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Date of publication : 29/11/2014 23:25
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अमेरिकी शहर फरगोसेन में उग्र भीड़ ने स्टेचू ऑफ़ लिबर्टी को गिरा दिया।

अमेरिकी राज्य मैसूरी के शहर फरगोसेन मे काले नागरिकों के खिलाफ़ पुलिस की क्रूर और जातिवादी कार्यवाहियों के खिलाफ़ जारी विरोध प्रदर्शन और ज़्यादा तेज़ हो गये है और उग्र प्रदर्शनकारियों ने शहर में स्थापित स्टेचू ऑफ़ लिबर्टी को गिरा दिया है


विलायत पोर्टलः अमेरिकी राज्य मैसूरी के शहर फरगोसेन मे काले नागरिकों के खिलाफ़ पुलिस की क्रूर और जातिवादी कार्यवाहियों के खिलाफ़ जारी विरोध प्रदर्शन और ज़्यादा तेज़ हो गये है और उग्र प्रदर्शनकारियों ने शहर में स्थापित स्टेचू ऑफ़ लिबर्टी को गिरा दिया है।

अमेरिकी राज्य मैसूरी के शहर फरगोसेन में नस्लवाद और काले नागरिकों के खिलाफ पुलिस की क्रूर कार्यवाहियों के विरोध ने सख्त रूक अपना लिया है। यह विरोध उस समय और उग्र हो गया जब एक अमेरिकी अदालत ने अमेरिकी पुलिस अधिकारी को बाइज़्ज़त बरी कर दिया, जिसने 17 वर्षीय अश्वेत युवक की गोली मार कर हत्या कर दी थी। इस स्पष्ट अन्याय के खिलाफ अमेरिकी शहर फरगोसेन में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों शुरू हो गये और स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि प्रशासन ने स्पेशल गार्डों को तलब करके शहर के विभिन्न एरियों में तैनात कर दिया है। ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका में शुरू होने वाले नस्लवाद के खिलाफ यह प्रदर्शन दूसरे शहरों में भी फैल चुके हैं।

अमेरिकी शहर फरगोसेन में काले नागरिकों के खिलाफ पुलिस की ओर से अक्सर क्रूर कार्यवाहियां देखने को मिलती रहती हैं। इस शहर में जनता की ओर से पुलिस की अमानवीय और जातिवादी कार्यवाहियों के विरोध का सिलसिला अगस्त में तब शुरू हुआ, जब पुलिस ने माइकल ब्राउन नामक एक 18 वर्षीय काले नागरिक की दिन दहाड़े गोली मार कर हत्या कर दी थी।

उस पर एक सुपर स्टोर से सिगरेट का एक पैकेट चुराने का आरोप लगाया गया था और पुलिस ने इस अपराध में उसे एक कुख्यात अपराधी घोषित कर रखा था। पुलिस ने उसे ऐसी हालत में मार डाला जब वह निहत्था था और उसने सेलेंडर होने के लिये अपने दोनों हाथ ऊपर उठा रखे थे। तब से फरगोसेन में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन शुरू हो गये। अमेरिका के अश्वेत नागरिक पुलिस की इस कार्यवाही और अब एक और युवा काले की हत्या में शामिल पुलिस अधिकारी को बाइज़्ज़त बरी किये जाने को काले नागरिकों के खिलाफ़ खुला अत्याचार और अन्याय मानते हैं।

अमेरिकी शहर फरगोसेन की आबादी 21 हजार लोगों पर आधारित है, जिनमें से 70 प्रतिशत काले हैं। लेकिन इसके बावजूद इस शहर की पुलिस में सफेद सिपाहियों की संख्या काले सिपाहियों से 15 गुना अधिक है। फरगोसेन पुलिस ने हाल ही में 17 वर्षीय अश्वेत युवा के हत्यारे पुलिस अधिकारी को छिपाने की कोशिश की।, इस बार भी मारा जाने वाला निहत्था अश्वेत था।

अमेरिकी शहर फरगोसेन में शुरू होने वाले प्रदर्शन और सार्वजनिक विरोध इस बात का कारण बने हैं कि अमेरिकी पुलिस विभाग अपने अधिकारियों और सिपाहियों की ओर से हथियार रखने की खुली आजादी खत्म करने की सोच में पड़ जाए। अमेरिकी पुलिस विभाग ऐसा कानून बनाने की सोच रहा है जिसके तहत पुलिस अधिकारियों और सिपाहियों को केवल विशेष परिस्थितियों में हथियार पास रखने की अनुमति होगी। याद रहे नाइन इलेवन की घटना के बाद अमेरिकी पुलिस को बड़ी छूट दे दी गई थी और उन्हें आतंकवाद से मुकाबले के बहाने हर प्रकार के हथियार पास रखने की भी अनुमति मिल गई थी।

