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Date of publication : 18/3/2015 0:23
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सऊदी अरब और इस्राईल का ईरान के विरुद्ध खुल्लम खुल्ला गठबंधन।

सऊदी अरब और इस्राईल ने ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम के विरुद्ध गठबंधन किया है और सऊदी और इस्राईली अधिकारी भद्दा ग्रुप 5+1 और ईरान के बीच वार्ता को नाकाम बनाने की भरपूर कोशिश कर रहे हैं। इस्राईल ईरान को अपने लिए और सऊदी अरब ईरान को अरबों के लिए खतरा बता रहा है जब कि ईरान स्वाभाविक रूप से एक शांतिपूर्ण और जिम्मेदार देश है।


विलायत पोर्टलः रिपोर्ट के अनुसार सऊदी अरब और इस्राईल ने ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम के विरुद्ध गठबंधन किया है और सऊदी और इस्राईली अधिकारी भद्दा ग्रुप 5+1 और ईरान के बीच वार्ता को नाकाम बनाने की भरपूर कोशिश कर रहे हैं। इस्राईल ईरान को अपने लिए और सऊदी अरब ईरान को अरबों के लिए खतरा बता रहा है जब कि ईरान स्वाभाविक रूप से एक शांतिपूर्ण और जिम्मेदार देश है।

इस्राईली प्रधानमंत्री नियतेन याहू ने अमेरिकी कांग्रेस में ईरान के खिलाफ़ दुश्मनी का भरपूर प्रदर्शन किया और ईरान को इस्राईल के लिए बहुत बड़ा खतरा बताया जबकि सऊदी अरब के अधिकारी भी ईरान की वैज्ञानिक और तकनीकी विकास से बहुत ज़्यादा गुस्सा है और वह अरब देशों ईरान के बढ़ते प्रभाव से सख्त नाराज हैं। सऊदी अरब के खुफिया विभाग के पूर्व प्रमुख प्रिंस अल्फ़ैसल ने कहा है कि विश्व शक्तियों ने ईरान को यूरेनियम संवर्धन की अनुमति दी तो सऊदी अरब सहित दुनिया के अन्य देश भी पीछे नहीं रहेंगे जबकि ईरान अरब दुनिया के विभिन्न भागों में समस्याएं खड़ी कर रहा है।

ब्रिटिश प्रसारण संस्था को इंटरव्यू देते हुये अल्फ़ैसल ने कहा कि सऊदी अरब, ईरान और विश्व शक्तियों के बीच परमाणु मुद्दे पर होने वाली वार्ता पर गंभीर रूप से चिंतित है। उन्होंने कहा कि ईरान, इराक़ पर अपने वर्चस्व को दिन प्रतिदिन बढ़ावा दे रहा है जो हमें किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं है। इसके अलावा सीरिया, यमन और फिलिस्तीन हो या फिर बहरैन, ईरान अरब दुनिया में समस्याएं खड़ी कर रहा है, इसलिए विनाशकारी हथियारों की आशंका समाप्त हो जाने का कतई यह मतलब नहीं कि ईरान से संबंधित हमारी आशंकाएं समाप्त हो जाएंगी।

अरब सूत्रों के अनुसार सऊदी अरब को इस्राईल के परमाणु हथियारों पर चिंता नहीं है क्योंकि सऊदी और इस्राईली दोनों भाई भाई हैं, सऊदी अरब खुद अरब देशों में हस्तक्षेप करके वहां अस्थिरता व अशांति फैला रहा है और अपने प्रतिद्वंद्वी अरबों को कुचलने के लिए अपने वित्तीय संसाधनों, तेल और दिरहम व दीनार का भरपूर इस्तेमाल कर रहा है और अपने घिनौने अपराधों का आरोप ईरान पर लगा रहा है, जबकि आज पूरी दुनिया के लिये स्पष्ट हो चुका है कि आतंकवाद के पीछे सबसे बड़ा हाथ सऊदी अरब का है।

सूत्रों के अनुसार इस्लामी दुनिया सऊदी अरब की मक्कारी से अच्छी तरह परिचित है सऊदी अरब ने मिस्र के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी को सत्ता से जेल तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई, सऊदी अरब ने मिस्र की सियासी पार्टी मुस्लिम ब्रदरहुड को आतंकवादी बताया है। सऊदी अरब अमेरिका और इस्राईल के साथ मिलकर सीरिया, इराक़, यमन, लीबिया और मिस्र में खुल्लम खुल्ला अस्थिरता पैदा कर रहा है। सऊदी अरब, अरब देशों के अलावा पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान में अस्थिरता पैदा करने का असली कारक है।


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