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Date of publication : 6/4/2015 15:35
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संयुक्त राष्ट्र

दमिश्क में फिलिस्तीनी शरणार्थी शिविर पर संकट के बादल।

संयुक्त राष्ट्र में सहायता विभाग के प्रमुख क्रिस गानेस ने कहा है कि सीरिया में यरमूक के फिलिस्तीनी शरणार्थी शिविर की स्थिति, बहुत संकटमयी है और इस शिविर में फिलिस्तीनियों को गंभीर समस्याओं का सामना है।


विलायत पोर्टलः संयुक्त राष्ट्र में सहायता विभाग के प्रमुख क्रिस गानेस ने कहा है कि सीरिया में यरमूक के फिलिस्तीनी शरणार्थी शिविर की स्थिति, बहुत संकटमयी है और इस शिविर में फिलिस्तीनियों को गंभीर समस्याओं का सामना है। क्रिस गानेस ने कहा है कि विश्व समुदाय को यरमूक संकट को हल करने के लिए बुनियादी कदम उठाने चाहिए क्योंकि इस शिविर में मानव आस्दी के घिनौने बादल मंडरा रहे हैं।

यरमूक शिविर में इस समय अठारह हजार लोग मौजूद हैं जिनमें साढ़े तीन हजार बच्चे भी शामिल हैं। उन लोगों को तत्काल इंसानी सहायता की जरूरत है। उन्होंने कहा कि यरमूक में शरणार्थियों को खाद्य, चिकित्सा यहां तक कि मेडिकल स्टाफ की भी जरूरत है।

गौरतलब है कि यरमूक शिविर में बीमार और बूढ़े और बच्चे, झड़पों की वजह से संकट का शिकार हैं। दमिश्क के करीब फिलिस्तीनियों के लियू यरमूक शरणार्थी शिविर, पचास के दशक में बनाया गया था। इस शिविर में सीरिया ने कई दशकों तक फ़िलिस्तीनी शरणार्थियों की मेजबानी की है। उधर फिलिस्तीन की आज़ादी लिये गठन पाने वाले स्वंयसेवी मोर्चे के उप महासचिव ने अरब देशों और वैश्विक संस्थाओं से मांग की है कि वह यरमूक के शरणार्थियों की नजात के लिए प्रभावी कदम उठायें।

अबू अहमद फ़ुवाद ने कहा है कि पीएलओ को चाहिए कि वह स्पष्ट रुख अपना कर यरमूक पर तकफीरी आतंकवादी गिरोह आईएसआईएल के हमलों की निंदा करे।

गौरतलब है कि तकफीरी आतंकवादी गिरोह आईएसआईएल ने पहली अप्रैल से यरमूक शिविर के कुछ हिस्सों पर कब्जा कर रखा है। इस शिविर में अभी भी फिलिस्तीनी शरणार्थियों और आईएसआईएल के हमलावरों के बीच झड़पें जारी हैं। इन झड़पों में दसियों लोग मारे तथा घायल हुए हैं। यरमूक शिविर में रहने वाले दो हज़ार फ़िलिस्तीनी नागरिकों ने आईएसआईएल के डर से इस शिविर को छोड़ दिया है और दमिश्क़ की ओर चले गए हैं सीरिया की सेना ने उन लोगों की यरमूक शिविर से निकलने में मदद की है।

एक मानवाधिकार संगठन ने कहा है कि यरमूक शिविर में जारी संघर्ष में बारह फ़िलिस्तीनी मारे गये हैं और 80 गिरफ्तार हुए हैं। हमास और इस्लामी उलमा विश्व संघ ने बयान जारी कर यरमूक के लिए इस्लामी और विश्व समुदाय से मदद की मांग की है। उनके बयान में कहा गया है कि इस्लामी और अन्य देश, यरमूक में आतंकवादियों के हाथों निहत्थे शरणार्थियों का नरसंहार रुकवाएँ। सीरिया के संकट से पहले यरमूक शरणार्थी शिविर में पांच लाख फिलिस्तीनी बसे हुए थे लेकिन अब उसमें आकर बसने वाले फिलिस्तीनी, फिर से बेघर हो गए हैं और उन्होंने सीरिया के विभिन्न स्थानों या दूसरे देशों में शरण ले रखी है।


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