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Date of publication : 11/7/2014 23:57
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रसूलुल्लाह स.अ का अख़लाक़

रसूलुल्लाह (सअ.) के बेमिसाल व अभूतपूर्व गुणों मे एक रहेमदिली व उनका दयालू होना भी है। आप बद्दू अरबों यहां तक की ईर्ष्या व दुश्मनी रखने वाले लोगों की सख़्त बातों, बेअदबी व असभ्यता और जिहालत पर नरमी से व्यवहार करते थे। आप के इस गुण ने बहुत ज़्यादा लोगों को इस्लाम की ओर झुकने पर मजबूर करने के साथ-साथ आप का दीवाना भी बना दिय़ा था।

रसूलुल्लाह स.अ. रहेमदिल इंसान


रसूलुल्लाह (सअ.) के बेमिसाल व अभूतपूर्व गुणों मे एक रहेमदिली व उनका दयालू होना भी है। आप बद्दू अरबों यहां तक की ईर्ष्या व दुश्मनी रखने वाले लोगों की सख़्त बातों, बेअदबी व असभ्यता और जिहालत पर नरमी से व्यवहार करते थे। आप के इस गुण ने बहुत ज़्यादा लोगों को इस्लाम की ओर झुकने पर मजबूर करने के साथ-साथ आप का दीवाना भी बना दिय़ा था।
हज़रत अली (अ) की हदीस है,
بلين الجانب تانس القلوب"
नरमी और रहेमदिली से ही लोग आकर्षित होते हैं। रसूले अकरम (स.अ) फ़रमाते है, कि,
 وعليکم بالاناءۃ واللين والتسرع من سلاح الشيطان وما من شئي احب الي اللہ من الاناءۃ واللين-
तुम्हें नरमी व दया को अपनाना चाहिए और ख़ुदा की बारगाह मे नरमी और दया से पसंदीदा कोई चीज़ नही है।
हज़रत इमाम जाफ़र सादिक़ (अ) से एक हदीस बयान हुई है कि,
ان العلم خليل المومن ، والحلم وزيرہ
बेशक (निःसन्देह) इल्म मोमिन का सच्चा दोस्त है और सब्र व संयम उसका मददगार है, सब्र उसकी सेना का सेनापति है, दोस्ती उसका भाई है, नरमी उसका बाप है।
 रसूले अकरम (स) की रहेमदिली, दिल को लुभा देने वाला बात का अंदाज़ और सब्र व संयम अल्लाह की ख़ास कृपा है, इसी ख़ास गुण के कारण लोग आप की ओर खिंचे चले आते थे। सूरा-ए-मुबारक आले इमरान मे आपके इन्हीं गुणों की ओर इशारा करते हुए अल्लाह फ़रमाता है,
"فبمارحمۃ من اللہ لنت لھم ولوکنت فظا غليظا القلب لانفضوامن حولک فا‏عف عنھم واستغفرلھم-
पैग़म्बर अल्लाह की रहमत व कृपा है कि तुम इन लोगों के लिए दयालु हो, वरना अगर तुम ख़राब स्वभाव के और सख़्त दिल के होते तो ये तुम्हारे पास से भाग खड़े होते इस लिए इन्हे माफ़ कर दो और उनके लिए अल्लाह से माफ़ी मांगो। रसूले इस्लाम (स.अ) के नर्म स्वभाव के बारे मे दो घटनांए नीचे बयान की जा रही हैं,
मुहद्दिस क़ुम्मी ने सफ़ीनतुलबिहार मे अनस बिन मालिक से रिवायत की है कि अनस बिन मालिक कहते हैं कि मै रसूलुल्लाह (स.अ) के पास था, आप एक चादर ओढ़े हुए थे जिसके किनारे मोटे थे, एक अरब आता है और आप की चादर पकड़कर ज़ोर से खींचता है, जिससे आप की गर्दन पर खरोंच पड़ जाते हैं, और आप से कहता है कि ऐ मुहम्मद (स.अ.) मेरे इन दोनो ऊंटों पर ख़ुदा के इस माल में से जो तुम्हारे पास है लाद दो क्योंकि वह न तो तुम्हारा माल है और न तुम्हारे बाप का। रसूलुल्लाह (स) उस अरब की यह बात सुनकर कहते हैं,
المال مال اللہ وانا عبدہ-
