का मुख्य कारण बताया और इस महान आंदोलन के खिलाफ दुश्मनों की परियोजनाओं और साजिशों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज अमेरिका और ज़ायोनी सरकार कुछ इस्लामी देशों के आंतरिक मतभेदों से खुश हैं और कठिनाइयों का एकमात्र समाधान यही है कि इस्लामी देश सहयोग के माध्यम से उचित और रचनात्मक कदम उठायें।


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