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Date of publication : 28/3/2015 15:55
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सैयद हसन नस्रुल्लाह

जब अरब देशों ने फ़िलिस्तीनी सुन्नियों को अकेला छोड़ा, तो ईरान ने थामा उनका हाथ।

हिज़्बुल्लाह के महासचिव सैयद हसन नस्रुल्लाह ने शुक्रवार की शाम को अलमिनार टीवी चैनल के सीधे प्रसारण में लेबनानी राष्ट्र को सम्बोधित किया जिसमें यमन में सउदी अरब की आक्रामकता से संबंधित महत्वपूर्ण बातचीत की।



विलायत पोर्टलः हिज़्बुल्लाह के महासचिव सैयद हसन नस्रुल्लाह ने शुक्रवार की शाम को अलमिनार टीवी चैनल के सीधे प्रसारण में लेबनानी राष्ट्र को सम्बोधित किया जिसमें यमन में सउदी अरब की आक्रामकता से संबंधित महत्वपूर्ण बातचीत की।
सैयद हसन नस्रुल्लाह ने अपने सम्बोधन में कहा: पिछले कई वर्षों से कुछ अरबी देशों ने फिलिस्तीन की स्वतंत्रता और इस्राईल की फिलिस्तीन पर आक्रमकता के मुक़ाबले में चुप्पी साध रखी थी लेकिन यमन पर हमले के लिए तुरंत जोश में आ गए। उन्होंने कहा: सऊदी अरब का रुख ट्यूनिस की क्रांति के बारे में स्पष्ट है रियाद ने आखिरी हद तक कोशिश की कि वह जैनुल आबेदीन बिन अली को ट्यूनिस की तानाशाही पर फिर से लौटा दे।
हिज़्बुल्लाह के महासचिव ने इस बात की ओर इशारा करते हुए कि सऊदी अरब का यह दावा कि यमन के खिलाफ हमले की सुरूआत इस देश के भगौड़े राष्ट्रपति की मांग के आधार पर की गई है, एक बहाना और निराधार दावा है उन्होंने कहा यह बात कोई तर्क नहीं बनती कि यमन के हालात में बदलाव, खाड़ी देशों ख़ास कर सऊदी अरब के लिए खतरा है। उन्होंने कहा: अगर ऐसा तूफानी हमला जो इस समय यमन पर हुआ है, इस्राईल पर किया जाता तो हम भी उसमें शामिल हो जाते।
सैयद हसन नस्रुल्लाह ने यह बयान करते हुए कि यमन पर हमले का कारण इस देश की सरकार का गिरना और राष्ट्रपति का इस्तीफ़ा देना नहीं है स्पष्ट किया: क्या तुम्हारे पास इस हमले का कोई तार्किक तर्क है जिसे तुम मुसलमानों, उल्मा और अपने मुफ़्तियों के लिए बयान कर सको? उन्होंने इस बात की ओर इशारा करते हुए कि सऊदी अरब की पिछले 30 साल की विदेश नीति की उपलब्धियां कहाँ हैं कहा: सऊदी अरब की विदेश नीति की हार ने क्षेत्र में ईरान के लिए दरवाजे खोल दिए हालांकि ईरान इस बात का इच्छुक नहीं था।
सैयद हसन नस्रुल्लाह ने यह बताते हुए कि मुश्किल खुद तुम्हारी ओर से है न ईरान की ओर से कहा: बुनियादी मुश्किल खुद सऊदी अरब की शासन प्रणाली में पाई जाती है और वह यह कि इस शासन का क्षेत्र के देशों के साथ कोई इंटरेक्शन नहीं है। हिज़्बुल्लाह के प्रमुख ने कहा: सबसे बड़ा झूठ तो तुम्हारा यह है कि ईरान यमन के हालात में हस्तक्षेप कर रहा है तुम्हारे पास इस दावे पर अगर कोई तर्क है तो उसे पेश करो। उन्होंने कहा: हम इमाम ख़ामेनई को इमाम और वली-ए-अम्रे मुसलेमीन समझते हैं लेकिन ईरान ने कभी भी हमें किसी काम के लिए कोई आदेश नहीं दिया न ही हमें किसी काम के लिए मजबूर किया है लेकिन हम सऊदी अरब की भूमिका को उनके सहयोगियों के साथ देख रहे हैं।
सैयद हसन नस्रुल्लाह ने कहा: सऊदी अरब और अन्य खाड़ी के देशों ने फिलिस्तीन को इस्राईल के मुक़ाबले में अकेला छोड़ दिया लेकिन ईरान ने सभी बाहरी प्रतिबंधों के बावजूद फिलिस्तीन का साथ दिया। उन्होंने कहा: सऊदी अरब ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश के इराक पर कब्जा करने के लिए मदद की और यह भी ऐसे हाल में हुआ कि इससे पहले सऊदी अरब ने सद्दाम को ईरान के खिलाफ युद्ध पर उकसाया और उसकी 200 अरब डालर की मदद की।


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