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Code : 62039
Date of publication : 2/11/2014 0:14
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इस्राइली सैनिकों में आत्महत्या के रुझान में भारी वृद्धि।

मानसिक रोगों में ग्रस्त इस्राईली फौजियों में आत्महत्या के रुझान में भारी वृद्धि हुई है। पिछले एक महीने के दौरान तीन इस्राईली सैनिकों ने आत्महत्या की है।

अहलेबैत (अ) समाचार एजेंसी अबना की रिपोर्ट के अनुसार मानसिक रोगों में ग्रस्त इस्राईली फौजियों में आत्महत्या के रुझान में भारी वृद्धि हुई है। पिछले एक महीने के दौरान तीन इस्राईली सैनिकों ने आत्महत्या की है। ईरान के सरकारी रेडियो की एक रिपोर्ट के अनुसार यह तीनों इस्राईली सेना के उस दस्ते में शामिल थे जिसने गज़्ज़ा पर थोपी गई इस्राईली सरकार की हालिया जंग के दौरान फिलिस्तीनियों पर सबसे गंभीर हमले किये थे। इस्राईली सरकार ने 8 जुलाई 2014 से ग़ज़्जा पट्टी पर अपने हमले शुरू किये थे और यह हमले पचास दिनों तक जारी रहे थे। पचास दिनों के बाद 26 अगस्त 2014 को फिलिस्तीनी गुट काहिरा में ज़ायोनी शासन के साथ जंग विराम से सहमत हो गये थे।हालांकि जंग विराम के बाद इस्राईल और फिलिस्तीनी गुटों के बीच लड़ाई खत्म हो गई लेकिन इस्राईली सैनिकों ने गज़्ज़ा खासकर आम नागरिकों पर जो हिंसा जारी रखी उसके नकारात्मक परिणाम अभी तक इस्राईली फौजी भुगत रहे हैं।इस्राईल के टीवी चैनल 10 ने रिपोर्ट दी है कि पिछले एक महीने के दौरान कम से कम तीन इस्राईली सैनिकों ने आत्महत्या कर ली है। यह वह फौजी थे जिन्होंने गज़्ज़ा दंग में भाग लिया था। सूत्रों ने कहा है कि यह फौजी उस दस्ते में शामिल थे जो गज़्ज़ा पर क्रूर हमलों और हिंसा ढाने के हवाले से मशहूर है। इसलिए कहा जा सकता है कि ग़ज़्जा पट्टी पर इस्राईल के हमले का एक नकारात्मक परिणाम सैनिकों और उनके परिवारों में मनोवैज्ञानिक समस्याएं पैदा होना है। महत्वपूर्ण बात यह है कि जंग में हिंसा और सैनिकों की आत्महत्या के आंकड़ों के बीच सम्बंध पाया गया है, विशेषज्ञों का कहना है कि वर्ष 2000 में हिज़्बुल्ला से हार खाने के बाद इस्राईली सैनिकों के बीच आत्महत्या का रूझान पैदा हुआ था जिसमें हिज़्बुल्ला की दृढ़ता और फिलिस्तीनी गुटों से अधिक पराजित होने के बाद बढ़ोत्तरी हुई है। इस्राईल से प्रकाशित होने वाले अखबार हारटेज़ ने 2012 में अपनी एक रिपोर्ट में कहा था कि 2002 से लेकर 2012 तक के वर्षों में कम से कम 237 इस्राईली सैनिकों ने आत्महत्याएं की हैं।दूसरे शब्दों में यह कहा जा सकता है कि 2002 से 2014 तक की अवधि में हर साल औसतन 24 इस्राईली सैनिकों ने आत्महत्या की है। इस्राईली संसद के जांच केंद्र ने 2013 में एक रिपोर्ट जारी की जिसमें कहा 2007 से 2013 के दौरान 124 इस्राईली सैनिकों ने आत्महत्या की।महत्वपूर्ण बात यह है कि कई जंगों के बाद इस्राईली सैनिकों के लिए पैदा होने वाली मनोवैज्ञानिक समस्याएं सैनिकों के परिवारों की नाराजगी, निराशा और गुस्से का कारण बनी हैं। इन परिवारों का कहना है कि इस्राइली सेना जंग के बाद केवल घायलों का इलाज करती है हालांकि इस्राईली सैनिकों को जिन मनोवैज्ञानिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है वह उनके शरीर पर आने वाले घावों से ज्यादा गंभीर होती हैं लेकिन इस्राईली सरकार इस ओर कोई ध्यान नहीं देती है।2007 से 2013 तक की अवधि में आत्महत्या करने वाले 37 प्रतिशत इस्राईली चूंकि दुनिया के दूसरे इलाक़ों से पलायन करके अधिकृत फिलिस्तीनी क्षेत्रों में आए हैं इसलिए कहा जा सकता है कि इस्राईली सैनिकों की मनोवैज्ञानिक बीमरियों और उनमें बढ़ता हुआ आत्महत्या का रूझान अधिकृत फिलिस्तीनी क्षेत्रों में दुनिया के दूसरे इलाक़ों से हो रहा पलायन इसका एक प्रमुख कारण माना जा सकता है।


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