हिंदुस्तान में सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि का दफ़तर
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کد خبر : 64063
تاریخ انتشار : 2/12/2014 9:37
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मानवाधिकार कार्यकर्ता:

म्यांमार के मुसलमानों को जबरन बेदखली का सामना।

कट्टरपंथी बुद्धिस्टों के हमलों के परिणाम स्वरूप सैकड़ों मुसलमान मारे जा चुके हैं और लाखों बेघर हो गए हैं, हजारों रोहिंगाई मुसलमान पड़ोसी देशों में स्थापित शिविरों में बहुत ज़्यादा मुश्किलों में ज़िंदगी गुजार रहे हैं।

विलायत पोर्टलः सूत्रों के अनुसार म्यांमार सरकार रोहिंगाई मुसलमानों को देश छोड़ने पर मजबूर कर रही है। रोहिंगाई मुसलमानों के अधिकारों के लिए काम करने वाले एक कार्यकर्ता के अनुसार म्यांमार सरकार मुसलमानों की बेदखली की परियोजना पर काम कर रही है।
संयुक्त राष्ट्र पहले ही रोहिंगाई मुसलमानों को दुनिया की सबसे मज़लूम अल्पसंख्यक घोषित कर चुका है। रोहिंगाई मुसलमानों के अधिकारों के लिए काम करने वाले एक कार्यकर्ता सफ़ीउल्लाह ने बताया कि म्यांमार के मुसलमानों को हिंसा के माध्यम से देश छोड़ने पर मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इंसानों की इस्मगलिंग करने वाले तस्कर मलेशिया और अन्य देशों की ओर भागने वाले रोहिंगाई मुसलमानों में लगातार आतंक फैला रहे हैं।
लांचों और छोटे समुद्री जहाजों से म्यांमार से मलेशिया पहुंचने वाले रोहिंगाई मुसलमानों ने भी इसकी पुष्टि की है कि यात्रा दौरान महिलाओं को दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ता है। उल्लेखनीय है कि म्यांमार सरकार रोहिंगाई मुसलमानों को अपने देश का नागरिक नहीं समझती है।
गौरतलब है कि कट्टरपंथी बुद्धिस्टों के हमलों के परिणाम स्वरूप सैकड़ों मुसलमान मारे जा चुके हैं और लाखों बेघर हो गए हैं, हजारों रोहिंगाई मुसलमान पड़ोसी देशों में स्थापित शिविरों में बहुत ज़्यादा मुश्किलों में ज़िंदगी गुजार रहे हैं।


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