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Date of publication : 6/4/2015 17:12
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यमन में सूऊदी अरब ने थामा अलकायदा का हाथ।

सऊदी अरब की स्पेशल फ़ोर्सेज़, यमन में पूर्व राष्ट्रपति मंसूर हादी और उनके समर्थक अलक़ायदा आतंकवादियों का भरपूर समर्थन कर रही हैं


विलायत पोर्टलः सऊदी अरब की स्पेशल फ़ोर्सेज़, यमन में पूर्व राष्ट्रपति मंसूर हादी और उनके समर्थक अलक़ायदा आतंकवादियों का भरपूर समर्थन कर रही हैं। सऊदी अरब के एक सैन्य सलाहकार ने दावा किया है कि आले सऊद की सेना और स्पेशल समुद्री बल, यमन में विशेष मिशन पर तैनात हैं जबकि विशेष बल अदन में मंसूर हादी के समर्थक आतंकवादी समूहों को हथियार, संचार उपकरण और सैन्य संसाधन उपलब्ध करा रही हैं। आले सऊद की इस कार्यवाही से लगता है कि उसने यमन के एक हिस्से में अपनी थलसेना को प्रवेश का आदेश जारी कर दिया है। उधर अमेरिका में आले सऊद के राजदूत आदिल अलजुबैर ने कहा कि अदन में सऊदी अरब की सेना नहीं है। पश्चिमी देश विशेषकर अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने यमन में सउदी अरब की आक्रामकता के शुरू होने के बाद सऊदी शाह सलमान बिन अब्दुल अजीज से टेलीफून पर बातचीत में यमन पर आले सऊद की आक्रामकता का समर्थन किया था।

यमन की सेना और अंसारूल्लाह आंदोलन से जुड़े स्वंयसेवी कमेटियों ने अदन में पूर्व राष्ट्रपति मंसूर हादी की विध्वंसक गतिविधियों के मद्देनजर शहर की ओर प्रगति की ताकि अदन राज्य को पूर्व राष्ट्रपति के आतंकवादी समर्थकों विशेष रूप से अलक़ायदा तकफीरी आतंकवादियों से मुक्ति दिला सकें। अदन दकी ओर अंसारूल्लाह आंदोलन की प्रगति के बाद आले सऊद और उसके पिट्ठू सहयोगियों ने अमेरिका की अनुमति से यमन में व्यापक हवाई हमले शुरू कर दिए। अदन, यमन का बहुत स्ट्रॉटेजिक तटीय शहर है। यमन पर हमला करने से सऊदी अरब का उद्देश्य पूर्व राष्ट्रपति मंसूर हादी को दोबारा सत्ता में लेकर आना है लेकिन यमन की क्रांतिकारी जनता इस बात की विरोधी है।

क़तर और संयुक्त अरब अमीरात ने सउदी लक्ष्यों का समर्थन करते हुए उसके साथ गठबंधन किया और उसकी आक्रामकता में शामिल हो गए। अलकायदा और आईएसआईएल को क़तर और अमीरात की सैन्य सहायता, अदन में सऊदी विमानों के माध्यम से पहुंचाई जा रही है जो यमन के क्रांतिकारी जनता का नरसंहार करने में व्यस्त हैं।


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