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Date of publication : 5/12/2014 22:7
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इराक़ी न्यूज़ पोर्टल “अलग़द”

अमेरिका और इस्राईल की मध्य पूर्व में शियों को नाबूद करने की कोशिश

विश्व साम्राज्यवाद ने इस समय इराक़, सीरिया और लेबनान में फ़ौजी जंग और ईरान में आर्थिक जंग छेड़ रखी है और वह सोच रहा है कि इस तरह वह शियों को नाबूद कर सकता है।


विलायत पोर्टलः विश्व साम्राज्यवाद ने इस समय इराक़, सीरिया और लेबनान में फ़ौजी जंग और ईरान में आर्थिक जंग छेड़ रखी है और वह सोच रहा है कि इस तरह वह शियों को नाबूद कर सकता है। रिपोर्ट के अनुसार इराक़ी न्यूज़ पोर्टल “अलग़द” ने एक आर्टिकल में लिखा है: अरब देशों में शुर होने वाले जनांदोलनों से खास कर मध्य पूर्व में, अमेरिकी नीतियों में बदलाव आया है और अमेरिका की यह कोशिश रही है कि आतंकवादी संगठनों ख़ास कर अलक़ायदा की मदद से जनता के क्रांतिकारी आंदोलनों को नाबूद कर दे।
यही कारण है कि जिस देश में भी क्रांति आती थी थोड़े ही समय के बाद आतंकवादियों के काले झंडे वहाँ दिखना शुरू हो जाते थे, आतंकवादी इस्लाम के नाम पर हर काम करते थे और दुनिया के लोगों के अंदर इस्लाम के प्रति भय पैदा होने का कारण बनते थे। इस्राईल और अमेरिका अच्छी तरह जानते हैं कि शुद्ध मोहम्मदी इस्लाम वही शिया इसना अशरी है इसलिए उन्होंने कोशिश की कि इस धर्म के आधारों को हिला दिया जाए। सीरिया पर हमला, शियों पर हमले का आरम्भ माना जाता था क्योंकि तकफीरी आतंकवादी अपने बयान में दावा कर रहे थे कि वह हज़रत ज़ैनब के मज़ार पर हमला करेंगे।
बहादुर शिया जवान तेज़ी के साथ इराक़, ईरान, अफ़ग़ानिस्तान, पाकिस्तान और अन्य देशों से सीरिया पहुंचे और उन्होंने वहशी तकफीरियों को रौज़ो और मज़ारों पर हमला करने की मोहलत नहीं दी। सीरिया में शिया जवानों ने हर ओर से प्रतिरक्षा की और उन्होंने इस देश की सेना तक के हौसले भी बुलंद कर दिए, अगर सीरियाई सेना, शिया जवानों के जेहाद और क्रांति व साहस को न देखती तो कभी भी अपनी ज़मीन का एक बित्ता भी वापस नहीं ले सकती थी, इसलिए कि शिया जवान आत्मविश्वास से भरे थे और हैं और यह विश्वास दुनिया की किसी सेना के पास नहीं है। इस समय हिज़्बुल्लाह के बहादुर शिया जवान सीरिया में इस देश की शांति व्यवस्था की बागडोर अपने हाथ में लिए हुए हैं।
दूसरी ओर तकफीरी आतंकवादियों ने इराक़ में प्रवेश किया, अमेरिका और इस्राईल कुछ अरब देशों की मदद से अल्पावधि में सद्दाम के मानने वाले समूहों और क़बीलों को खरीदने में कामयाब हो गए, वास्तव में यह लोग, इराक़ के कुछ राजनीतिक प्रमुख कबीलों के अहले सुन्नत सरदार और इराक़ के सुन्नी बहुल राज्यों से भागे हुए बअसी थे। उन्होंने इराक़ में तकफीरियों के प्रवेश का मार्ग प्रशस्त किया। तकफीरियों का कुछ हफ्तों में ही इराक़ के कुछ प्रांतों पर कब्जा हो गया और वहां उनकी निगाह में हर काम वैध था।
तकफीरियों का असली हमला शियों के धार्मिक स्थलों पर होता था। तकफीरी कर्बला के नज़दीक पहुंच गए लेकिन उन्हें नजफ़े अशरफ़ के दीनी मरजा के फतवे का सामना करना पड़ा, इराक़ में जेहाद किफ़ाई का फरमान जारी होते ही तकफीरियों की प्रगति रुक गई और हाल ही में स्वंयसेवी फोर्सेज़ ने आतंकवादियों को मार गिराने में कामयाब हुए हैं। वास्तव में अमेरिका, इस्राईल और अरब देश कि जो क्षेत्र में आतंकवाद को चला रहे हैं, वह शियों से जुड़ी सरकारों को गिराने की कोशिश में हैं।
आज जब ISIL के खिलाफ़ बने गठबंधन को हार का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन सीरिया और लेबनान में हिज़्बुल्लाह और स्वंयसेवी फोर्सेज़ यानी सिपाहे बद्र, हिज़्बुल्लाह इराक़, असाएबे अहलुल हक़, और सराया अस्सलाम ने इराक में ISIL को नाबूद की कगार पर धकेल दिया है। यह वही शिया हैं जो अब अपनी विशेष सैन्य रणनीति के साथ आतंकवादियों को विनाश के कगार पर ले जाने में कामयाब हो चुके हैं। विश्व साम्राज्यवाद ने इस समय इराक़ सीरिया और लेबनान में सैन्य युद्ध और ईरान में आर्थिक जंग छेड़ रखी है और वह इस धोखे में है कि वह इस तरह से शियों को नाबूद कर सकता है। सब लोग जान लें कि शिया को जो कि सच्चा धर्म है, नाबूद करने के लिए इस धर्म के दुश्मन हर तरीका अपना रहे हैं ताकि वह इस धर्म के स्तम्भों में कम्पन्न पैदा कर दें, लेकिन अल्लाह की मदद व कृपा से वह अपने उद्देश्य में कभी भी कामयाब नहीं होगा।


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