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Date of publication : 3/8/2016 20:17
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मासूमा-ए-क़ुम कौन हैं?

आपने ईरान के सबसे मशहूर शहर क़ुम का नाम ज़रूर सुना होगा। जो एक मुकद्दस (पवित्र) शहर होने के साथ साथ इस्लामी दुनिया का दिल और सेन्टर माना जाता है। इस पाक शहर में इमाम मूसा काज़िम अलैहिस्स्लाम की बेटी और इमाम रेज़ा अलैहिस्सलाम की बहन हज़रते मासूमा सलामुल्लाह अलैहा का पाक रौज़ा और मुक़द्दस मज़ार है जहाँ दुनिया के लाखों लोग उनकी ज़यारत को आते हैं।



विलायत पोर्टलः आपने ईरान के सबसे मशहूर शहर क़ुम का नाम ज़रूर सुना होगा। जो एक मुकद्दस (पवित्र) शहर होने के साथ साथ इस्लामी दुनिया का दिल और सेन्टर माना जाता है। इस पाक शहर में इमाम मूसा काज़िम अलैहिस्स्लाम की बेटी और इमाम रेज़ा अलैहिस्सलाम की बहन हज़रते मासूमा सलामुल्लाह अलैहा का पाक रौज़ा और मुक़द्दस मज़ार है जहाँ दुनिया के लाखों लोग उनकी ज़यारत को आते हैं। आप पहली ज़ीक़ादा 173 हीजरी में मदीना में पैदा हुईं और 28 साल की उम्र में 12 रबीउस्सानी 201 हीजरी में आपने इस दुनिया से कूच किया। (मुसतदरके सफ़ीनतुल बेहार ज 8 पे257) जब अब्बासी बादशाह मामून ने इमाम रेज़ा (अ.) को मदीना से ख़ुरासान बुलाया तो उसके एक साल बाद आप अपने भाई और वक़्त के इमाम से मिलने अपने भाईयों के साथ ख़ुरासान के लिए निकल पड़ीं। कई दिन के सफ़र के बाद क़ुम से पहले सावा नामक जगह पहुँचीं जहाँ अहलेबैत (अ.) के दुश्मन रहते थे। जब उन्हें मालूम हुआ कि आप इमाम रज़ा (अ.) की बहन और इमाम मूसा काज़िम अलैहिस्सलाम की बेटी हैं तो उन्हों ने आपके क़ाफिले पर हमला किया आपके भाईयों ने जम कर मुक़ाबला किया लेकिन कई लोग शहीद हो गये।(ज़िंदगानी हज़रते मासूमा, मनसूरी, पे 14) इस घटना के बाद आप काफ़ी बीमार हो गईं तो आपने फ़रमायाः मुझे क़ुम ले चलो क्योंकि मैंने अपने बाबा से सुना है कि क़ुम हमारे चाहने वालों और शियों का सेंटर है। (तारीख़े क़दीम क़ुम,पे 213) जब क़ुम वालों को इस बात का पता चला कि आप क़ुम आना चाहती हैं तो वह बहुत ख़ुश हुए और आपका सवागत करने शहर के दरवाज़े पर पहुँच गए। मूसा इब्ने ख़ज़रज अशअरी ने आपके ऊँट की लगाम पकड़ी और आपको अपने घर में ठहराया। बीबी 17 दिन तक क़ुम में ख़ुदा की इबादत और राज़ व नयाज़ में व्यस्त रहीं और अठ्ठारहवें दिन आपने इंतेक़ाल फ़रमाया। ( तरीख़े क़दीम कुम, पे 213)आपकी फ़ज़ीलत (श्रेष्ठता)मासूमीन अलैहेमुस्सलाम के बाद जो हस्तियाँ अल्लाह की बारगाह में बड़ा मक़ाम रखती हैं। उनमें आपका नाम भी आता है। आपको जनाबे ज़ैनब सलामुल्लाहे अलैहा और जनाबे अब्बास जितना महान कहा जा सकता है। आपके बारे में इमामव जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम फ़रमाते हैं। ख़ुदा का हरम मक्का है, रसूले ख़ुदा (स.) का हरम मदीना है। हज़रत अली (अ.) का हरम कूफ़ा है। और हम अहलेबैत (अ.) का हरम क़ुम है।आपने यह भी फ़रमायाःजन्नत के 8 दरवाज़ों में से तीन दरवाज़े क़ुम की तरफ़ खुलते हैं।एक हदीस में फ़रमायाःमेरी नस्ल में से एक बीबी क़ुम में दफ़न होगी उनका नाम फ़ातिमा होगा और उसकी शिफ़ाअत से हमारे शिया जन्नत में दाख़िल होंगें। (बेहारुल अनवार, ज 60, पे 288)आपको मासूमा कहा जाता है, और दुनिया भर में इसी नाम से मशहूर हैं। यह लक़ब आपको इमामे रज़ा अलैहिस्सलाम ने दिया है। आप फ़रमाते हैं।