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Date of publication : 6/8/2014 21:24
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ईरान की सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस:

मानवाधिकार के मुद्दे पर पश्चिम का मानक दो पहलू है।

ईरान की सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस आयतुल्लाह सादिक़ आमुली लारीजानी ने कल तेहरान में इस्लामी मानवाधिकार और इंसानी मूल्यों के विषय पर आयोजित सेमिनार में ग़ज़्ज़ा में ज़ायोनी सरकार के अमानवीय अत्याचारों व अपराधों की ओर इशारा करते हुए कहा कि अमरीका जो मानवाधिकारों की रक्षा का दम भरता है, ग़ज़्ज़ा में ज़ायोनी शासन के अपराधों का समर्थन कर रहा है


विलायत पोर्टलः ईरान की सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस ने मानवाधिकार मुद्दे के बारे में पश्चिम के दोहरे मापदंड की कड़ी आलोचना की है।
फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार ईरान की सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस आयतुल्लाह सादिक़ आमुली लारीजानी ने कल तेहरान में इस्लामी मानवाधिकार और इंसानी मूल्यों के विषय पर आयोजित सेमिनार में ग़ज़्ज़ा में ज़ायोनी सरकार के अमानवीय अत्याचारों व अपराधों की ओर इशारा करते हुए कहा कि अमरीका जो मानवाधिकारों की रक्षा का दम भरता है, ग़ज़्ज़ा में ज़ायोनी शासन के अपराधों का समर्थन कर रहा है और अमरीका ने हाल ही में ज़ायोनी सरकार को 250 मिलियन डॉलर का पुरस्कार भी दिया है।
आयतुल्लाह सादिक़ आमुली लारीजानी ने ग़ज़्ज़ा में ज़ायोनी सरकार के बर्बर अत्याचारों का जिक्र करते हुए कहा कि अभी तक ग़ज़्ज़ा में 1800 से अधिक फिलिस्तीनी शहीद और 9400 से अधिक घायल हो चुके हैं।
ईरान की सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस ने कहा कि अमरीका और उसके पश्चिमी सहयोगी मानवाधिकार की रक्षा का दम तो भरते हैं लेकिन व्यावहारिक रूप से इस बारे में उनका रवैया दोहरे मापदंड पर आधारित होता है।


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