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Date of publication : 31/8/2014 15:37
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विलायत सैटेलाइट टीवी के चीफ़ डायरेक्टर।

इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम के दृष्टिकोण से शिया सुन्नी के बीच रवादारी का तरीक़ा

वहाबी विचारधारा के सबसे बड़े प्रचारक इब्ने तैमिया हर्रानी इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम के बारे में कहते हैं, वह एक बेमिसाल इंसान थे कि इतिहास में जिसका कोई उदाहरण हमें देखने में नहीं मिलता है और हमारे अहले सुन्नत के इमामों को यह गौरव हासिल है कि वह जाफ़र इब्ने मोहम्मद के शिष्य थे।

विलायत पोर्टलः वहाबी विचारधारा के सबसे बड़े प्रचारक इब्ने तैमिया हर्रानी इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम के बारे में कहते हैं, वह एक बेमिसाल इंसान थे कि इतिहास में जिसका कोई उदाहरण हमें देखने में नहीं मिलता है और हमारे अहले सुन्नत के इमामों को यह गौरव हासिल है कि वह जाफ़र इब्ने मोहम्मद के शिष्य थे। विलायत सैटेलाइट चैनल के चीफ़ डायरेक्टर हुज्जतुल इस्लाम वल मुसलेमीन हुसैनी क़ज़वीनी ने इमाम सादिक़ अलैहिस्सलाम के संबंध में ईरान के क़ुम शहर में हज़रत फ़ातेमा मासूमा सलामुल्लाह अलैहा के हरम में आयोजित शार्ट कोर्स में इस्लामी एकता और फ़िक़्हे जाफ़री की चमक में शियों के छठे इमाम की मौजूदा दौर में भूमिका की ओर इशारा करते हुए कहाः आज इस्लामी एकता का विषय इस्लामी दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में गिना जाता है और इस्लामी इंक़ेलाब के सुप्रीम लीडर हज़रत आयतुल्लाह ख़ामेनई व दूसरे मराजे व उल्मा ने भी इस पर बहुत बल दिया है और यह इस्लामी दुनिया के प्रमुख मुद्दों में से है। एकता एक क़ुरआनी आवाज़ है।

उन्होंने यह बताते हुए कि एकता वास्तव में क़ुरआनी आवाज़ है कहाः क़ुरआन करीम ने सूरए ऑले इमरान की आयत नंबर 103 में साफ़ साफ़ आदेश दिया है कि “واعتصموا بحبل اللہ جمیعا ولا تفرقوا” " और अल्लाह की रस्सी को मज़बूती से थाम लो और आपस में फूट मत डालो और क़ुरआन की आयत के अनुसार ऐसा करना वाजिब है। विलायत सैटेलाइट चैनल के चीफ़ डायरेक्टर ने अपनी बात जारी रखते हुये कहाः अल्लाह तआला ने सूरए अम्बिया की आयत नम्बर 92 में इरशाद फ़रमाता है, “ان ھذہ امتکم امۃ واحدۃ و انا ربکم فاعبدون” यह तुम्हारी उम्मत जो एक ही उम्मत है और मैं तुम्हारा परवरदिगार हूँ इसलिए मेरी इबादत करो। ईरान के हज़रत वली-ए-अस्र रिसर्च सेंटर के प्रमुख ने इस ओर इशारा करते हुए कि अल्लाह तआला ने सूरए हुजरात की आयत नंबर 10 में एक बेहतरीन प्वाइंट की ओर इशारा किया है और याद दिलाया हैः “انما المومنون اخوۃ فاصلحوا بین اخویکم واتقوا اللہ لعلکم ترحمون’ वास्तव में मोमेनीन आपस में भाई हैं इसलिए अपने भाइयों के बीच सुलह करवाओं और अल्लाह से डरो ताकि तुम पर रहम किया जाए। फूट डालना क़ुरआन की नज़र में। उन्होंने कहा कि क़ुरआन ने फ़ूट डालने पर बदतरीन सज़ा देने की बात की है और सूरए इनाम की आयत 56 में कहा हैः “قل ھو القادر علی ان یبعث علیکم عذابا من فوقکم او من تحت ارجلکم او یلبسکم شیعا” कह दो कि वह (अल्लाह) समर्थ है कि तुम्हारे ऊपर से या तुम्हारे पैरों के नीचे से तुम पर अज़ाब भेजे या बिखरी हुई टोलियों के रूप में तुम्हे एक दूसरे से मिला दे। हुज्जतुल इस्लाम वल मुसलेमीन हुसैनी क़ज़वीनी ने कहा सूरए इनाम की आयत नंबर 159 में अल्लाह तआला ने कहा है “ان الذین فرقوا دینھم و کانوا شیعا لست منھم فی شیئ انما امرھم الی اللہ ثم ینبئھم بما کانوا یفعلون” जिन लोगों ने अल्लाह के दीन में फूट डाली और समूहों में बंट गए, निश्चित रूप से उनके बारे में तुम्हारी कोई जिम्मेदारी नहीं है उनकी जिम्मेदारी अल्लाह पर है औऱ उसके बाद जो कुछ उन्होंने अंजाम दिया है वह उन्हें उससे अवगत कराएगा। इस्लामी समाज, रसूले अकरम स.अ की नज़र में। उन्होंने रसूले अकरम स.अ की नज़र में इस्लामी समाज की ओर इशारा करते हुए कहा: इस्लामी समाज की हैसियत नबी-ए-अकरम स.अ. की नज़र में एकता और भाईचारे से बढ़ कर है और एक हदीस में आपने फ़रमाया हैः “مثل المومنین فی تواددھم و تراحمھم و تعاطفھم مثل الجسد اذا اشتکی منه عضو تداعی له سائر الجسد با لسھر و الحمی” यानी ईमान वाले एक जिस्म के समान होते हैं वह एक जिस्म के हिस्सों की तरह है कि अगर किसी एक अंग को दर्द होता है तो सभी उसके साथ झेलते है। एकता, शिया उल्मा की नज़र में। विलायत सैटेलाइट टीवी चैनल के चीफ़ डायरेक्टर ने याद दिलाया कि हमारे उल्मा ने एकता और आपसी भाईचारे के बारे में बहुत कुछ कहा है कि उनमें से एक बहस आयतुल्लाह सीसतानी की बातचीत है जो उन्होंने शियों के बीच की था, आपने कहा था, “لا تقولوا اخواننا السنه بل قولوا انفسنا اھل السنه” यह न कहें कि अहले सुन्नत हमारे भाई हैं बल्कि यह कहें कि अहले सुन्नत हमारी जान हैं। हज़रत अली अलैहिस्सलाम और इस्लामी एकता। हौज़ ए इल्मिया क़ुम के इस उस्ताद ने इस्लामी एकता के बारे में हज़रत अली अलैहिस्सलाम के दृष्टिकोण और मुसलमानों के साथ उनके व्यवहार पर रौशनी डालते हुए कहा कि हज़रत अली अलैहिस्सलाम इसके बावजूद कि 25 साल तक घर में रहने पर मजबूर थे और उनके अधिकार को उनसे छीन लिया गया था और यहां तक कि आपको यह कहना पड़ा कि मेरे गले में जैसे हड्डी अटकी हो और आंख में कांटा चुभा हो, लेकिन जब भी इस्लामी एकता की बात आती थी तो लोगों को एकता की दावत देते थे। हज़रत वली-ए-अस्र रिसर्च सेंटर के प्रमुख ने नहजुल बलाग़ा के खुत्बा न. 126 की ओर इशारा करते हुए किया कि जिसमें इमाम अ. ने फ़रमाया है: “و الزموا السواد الاعظم فان ید اللہ مع الجماعۃ و ایاکم و الفرقه فان الشاذ من الناس للشیطان کما ان الشاذ من الغنم للذئب الا من دعا الی ھذا الشعار فا قتلوہ ولو کان تحت عمامتی ھذہ /” / और हमेशा ऐसी बड़ी पार्टी के साथ जो सच्चाई के रास्ते पर चल रही हो, रहो कि अल्लाह की मदद जमाअत के साथ है और फूट से बचो कि अकेला आदमी शैतान का शिकार होता है कि जिस तरह अकेली भेड़, भेड़ियों का शिकार बन जाती है, याद रखो कि लोगों में से जो कोई भी फूट और जुदाई का बिगुल बजाए उसे मार दो, चाहे वह मेरी ही शरण में ही क्यों न हो। एकता छठे इमाम की सीरत की रौशनी में। हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लेमीन हुसैनी क़ज़वीनी ने इस्लामी राष्ट्र की एकता के बारे में इमाम सादिक़ अलैहिस्सलाम की शैली को