जिसने क़ुम में मासूमा की ज़ियारत की उसने मेरी ज़ियारत की। (नासेख़ुत तारीख़, ज3, पे68)आपका इल्मआपके इल्मी मक़ाम का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि इमाम मूसा काज़िम (अ.) के ज़माने में उनके कुछ चाहने वाले मदीना आते हैं ताकि अपने इमाम की ख़िदमत में हाज़िर हो कर उनसे कुछ ज़रूरी सवाल पूछें। जब वह लोग वहाँ पहुँचे तो इमाम घर पर मौजूद नहीं थे बल्कि किसी ज़रूरी सफ़र पर गये हुए थे उन लोगों ने अपने सवाल लिख कर इमाम के घर पर दे दिये ताकि इमाम तक पहुँचा दें ताकि वह वापसी पर अपने जवाब ले कर जाएँ। जब वह लौट कर आए तो अभी तक इमाम काज़िम (अ.) सफ़र से वापस नहीं आए थे। बीबी मासूमा (स.) ने सारे सवालों के जवाब लिख कर उन्हें दे दिए और वह ख़ुशी ख़ुशी अपने घर की तरफ़ लौट आए। रास्ते में उनकी मुलाक़ात इमाम (अ.) से हुई तो उन्होंने अपने सवालों और बीबी मासूमा के जवाब के बारे में इमाम से कहा। इमाम ने उनसे वह जवाब माँगे। जब आपने वह जवाब देखे तो वह सबके सब सही थे। यह देख कर इमाम बहुत ख़ुशे हुए और आपने फ़रमाया उसका बाप उस पर क़ुर्बान हो जाए। यह दास्तान आपकी इल्मी फ़ज़ीलत को बयान करता है। तारीख़ में इस पहले यह जुमला सिर्फ़ जनाबे फ़तिमा (स.) के बारे में मिलता है क्योंकि रसूले ख़ुदा (स.) आपके लिए यह ज़ुमला अकसर फ़रमाया करते थे।आपकी ज़ियारतदुनिया भर से हर साल लाखों लोग आपकी ज़ियारत को आते हैं और अपनी मुरादें वापिस ले कर जाते हैं। आपकी ज़ियारत का बहुत ज़यादा बदला व सवाब बताया गया है। जैसे कि इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम आपके बारे में फ़रमाते हैं।जिसने मासूमा के हक़ को पहचान कर उनकी ज़ियारत की वो जन्नत में जाएगा। (बेहारुल अनवार ज48,पे307)इमाम रेज़ा अलैहिस्सलाम फ़रमाते हैंजिसने मासूमा की ज़ियारत की उसके लिए जन्नत है। (कामेलुज़्ज़ियारात ,पे324)एक और हदीस में फ़रमाते हैं।जिसने हज़रते मासूमा के हक़ को जानते हुए उनकी ज़ियारत की उसके लिए जन्नत है।इमाम मोहम्मद तक़ी अलैहिस्सलाम फ़रमाते हैं।जिसने क़ुम मे मेरी फ़ुफी की ज़ियारत की उसके लिए जन्नत है। (कामेलुज़्ज़ियारात ,पे33)इन हदीसों में एक प्वाइंट की तरफ़ ध्यान देना बहुत ज़रूरी है, वह यह कि आपकी ज़ियारत का सवाब जन्नत बताया गया है। लेकिन साथ एक शर्त रखी गयी है और वह उनके हक़ को जानना और पहचानना।ये शर्त सिर्फ़ आपकी ज़ियारत के लिए नहीं बल्की सारे मासूमीन (अ.) और अल्लाह के नेक बंदों की ज़ियारत के लिए शर्त है और उन हस्तियों का हक़ यह है कि उनकी इताअत (अनुसरण) की जाए। उनकी बात को माना जाए। उनके बताए हुए रास्ते पर चला जाए। अगर यह सब नहीं किया तो इसका मतलब है हम ने उनके हक़ को नहीं पहचाना। जब उनके हक़ को नहीं पहचाना तो उनकी ज़ियारत भी नहीं की।आपकी ज़ियारत जनाब-ए- फ़ातिमा ज़हरा सलामुल्लाहे अलैहा की ज़ियारत हैईरान में एक मुज्तहिद और आलिम गुज़रे हैं। जिनका नाम आयतुल्लाह मरअशी नजफ़ी है। जो इल्म, तक़वा, सदाचार और इबादत में काफ़ी मशहूर थे। और सभी उल्मा आपका बहुत ज़्यादा एहतेराम किया करते थे। वह क़ुम से नजफ़ आए और फ़िर वापस नहीं गए आप रोज़ाना सुबाह सवेरे बीबी मासूमा (अ.) के हरम में आते थे और ज़ियारत करते थे यानी कहा जा सकता है एक दिन आपसे इस लगाव के बारे में सवाल किया गया तो आपने फ़रमायाःमेरे वालिद की इच्छा थी कि जनाब-ए- फ़ातिमा ज़हरा सलामुल्लाहे अलैहा की समाधि का पता मिल जाए इसलिए आपने एक अमल शुरू किया और 40 दिन तक लगातार क़ुर्आन मजीद ख़त्म करने की नज़र की। जब 40 दिन पूरे हो गए तो एक दिन आप गहरी नींद सो गए। आपने ख़्वाब देखा कि इमाम मुहम्मद बाक़िर और इमाम जाफ़िर सादिक़ अलैहेमस्सलाम तशरीफ़ लाए हैं उन्होंने आपसे फ़रमायाःकरीमए अहलेबैत के पास चले जाओ। आप यह समझे कि इसे से मुराद जनाब फ़ातिमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा हैं। इसलिए कहाःमैंने यह अमल इसी लिए किया है ताकि आपकी क़ब्र का सही पता लगा सकूँ।तब इमाम ने फ़रमायाःहमारी मुराद फ़तिमा मासूमा हैं जो क़ुम में दफ़्न हैं। उनकी क़ब्र की ज़ियारत जनाब-ए- फ़ातिमा ज़हरा सलामुल्लाहे अलैहा के बराबर है।जनाब-ए- फ़ातिमा ज़हरा सलामुल्लाहे अलैहा की क़ब्र इसी वजह से नज़रों से ओझल रखी गयी है।सलाम हो आप पर ऐ ख़ुदा के वली की बेटी सलाम हो आप पर।



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