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Code : 56845
Date of publication : 12/7/2016 23:7
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जन्नतुल बक़ीअ को वीरान करना, अहलेबैत अ. पर एक और बड़ा ज़ुल्म।

आठ शव्वाल तेरह सौ चवालीस हिजरी क़मरी को आले सऊद के हुक्म और दरबारी व भेदभाव रखने वाले वहाबी मुफ़्तियों के कहने पर मदीना-ए-मुनव्वरा में स्थित जन्नतुल बक़ीअ में शहज़ादी-ए-कौनैन हज़रत फ़ातिमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा और चार मासूम इमामों के रौज़ों को गिरा दिया गया।



विलायत पोर्टलः आठ शव्वाल तेरह सौ चवालीस हिजरी क़मरी को आले सऊद के हुक्म और दरबारी व भेदभाव रखने वाले वहाबी मुफ़्तियों के कहने पर मदीना-ए-मुनव्वरा में स्थित जन्नतुल बक़ीअ में शहज़ादी-ए-कौनैन हज़रत फ़ातिमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा और चार मासूम इमामों के रौज़ों को गिरा दिया गया। आले सऊद के सऊदी अधिकारियों ने जब मक्के और मदीने पर पूरी तरह क़बज़ा कर लिया तो उन्होंने अहलेबैत अ. से अपनी दुश्मनी के चलते जन्नतुल बक़ीअ में स्थित रसूले इस्लाम स.अ हज़रत फ़ातिमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा और चार मासूम इमामों के रौज़ों को गिराने की नापाक योजना बनाई। इसके लिए उन्होंने काज़ी सुलैमान को मदीना रवाना किया ताकि वह वहाँ के मुफ़्तियों से अपनी मर्ज़ी के फ़तवे हासिल करे और जन्नतुल बक़ीअ को शहीद करने का रास्ता तैयार करे। दरबारी और अहलेबैत अ. से कीना और दुश्मनी रखने वाले मुफ़्तियों ने जन्नतुल बक़ीअ को गिराने का फ़तवा दे दिया और यूं ऑले सऊद ने रसूले इस्लाम की इकलौती बेटी हज़रत फ़ातिमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा और उनके चार मासूम बेटों के रौज़ो को गिरा दिया। इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद इस्लामी दुनिया में शोक और ग़म की लहर दौड़ गई और रौज़ों के पुनर्निर्माण के लिये अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन चलाया गया मगर वहाबियों ने जिन्हें साम्राज्यवादी ताक़तों का पूरा समर्थन हासिल है अभी तक इस्लामी दुनिया की इस मांग को नहीं माना है। जन्नतुल बक़ीअ के गिराये जाने के बाद सभी शिया सुन्नी उलमा ने मिलकर आंदोलन चलाया था और सऊदी सरकार से मांग की थी कि वह रौज़ों का पुनर्निर्माण कराये, पर यह हुकूमत जिस पर चरमपंथी वहाबी हावी हैं, अभी तक रौज़ों के निर्माण में टालमटोल से काम ले रही है। ईरान की सरकार ने भी कई बार सऊदी सरकार से मांग की कि वह जन्नतुल बक़ीअ के रौज़ों का पुनर्निर्माण कराए और इस संबंध में तेहरान भी हर तरह का सहयोग करने को तैयार है। आठ शव्वाल को हर साल अहलेबैत अ. के चाहने वाले पूरी दुनिया में मजलिसें और विरोध सभाएं आयोजित करके जन्नतुल बक़ीअ के गिराये जाने की निंदा करते हुए उक्त जगह पर रौज़े के पुनर्निर्माण की मांग करते हैं। आठ शव्वाल की तारीख़ हर साल अहलेबैते रसूल स.अ से आले सऊद और वहाबी मुफ़्तियों की दुश्मनी की याद पूरी दुनिया के सामने ताज़ा कर देती है। जन्नतुल बक़ीअ में इमाम हसने मुज्तबा, इमाम ज़ैनुल आबेदीन, इमाम मुहम्मद बाक़िर और इमाम जाफर सादिक अ.ह की पाक क़ब्रें हैं। और एक रिवायत के अनुसार उसी जगह पर शहज़ादी कौनैन हज़रत फ़ातिमा ज़हरा सलामुलल्ह अलैहा की भी क़ब्र है।


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