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Date of publication : 27/6/2016 16:49
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हज़रत आयतुल्लाह ख़ामेनई की ज़बानी

फ़िलिस्तीनी मुद्दे की अहमियत।

आज कुछ लोग यह कहते हैं कि फ़िलिस्तीन के मुद्दे पर आप क्यों बहस करते हैं, यह मुद्दा खत्म हो गया है! मेरा कहना है कि फ़िलिस्तीनी मुद्दा किसी सूरत में ख़त्म नहीं हुआ है। ऐसा नहीं है कि आप कल्पना करें कि “फ़िलिस्तीन के असली मालिक” फ़िलिस्तीनी हमेशा अपने बच्चों के साथ अपनी ज़मीन से बाहर रहेंगे या जो फिलिस्तीनी अधिकृत ज़मीनों में ज़िंदगी बिता रहे हैं, वह हमेशा दबे हुए अल्पसंख्यक के रूप में ज़िंदगी बिताएंगे और विदेशी अतिग्रहणकारी वहाँ हमेशा रहेंगे, नहीं, ऐसा नहीं है।


आज कुछ लोग यह कहते हैं कि फ़िलिस्तीन के मुद्दे पर आप क्यों बहस करते हैं, यह मुद्दा खत्म हो गया है! मेरा कहना है कि फ़िलिस्तीनी मुद्दा किसी सूरत में ख़त्म नहीं हुआ है। ऐसा नहीं है कि आप कल्पना करें कि “फ़िलिस्तीन के असली मालिक” फ़िलिस्तीनी हमेशा अपने बच्चों के साथ अपनी ज़मीन से बाहर रहेंगे या जो फिलिस्तीनी अधिकृत ज़मीनों में ज़िंदगी बिता रहे हैं, वह हमेशा दबे हुए अल्पसंख्यक के रूप में ज़िंदगी बिताएंगे और विदेशी अतिग्रहणकारी वहाँ हमेशा रहेंगे, नहीं, ऐसा नहीं है। वह देश जो सौ साल तक दूसरे देशों के क़ब्ज़े में रहे हैं उन्हें भी आख़िरकार दोबारा आज़ादी मिल गई “यही कज़ाकिस्तान, जॉर्जिया और केंद्रीय एशियाई देश” जो आपकी निगाहों के सामने हैं।
इनमें कुछ सोवियत यूनियन और कुछ सोवियत यूनियन से पहले रूस के क़ब्जे में थे जब सोवियत यूनियन का वजूद ही नहीं था लेकिन उन्हें आज़ादी मिल गई। इसलिए कोई वजह नहीं है कि फ़िलिस्तीन फिलिस्तीनियों को न मिले, यह काम ज़रूर होगा और इंशा अल्लाह ज़रूर होकर रहेगा फ़िलिस्तीन फ़िलिस्तीनी जनता को मिलके रहेगा इसलिए मुद्दा ख़त्म नहीं हुआ बल्कि इस प्रकार की सोच और यह कल्पना ग़लत है।
आज जायोनियों और उनके समर्थकों “अमेरिका उनका सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण समर्थक है” की मक्कारी यह है कि वह सुलह के खूबसूरत और हसीन नाम से फ़ायदा उठाते हैं: सुलह कीजिए, यह कैसी बातें हैं? हाँ, सुलह एक अच्छी बात है, लेकिन सुलह कहां और किससे?! कोई इंसान आपके घर में घुस जाए, बलपूर्वक आपका दरवाज़ा तोड़ दे और आपको मारे पीटे, आपके बाल बच्चों का अपमान करे और आपके घर के तीन कमरों में से ढाई कमरों पर वह अपना क़ब्जा करके बैठ जाए और फिर यह कहे कि क्यों इधर उधर इसकी शिकायत करते हो और लगातार लड़ाई झगड़ा करते हो, आओ हम सुलह कर लें, क्या यह सुलह होगी?
यह सुलह है कि आपको आपके घर से बाहर निकाल दिया जाए और अगर आप घर पर क़ब्जा करने वाले के विरुद्ध आवाज़ उठायें, तो उस समय दुश्मन के समर्थक आएं और सुलह कराएं जबकि अतिग्रहणकारी दुश्मन अपने घर पर बैठा हुआ है, उसने आपके के विरुद्ध हर तरह का अत्याचार किया है, अब भी अगर उसका हाथ पहुंचे तो कोई कमी नहीं छोड़ेगा। आज भी इस्राईली हुकूमत लगभग प्रतिदिन दक्षिण लेबनान पर हमला करती रहती है, मुजाहिदों पर हमला नहीं, बल्कि दक्षिण लेबनान के गांवों पर, दक्षिण लेबनान के स्कूलों पर, अभी कुछ दिन पहले ही इस्राईल ने दक्षिण लेबनान के एक स्कूल पर हमला कर कुछ बच्चों को क़त्ल कर दिया था! बच्चों ने तो कोई हमला नहीं किया था, बच्चों ने तो हाथों में हथियार नहीं उठा रखे थे, इस्राईल की वुजूद में ही आक्रामकता व हिंसा निहित है, जब जायोनियों ने लेबनान पर हमला किया, तो दैरे यासीन और बाकी जगहों के लोगों ने तो उनके साथ कोई बुराई नहीं की थी, लेकिन जायोनियों ने उनका भी नरसंहार किया, हालांकि अरबों के कुछ जवान उनके साथ इस बात पर लड़ रहे थे और यही कहते थे कि क्यों तुम हमारे घर में दाख़िल हुये हो और लोगों को मार रहे हो, वह लोग जो जायोनियों के ज़ुल्म का निशाना बनते थे ग्रामीण थे जिन्हें इस्राईल नरसंहार करके उनके घरों से निकाल रहा था देहातियों ने तो कोई काम नहीं किया था, इसलिए मालूम हुआ कि इस्राईली हुकूमत के वुजूद में ही हमला, आक्रमकता और हिंसा निहित है।
इस्राईली हुकूमत की बुनियाद और नींव हिंसा, क्रूरता और बलपूर्वक डाली गई है और इसी आधार पर वह आगे बढ़ रही है और इसके बिना उसकी प्रगति संभव नहीं थी और आगे भी संभव नहीं होगी। कहते हैं कि इस हुकूमत के साथ सुलह करें?! कैसी सुलह? अगर वह अपने अधिकार पर संतोष करे “यानी वह घर जो फ़िलिस्तीन के नाम से है वह फ़िलिस्तीनी जनता के हवाले कर दें और अपने काम में व्यस्त हो जायें या फिलिस्तीनी हुकूमत से अनुमति लें और कहें कि हम में से कुछ को या सभी को यहां रहने की अनुमति दे दें”।
तो किसी को उनके साथ जंग करने की ज़रूरत नहीं होगी, जंग यह है कि उन्होंने बलपूर्वक दूसरों के घर पर क़ब्जा किया हुआ है, उन्होंने घर वालों को घर से बाहर निकाल दिया है और अब भी उन पर अत्याचार और हिंसा को जारी रखे हुए हैं, क्षेत्रीय देशों पर अत्याचार करते हैं और सभी के लिए खतरा बने हुए हैं, इसलिए वह सुलह को भी बाद वाले हमले की भूमिका बनाना चाहते हैं! ऐसी सुलह की जाए कि यह सुलह उनके अगले हमले के लिए मैदान तैयार किया जा सके।


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