हिंदुस्तान में सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि का दफ़तर
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کد خبر : 63158
تاریخ انتشار : 20/11/2014 23:47
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ISIL यज़ीदियत का आधुनिक चेहरा।

कराची में हुसैन डे को संबोधित करते हुये वक्ताओं ने कहा कि अमेरिका और उसके सहयोगियों की ISIL के खिलाफ़ कार्यवाहियाँ मात्र एक दिखावा है, सब जानते हैं कि ISIL का समर्थन अमेरिका और इस्राईल हैं। पिछले सालों की तरह इस साल भी कराची में आईएसओ केयू इकाई द्वारा हुसैन डे का आयोजन किया गया। हुसैन डे की अध्यक्षता डॉक्टर आबिद अज़हर ने की जबकि विशेष मेहमान के रूप में जाफ़रिया एलायंस के प्रमुख अल्लामा अब्बास कुमैली ने सम्बोधित किया।


विलायत पोर्टलः कराची में हुसैन डे को संबोधित करते हुये वक्ताओं ने कहा कि अमेरिका और उसके सहयोगियों की ISIL के खिलाफ़ कार्यवाहियाँ मात्र एक दिखावा है, सब जानते हैं कि ISIL का समर्थन अमेरिका और इस्राईल हैं।
पिछले सालों की तरह इस साल भी कराची में आईएसओ केयू इकाई द्वारा हुसैन डे का आयोजन किया गया। हुसैन डे की अध्यक्षता डॉक्टर आबिद अज़हर ने की जबकि विशेष मेहमान के रूप में जाफ़रिया एलायंस के प्रमुख अल्लामा अब्बास कुमैली ने सम्बोधित किया।
इसके अलावा सुन्नी एकता परिषद कराची के नेता मौलाना फैसल अजीज, मौलाना रजा दाउदानी और केयू के शिक्षकों और छात्रों ने भी संबोधित किया।
हुसैन डे के अवसर पर कार्यवाहक वाइस चांसलर डॉक्टर आबिद अज़हर ने अपनी स्पीच में कहा कि शहादत केवल जान देने का नाम नहीं बल्कि किसी उद्देश्य के लिए सम्मान की मौत मरने का नाम शहादत है। उन्होंने कहा कि मानवीय इतिहास में अमल व कैरेक्टर की रौशन मिसालें अगर कहीं मिलती है तो वह केवल कर्बला की घटना है। अपने संबोधन में अल्लामा अब्बास कुमैली ने कहा कि यज़ीदियत, ISIL जैसे संगठनों के रूप में फिर से अपना सिर उठा रही है।
इमाम हुसैन अ. में ही यह साहस था कि झूठ के चेहरे को बेनकाब करें। आज दुनिया इमाम हुसैन की ओर देख रही है क्योंकि इमाम हुसैन अ. ने कर्बला के मैदान में विचारों को बदल डाला, कर्बला कोई ऐसी घटना नहीं है कि जिस पर अतीत के बादल छा जायें बल्कि कर्बला हमेशा ज़िंदा रहने वाली घटना है।
उन्होंने कहा कि इस दौर में हुकूमत और सत्ता में रहने वालों को विश्वसनीय माना जा रहा है। अगर हज़रत इमाम हुसैन बलिदान न देते तो आज यज़ीद भी बड़ी हस्ती माना जाता। हज़रत इमाम हुसैन ने तानाशाही और बादशाहत के विरूद्ध जंग की वरना आज भी मुसलमान हर शासक को अल्लाह का प्रतिनिधि समझा जाता है।
हुसैन डे को संबोधित करते हुए अल्लामा अब्बास कुमैली का कहना था कि केयू के अध्यक्ष डॉ कैसर खान को संदेश देना चाहता हूं कि केयू में कई मुद्दे हैं जो अब तक हल नहीं हुए हैं, उन्होंने सवाल किया कि यह कहां का न्याय है कि यूनिवर्सिटी में अन्य धर्मों की इबादतगाहें हों और शियों की मस्जिद न हो।
उन्होंने सेंडीकेट सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा कि क्या हुसैन सांप्रदायिकता का नाम है? मस्जिद शियों का अधिकार है कहीं ऐसा न हो कि हम अपने अधिकार को विरोध के माध्यम से हासिल करने के लिए मजबूर हो जायें।
हुसैन डे में मौजूद शिक्षकों और छात्रों को सम्बोधित करते हुए सुन्नी मौलाना रेजा दाउदानी ने कहा कि इमाम हुसैन अ. ने कर्बला के मैदान में हक व बातिल के बीच ऐसी लकीर खींची जो रहती दुनिया तक आज भी क़ायम रहेगी। इमाम हुसैन अ. की कुर्बानी का मक़सद हज़रत रसूले इस्लाम स.अ की बक़ा और इस्लाम की सरबुलंदी था।
उन्होंने कहा कि आज भी इराक़ और सीरिया में मुसलमानों के सिर शरीर से अलग किए जा रहे हैं, मुसलमानों के नरसंहार पर मुस्लिम देशों की चुप्पी सोचने लायक़ है जबकि अमेरिका और उसके सहयोगियों की ISIL के खिलाफ़ कार्रवाई मात्र एक दिखावा है सब जानते हैं कि ISIL का समर्थन अमेरिका और इस्राईल कर रहे हैं।
मौलाना फैसल अजीज ने कहा कि इमाम हुसैन अ. ने असत्य की बैअत से इंकार करके हर दौर में यज़ीदी ताक़तों से इंकार का तरीक़ा स्पष्ट कर दिया।
उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन अ. के कैरेक्टर की पहचान, आज के दौर की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। आज भी यज़ीदी चरित्र मौजूद है बस हमें हुसैनी चरित्र को अपनाने की ज़रूरत है।


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