हिंदुस्तान में सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि का दफ़तर
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کد خبر : 63133
تاریخ انتشار : 19/11/2014 21:16
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इस्लामी देश बने हैं सबसे ज़्यादा आतंकवाद का निशाना।

तंकवाद पर अंतर-राष्ट्रीय रिपोर्ट में कहा गया है कि 2013 में आतंकवाद की घटनाओं में मरने वालों की संख्या में 61 प्रतिशत बढ़ोत्तरी हुई है जिसमें लगभग 18000 लोग मारे गए हैं।


विलायत पोर्टलः आतंकवाद पर अंतर-राष्ट्रीय रिपोर्ट में कहा गया है कि 2013 में आतंकवाद की घटनाओं में मरने वालों की संख्या में 61 प्रतिशत बढ़ोत्तरी हुई है जिसमें लगभग 18000 लोग मारे गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार आतंकवाद पर प्रकाशित होने वाली रिपोर्ट ग्लोबल टेरेरिज़्म इंडेक्स 2014 के अनुसार पिछले साल 2013 में दुनिया भर में 10 हजार आतंकवादी हमले हुए हैं जो 2012 की तुलना में 44 प्रतिशत ज़्यादा हैं, इन हमलों में 17958 लोग मारे गए। रिपोर्ट के अनुसार आतंकवादी हमलों में होने वाली 80 प्रतिशत मौतें इराक़, सीरिया, अफगानिस्तान, पाकिस्तान और नाईजीरिया में हुई हैं। जिनमें कुल मिलाकर 14722 लोग मारे गए हैं, ग्लोबल टेरेरिज़्म इंडेक्स के अनुसार 162 देशों में आतंकवाद से सबसे ज़्यादा प्रभावित होने वाला देश इराक़ है, पाकिस्तान तीसरे स्थान पर है।
इंडेक्स के अनुसार 2013 में पाकिस्तान में 1933 हिंसक घटनाएं हुई जिसमें 2345 लोग मारे गए और 5035 लोग घायल हुए सूची के अनुसार भारत पांचवें नंबर पर है। 2013 में आतंकवाद की सबसे ज़्यादा घटनाएं इराक़ में हुई हैं, जहां आतंकवादियों के हाथों 6362 लोग मारे गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार 66 प्रतिशत चरमपंथी हमलों में तालेबान, आईएसआईएल, बोकोहराम और अलक़ायदा शामिल हैं और यह चारों संगठन कट्टरपंथी वहाबी विचारधाराओं का प्रचार करते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि वहाबियत के प्रसार को रोकने के लिए इस्लाम के अंदर उदार सुन्नी विचारधारा को मज़बूत करना चाहिए। रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया भर 60 देश ऐसे हैं जहां आतंकवाद के कारण मौतें हुई हैं। अन्य पांच देशों में भारत, सोमालिया, फिलीपींस, यमन और थाईलैंड शामिल हैं जहां विश्व स्तर पर होने वाली मौतों में से 2.3 प्रतिशत मौतें हुई हैं।
रिपोर्ट में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद से जुड़े तीन महत्वपूर्ण कारकों का उल्लेख किया गया है जिसके अनुसार विभिन्न जातीय, धार्मिक और भाषाई समूहों के बीच जबरदस्त सामाजिक संघर्ष, हुकूमत के संरक्षण में की जाने वाली हिंसा जैसे हत्याएं और मानवाधिकारों के हनन आदि का नाम सबसे ऊपर है। कुल मिलाकर हिंसा के बढ़ते स्तर जिसमें संगठित हमलों में होने वाली मौतों या हिंसक अपराधों के बढ़ते स्तर और शांति संगठन (आई ई पी) की इस रिपोर्ट में कहा गया कि न केवल आतंकवाद की शिद्दत में बढ़ोत्तरी हो रही है बल्कि इसके क्षेत्र में भी विस्तार हो रहा है।
आई ई पी ने बीबीसी को बताया कि आतंकवाद के संबंध में होने वाली मौतों में बढ़ोत्तरी का मुख्य कारण सीरिया संकट है जो 2011 में शुरू हुआ। उन्होंने कहा कि सीरिया में अस्थिरता के परिणाम स्वरूप हमारे विचार में यह संकट अब इराक़ में भी फैल गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बहुत से मुस्लिम बहुल देशों में शांति है और वहां अभी आतंकवाद का साया नहीं पड़ा है। उनमें क़तर, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत आदि शामिल हैं। दुनिया के दूसरे हिस्सों में आतंकवाद के कारणों में राजनीतिक, राष्ट्रवाद और अलगाववादी आंदोलन शामिल हैं।


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