बयान करते हुए याद दिलाया कि हज़रत ने इस संबंध में केवल नारेबाजी से काम नहीं लिया बल्कि आपने समाज में एकता को अमली बनाया। हौज़ ए इल्मिया क़ुम के इस मशहूर उस्ताद ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा: इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम के चार हजार से अधिक शिष्य थे और विभिन्न समुदायों से संबंध रखते थे। इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम के बारे में इब्ने तैमिया का दृष्टिकोण। विलायत सैटेलाईट टीवी के चीफ़ डायरेक्टर ने इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम के बारे में शियों के दुश्मनों के बयानों की ओर इशारा करते हुए कहा कि वहाबी विचारधारा के सबसे बड़े प्रचारक इब्ने तैमिया हर्रानी इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम के बारे में कहते हैं, वह एक बेमिसाल इंसान थे कि इतिहास में जिसका कोई उदाहरण हमें देखने में नहीं मिलता है और हमारे अहले सुन्नत के इमामों को यह गौरव हासिल है कि वह जाफ़र इब्ने मोहम्मद के शिष्य थे। हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लेमीन हुसैनी क़ज़वीनी ने ताकीद की कि इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम के सभी विरोधी आपके क्लास में हिस्सा लेते थे और यह व्यावहारिक एकता का खुला उदाहरण है। उन्होंने मुख़्तसर तोहफ़ए इसना अशरिया नामक किताब की एक रिवायत की ओर इशारा करते हुए कहा: इस रिवायत में आया है, “قال الآلوسی : ھذا ابو حنیفه و ھو من اہل السنه یفتخر و یقول بافصح لسان : لو لا السنتان لھلک النعمان ،یعنی السنتین اللتین جلس فیھما لاخذ العلم عن الامام جعفر الصادق” . अबू हनीफ़ा जोकि अहले सुन्नत में से हैं बड़े ही गर्व से कहते हैं कि अगर वह दो साल न होते तो निश्चित रूप से नोमान मारे जाते यानी वह दो साल कि जिनमें उन्होंने इमाम सादिक़ अ के में क्लास में बैठकर इल्म हासिल किया। हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लेमीन हुसैनी क़ज़वीनी ने यह बताते हुए कि इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम से बहुत सारे शिष्यों ने इल्म हासिल किया है, कहाः हज़रत का एक शिष्य अबान इब्ने तग़लिब हैं कि जिनके पास हज़रत की तरफ़ से इज्तेहाद और फ़तवे का लाइसेंस था और इमाम ने उनके बारे में कहा हैः अबान ने मुझ से तीस हजार हदीसें नक्ल की हैं उन्हें सुनो और लोगों के बीच फैलाओ। कट्टरपंथता उन्होंने कहा: दुर्भाग्य से एक मुश्किल जिससे आज इस्लामी दुनिया को सामना है, कुछ कट्टरपंथियो का वुजूद है कि जो मीडिया के माध्यम से अहले सुन्नत और उनके ख़लीफ़ा को बुरा भला कहते हैं और सोचते हैं कि जन्नत में उनका स्थान सबसे ऊपर होगा, इस समूह ने मीडिया में एकता सप्ताह को बराअत सप्ताह का नाम दिया है और हमारी नसीहतें उनके लिए बिल्कुल उपयोगी नहीं हैं। विलायत टीवी के चीफ़ डायरेक्टर ने इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम की एक रिवायत की ओर जो काफ़ी जिल्द 2 पेज 636 पर है, इशारा करते हुये कहाः मुआविया बिन वहब ने इमाम सादिक़ अलैहिस्सलाम की सेवा में सवाल कियाः کیف ینبغی لنا ان نصنع فیما بیننا و بین قومنا و بین خلطائنا من الناس ممن لیسوا علی امرنا ؟ قال : تنظرون الی آئمتکم الذین تقتدون بھم فتصنعون ما یصنعون فواللہانھم لیعودون مرضاھم و یشھدون جنائزھم و یقیمون الشھادۃ لھم و علیھم و یوئدون الامانۃ الیھم हम अपनी क़ौम और अहले सुन्नत के साथ कैसा रवय्या अपनायें कि जो आपकी विलायत के सिलसिले में हमारे जैसे नहीं हैं? हज़रत ने फ़रमाया अपने इमामों को देखो कि जिनको तुम लोग मानते हैं जो वह करें तुम भी वही करो। अल्लाह क़ी क़सम तुम्हारे इमाम, उनके बीमारों की अयादत करते थे उनके मुर्दों के अंतिम संस्कारों में शरीक होते थे और उनके पक्ष में और उनके ख़िलाफ़ गवाही देते थे और उनकी अमानत वापस लौटाते थे। शियों को अलग करने के लिए 90 करोड़ डॉलर का इंवेस्टमेंट!!! उन्होंने अमेरिका की ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए (CIA) के उप प्रमुख के बयान की ओर इशारा करते हुए कहा: डॉक्टर माइकल ब्रांट ने अपने बयान में कहा है कि अमेरिका ने 90 करोड़ डॉलर खर्च किए हैं ताकि शियों को दुनिया में अलग कर सके और शिया हुकूमतों को ख़त्म कर सकें और वह इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि शियों को नाबूद करने का एक तरीका शियों और अहले सुन्नत के बीच मतभेद पैदा करना है, इसलिए दोनों तरफ़ के कट्टरपंथी व भेदभाव वाले लोगों को एक दूसरे के खिलाफ़ भड़काया जाना चाहिए। हौज़ ए इल्मिया क़ुम इस रिसर्चर ने कहाः ब्रांट ने अपने बयान में आगे कहा है कि अमेरिका अफ़ग़ानिस्तान और इराक़ में अत्याचार करने के बाद अपने देश के अंदर बहुत सी आंतरिक कठिनाइयों में फंसा हुआ है, लोग सड़कों पर निकल आए और उन्होंने प्रदर्शन किए और उन्होंने अमेरिका की नीति पर आपत्ति जताई और इस देश के अधिकारियों से कह रहे थे कि आप हमसे टैक्स लेते हैं और उसे अफ़ग़ानिस्तान और इराक़ में ख़र्च करते हैं, इसलिए इस मुश्किल के पेश आने और उसका जवाब न दे सकने के बाद वह इस नतीजे पर पहुंचे कि तकफ़ीरियों को उकसाया जाए और दूसरी तरफ अमेरिका के लोगों के टेक्स को इस क्षेत्र में खर्च करने के बजाय अरब सरकारों के पैसे से तकफीरियों का समर्थन करे और मुसलमानों को एक दूसरे से लड़ा दे। हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लेमीन हुसैनी क़ज़वीनी ने याद दिलाया: वह हत्या और खडून ख़राबे के दीवाने हैं और उनके लिए कोई फर्क नहीं पड़ता कि मुसलमान मारे जाएं या दाइश वाले और तकफ़ीरी। उन्होंने कहाः आज इस्लामी दुनिया की मुश्किल दाइश और तकफ़ीरियों का वुजूद नहीं है बल्कि मुश्किल वह कुंजी है जो उन्हें घुमाती है और उनके लिए पैसे और संसाधन उपलब्ध करती है। तकफीरियों के बारे में क़रकीज़िस्तान के राष्ट्रपति के सलाहकार का दृष्टिकोण। क़रकीज़िस्तान के राष्ट्रपति के सलाहकार के साथ हुई मुलाकात की ओर इशारा करते हुए विलायत टीवी चीफ़ डायरेक्टर ने कहा कि राष्ट्रपति के सलाहकार का कहना था कि मीडिया में सल्फ़ियों के प्रचार की वजह से इस समय दसियों हज़ार लोग मध्यपूर्व, इराक और सीरिया में जमा हुये हैं और लड़ने में व्यस्त हैं और लोग सोच रहे हैं कि अगर पैगम्बर स.अ के समय में वह जंग नहीं कर सके तो आज इन जंगों में भाग लें और शहीद हो जायें!!!!!!!!!!!!!!


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