माइकल ब्राउन के हत्यारे पुलिस अधिकारी का नाम डैरेन विल्सन है। इस ई बीबीसी टीवी चैनल को दिए गए एक इंटरव्यू में कहा है कि काले नागरिक की हत्या करके उसने अपनी कानूनी ज़िम्मेदारी को अंजाम दिया है।

फरगोसेन में हुए प्रदर्शनों के पक्ष में अमेरिका के दूसरे शहरों जैसे वाशिंगटन, न्यूयॉर्क आदि में भी लोग सड़कों पर निकल आए हैं। प्रदर्शनकारियों ने हाथ में प्ले कार्ड उठा रखे हैं जिन पर “फरगोसेन के नागरिकों के समर्थन की घोषणा करते हैं”, “पुलिस की ओर से जातिवाद हिंसा बंद की जाए”, “माइकल ब्राउन के घर वालों को न्याय दिया जाए” “पुलिस को हर 48 घंटे में एक काले की हत्या नहीं करनी चाहिए” जैसे नारे दर्ज थे। अमेरिका के विभिन्न शहरों में काले नागरिकों के खिलाफ़ पुलिस के व्यवहार और जातिवादी भेदभाव के विरूद्ध विरोध प्रदर्शनों में शिद्दत आ गई है।

माइकल ब्राउन की घटना जिसने अमेरिका भर में हिंसक प्रदर्शनों का सिलसिला शुरू कर दिया है, न इस तरह की पहली घटना थी और न ही आख़री होगी। अतीत में भी अमेरिका में इस तरह की बेशमार घटनाएं घटित हो चुकी हैं। जनवरी में न्यूयॉर्क पुलिस के कई अधिकारी एक 43 वर्षीय अश्वेत पर टूट पड़े।

एक पुलिस अधिकारी ने उसे गले से दबोच लिया। काले नागरिक को सांस की बीमारी थी। वह बेचारा चीख़ता रहा कि मुझे सांस नहीं आ रही लेकिन पुलिस ने उसे न छोड़ा जब तक वह उसी हालत में दम तोड़ गया। इसी तरह माइकल ब्राउन की पुलिस के हाथों हत्या होने के एक सप्ताह बाद एक और काला नागरिक पुलिस के हाथों मार दिया जाता है।

20 अगस्त को सोशल मीडिया पर प्रकाशित होने वाले एक वीडियो में उसकी हत्या की कहानी उजागर होती है। इसी तरह 8 अक्टूबर को एक और काला नागरिक, पुलिस फायरिंग से मारा गया। इस पर पुलिस ने लगभग 17 गोलियां फायर कीं।

मानवाधिकार संगठनों ने अमेरिका में काले नागरिकों के खिलाफ़ पुलिस की हिंसक कार्यवाहियों पर अपनी चिंता व्यक्त की है और पुलिस द्वारा नागरिकों के खिलाफ़ ताक़त के ग़लत इस्तेमाल की कड़े शब्दों में आलोचना की है। अमेरिका में रहने वाले काले नागरिकों के खिलाफ़ सामाजिक और आर्थिक स्तर पर भेदभाव पाया जाता है।

अश्वेत नागरिक अमेरिका के गरीब और बैकवर्ड माने जाते हैं। हालांकि इस समय अमेरिका में एक अश्वेत यानी बराक ओबामा राष्ट्रपति के पद पर हैं लेकिन उनके राष्ट्रपति बनने के बाद भी अमेरिका में काले नागरिकों के अधिकारों के उल्लंघन में कोई फर्क नहीं पड़ा।

इन सारी घटनाओं से यह महत्वपूर्ण सवाल उठता है कि एक ऐसा देश जो अपने नागरिकों के अधिकारों का उल्लंघन कर रहा हो किस तरह दुनिया भर में मानवाधिकार का ठेकेदार और चैंपियन बना फिरता है? वाशिंगटन सरकार दुनिया के जिस हिस्से में चाहती है मानवाधिकार उल्लंघन का बहाना बनाते हुए सैन्य हस्तक्षेप कर अपने अवैध लक्ष्यों तक पहुंच जाती है।


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