सारा माल अल्लाह का है और मै अल्लाह का बन्दा हूं। इसके बाद कहते हैं कि ऐ भाई तूने जो मेरे साथ किया है क्या तुम उसकी भरपाई करना चाहोगे? उसने कहा नहीं क्योंकि तुम उनमें से नही हो जो बुराई का बदला बुराई से देते हैं। आप यह सुनकर हंस पड़े और हुक्म दिया कि इस अरब के एक ऊंट पर जौ और एक ऊंट पर ख़ुरमा लाद दिया जाए। इसके बाद आप ने उसको विदा किया।
शेख़ सदूक़ ने अपनी किताब अमाली मे सातवें इमाम (अ) के माध्यम से अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली (अ) से हदीस बयान की है कि रसूले ख़ुदा (स.अ) पर एक यहूदी की कुछ अशरफ़ियां उधार थीं, यहूदी ने रसूले इस्लाम (स.अ) से उनकी मांग की, आपने कहा मेरे पास तुम्हें देने के लिए इस समय कुछ भी नही है, यहूदी ने कहा मै अपना पैसा लिए बिना आप को जाने नही दूंगा, रसूलुल्लाह (स.अ) ने कहा अगर ऐसा है तो मै तेरे पास ही बैठा रहूंगा, आप उस यहूदी के पास बैठ गए और उस दिन की नमाज़ें वहीं अदा की। जब आप के सहाबा को इस घटना के बारे मे पता चला तो यहूदी के पास आए और उसे डराने धमकाने लगे, आपने सहाबा को रोका तब सहाबा ने कहा इस यहूदी ने आप को क़ैदी बना लिया है, उनके जवाब मे आपने कहाः
لم پبعثني ربي بان اظلم معاھدا ولاغيرہ-
अल्लाह ने मुझे नबी बनाकर नही भेजा इस लिए कि मै काफ़िर या किसी और पर अत्याचार करूं। दूसरे दिन वह यहूदी इस्लाम ले आया और उसने कलमा पढ़ लिया और कहा कि मैने अपना आधा माल अल्लाह के रास्ते मे दे दिया और कहा कि अल्लाह की क़सम मैने यह काम नही किया मगर ये कि मैने तौरेत मे आपकी पहचान और प्रशंसा पढ़ी है। तौरेत मे आप के बारे मे इस तरह मिलता है कि,
محمد بن عبداللہ مولدہ بمکہ و مہجرہ بطيبہ وليس بفظ ولاغليظ و بسخاب و لا متزين بفحش ولاقول الخناء وانا اشھدان لا الہ الا ا للہ وانک رسول اللہ وھذا مالي فاحکم فيہ بما ا نزل اللہ-
मुहम्मद (स.अ) वल्द अबदुल्लाह जिसकी जन्मभूमि मक्का है और जो हिजरत करके मदीना आएंगे न कठोर दिल हैं न गरम मिज़ाज और न क्रोधी, वह किसी से चिल्लाकर बात नही करते और न उनकी ज़बान अश्लील एवं बेहूदा बातों से दूषित है। मै गवाही देता हूं कि, अल्लाह के अलावा कोई ख़ुदा नही है और आप उसके रसूल हैं और ये मेरा माल है जो मैने आप के अधिकार मे दे दिया अब आप इसके बारे मे अल्लाह के हुक्स अनुसार फ़ैसला करें।
क़ुरआने पाक के सूरा-ए-तौबा मे रसूलुल्लाह (स.अ) की प्रशंसा मे कहा गया है,
لقد جاء کم رسول من انفسکم عزيزعليہ ماعنتم حريص عليکم بالمومنين رۆف رحيم- فان تولوا فقل حسبي اللہ لا الہ الا اللہ ہو عليہ توکلت و ہورب العرش العظيم
निश्चित रूप से तुम्हारे पास वह पैग़म्बर आया है जो तुम्ही मे से है और उसको तुम्हारी हर मुसीबत पर तकलीफ़ होती है, वह तुम्हारी हिदायत (सही रास्ता दिखाना) के लिए आतुर है और मोमिनीन के हाल पर दयालु और मेहरबान है, अब इसके बाद भी यह लोग मुह फेर लें तो कह दीजिए कि, मेरे लिए अल्लाह काफ़ी है इसके सिवा कोई ख़ुदा नही है मेरा विश्वास उसी पर है और वही ज़मीन से आसमान तक सारी दुनिया का मालिक व पालने वाला है।


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