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Date of publication : 23/7/2014 6:5
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वहाबी मुफ़्ती यूसुफ़ क़रज़ावी ने सऊदी अरब की आलोचना की।

वहाबी मुफ़्ती शेख़ यूसुफ़ क़रज़ावी ने सऊदी अरब पर आरोप लगाया है कि रियाज़, दुश्मनों को दोस्त और अरब देशों का अपना दुश्मन समझता है। उन्होंने अलजज़ीरा टीवी चैनल से इंटरव्यू में कहा कि सऊदी अरब आश्चर्यजनक स्टैण्ड अपनाए हुए है जिसके अंतर्गत वह दुश्मनों को दोस्त समझता है और अरब देशों से दुश्मनी रखता है और उनके विरुद्ध खड़ा रहता है। उनका कहना था कि सऊदी अरब इस्राईल को अपना दोस्त और हमास को अपना दुश्मन समझता है।



वहाबी मुफ़्ती शेख़ यूसुफ़ क़रज़ावी ने सऊदी अरब पर आरोप लगाया है कि रियाज़, दुश्मनों को दोस्त और अरब देशों का अपना दुश्मन समझता है।
उन्होंने अलजज़ीरा टीवी चैनल से इंटरव्यू में कहा कि सऊदी अरब आश्चर्यजनक स्टैण्ड अपनाए हुए है जिसके अंतर्गत वह दुश्मनों को दोस्त समझता है और अरब देशों से दुश्मनी रखता है और उनके विरुद्ध खड़ा रहता है। उनका कहना था कि सऊदी अरब इस्राईल को अपना दोस्त और हमास को अपना दुश्मन समझता है।
उन्होंने अरब देशों को सम्बोधित करते हुए कहा कि मैं उनसे यह कहना चाहता हूं कि इस्लामी समुदाय के बारे में वह अल्लाह के निकट ज़िम्मेदार हैं। उन्होंने अरब देशों के शासकों के क्रियाकलापों की निंदा करते हुए कहा कि उन्हें एक एक पैसे का हिसाब देना होगा।
उन्होंने कहा कि अरब नेताओं ने हज़ारों मिस्रियों की हत्या के लिए अरबों डालर ख़र्च किए। एक सवाल के जवाब में कि मिस्र को संकट में किसने झोंका? उन्होंने कहा कि मिस्र में साठ साल के बाद लोकतंत्र की स्थापना हुई थी और अल्लाह ने यहां के लोगों पर कृपा करते हुए अच्छे शासक प्रदान किया लेकिन सीसी ने आते ही वह समस्त चीज़ें समाप्त कर दीं।
उन्होंने रफ़ह पास बंद करने के मिस्री सरकार के फ़ैसले की निंदा करते हुए कहा कि रफ़ह पास को खुलवाना समस्त मिस्रियों की ज़िम्मेदारी है। उन्होंने मिस्र की वर्तमान सरकार पर वार करते हुए कहा कि मौजूदा समय में मिस्र, हमास का दुश्मन है और हमास तथा फ़िलिस्तीनी प्रतिरोधकर्ताओं को यह अधिकार पहुंचता है कि वह संघर्ष विराम के मिस्र के फ़ैसले को रद्द कर दें।
ग़ौरतलब है कि शेख़ यूसुफ़ क़रज़ावी, सीरिया सरकार के विरोधियों में हैं। सीरिया संकट के आरंभ से ही उन्होंने सीरिया में सक्रिय सशस्त्र आतंकियों का समर्थन किया है और सीरिया जाकर सरकार के विरुद्ध लड़ने के लिए लोगों से अपील करते थे। उन्हें क़तर का पिठ्ठू मुल्ला तथा नॉटो मौलवी कहा जाता है।


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