Delicious facebook RSS दोस्तों को भेजें। प्रिंट सेव करें। XML TEXT PDF
Code : 196789
Date of publication : 3/12/2018 7:17
Hit : 175

क़ुर्आन की निगाह में मिसाली औरतें

अगर हम इस्लाम से पहले और इस्लाम आने के बाद के अरब के इतिहास पर ध्यान दें तो हमें दोनों के बीच का फ़र्क़ साफ़ नज़र आएगा कि इस्लाम के आने से पहले औरत को किस निगाह से देखा जाता था जबकि इस्लाम आने के बाद औरत को क्या मक़ाम और दर्जा दिया गया


विलायत पोर्टल : औरतें इंसानी समाज का एक ज़रूरी और सम्मानजनक हिस्सा हैं, इंसान की पैदाइश से लेकर अब तक यह हिस्सा बहुत सारे उतार चढ़ाव से गुज़रा है, आसमानी दीनों विशेष कर इस्लामी समाज में औरत के लिए एक ख़ास हैसियत और विशेष दर्जा हासिल है, अगर हम इस्लाम से पहले और इस्लाम आने के बाद के अरब के इतिहास पर ध्यान दें तो हमें दोनों के बीच का फ़र्क़ साफ़ नज़र आएगा कि इस्लाम के आने से पहले औरत को किस निगाह से देखा जाता था जबकि इस्लाम आने के बाद औरत को क्या मक़ाम और दर्जा दिया गया, अगर हम क़ुर्आन के तर्जुमे और तफ़सीर पर ध्यान देंगे तो हमें बहुत सारी ऐसी आयतें मिलेंगी जो इस्लाम में औरत के मक़ाम और उसकी अज़मत और फ़ज़ीलत पर रौशनी डालती दिखाई देती हैं।
अल्लाह ने तख़लीक़ (पैदाइश) के मरहले में औरत को मर्द के साथ एक ही दर्जा दिया है, जैसाकि उसका इरशाद है कि, ऐ लोगों अपने रब से डरो जिसने तुम्हारी पैदाइश एक नफ़्स और एक जान से की फिर उसी से उसका जोड़ा पैदा किया फिर उन दोनों से बहुत सारे मर्द और औरतों को पैदा किया। (सूरए निसा, आयत 1) हालांकि अल्लाह के यहां नेक अमल का सवाब और अज्र मर्द और औरत दोनों के लिए बराबर क़रार दिया गया है, कि जो कोई भी नेक अमल अंजाम देगा उसे उसके अमल का पूरा सवाब और अज्र मिलेगा उसको पाकीज़ा ज़िंदगी और जन्नत में दाख़िल होने की ख़ुशख़बरी मिलेगी, जैसाकि इरशाद होता है कि, जो भी नेक अमल अंजाम दे चाहे मर्द हो या औरत, हालांकि वह मोमिन हो तो हम उसे ज़रूर पाकीज़ा ज़िंदगी के साथ ज़िंदा रखेंगे और यक़ीनन उन्हें उनके आमाल का अज्र जो वह (दुनिया में) अंजाम देते हैं उससे कहीं ज़्यादा अच्छा अता करेंगे। (सूरए नहल, आयत 97)
एक तरफ़ जहां क़ुर्आन के लिए हज़रत मरयम बिन्ते इमरान और हज़रत आसिया बिन्ते मुज़ाहिम की शक्ल में बेहतरीन मिसाल पेश करता है वहीं दूसरी तरफ़ उनके लिए एक बुलंद मर्तबा औरत में पाई जाने वाली सिफ़ात को सूरए तहरीम की पांचवीं आयत में बयान किया है, जैसाकि इरशाद होता है कि, अगर पैग़म्बर स.अ. तुम्हें तलाक़ दे दें तो बहुत जल्द आपका परवरदिगार आपको तुम्हारे बदले तुमसे अच्छी बीवियां दे देगा जो (सच्ची) मुसलमान, बा ईमान, इताअत करने वाली, तौबा करने वाली, इबादत करने वाली, रोज़ेदार, शादीशुदा और कुंवारी होंगी। इस आयत में अल्लाह पैग़म्बर स.अ. की बीवियों से फ़रमा रहा है कि अगर पैग़म्बर स.अ. तुम्हें तलाक़ दे दें तो अल्लाह तुम्हारे बदले उन्हें और बेहतर बीवियां अता करेगा, इस आयत में एक मिसाली औरत की कुछ सिफ़ात बयान की गई हैं जिसको हम यहां बयान कर रहे हैं।
इस्लाम
सबसे पहले जिस सिफ़त का एक औरत में होना ज़रूरी है वह इस्लाम है, इस्लाम तसलीम से है जिसका मतलब ऐसी औरत जो अपने अल्लाह के सामने पूरी तरह से उसके हर हुक्म पर सर झुकाए हुए हो, केवल ज़ुबान से मुसलमान न हुई हो बल्कि अपने बदन के हर हिस्से से भी इस्लाम के अहकाम, अरकान और फ़ुरूए दीन पर अमल करती हो।
ईमान
दूसरी विशेषता और सिफ़त ईमान है, और अल्लाह के नज़दीक मोमिन होना बहुत बड़ी फ़ज़ीलत होती है, क्योंकि उसका इरशाद है कि, एक मोमिना कनीज़ मुशरिका (आज़ाद औरत) से बहुत बेहतर है चाहे वह मुशरिका औरत (हुस्न में) तुम्हें कितनी ही अच्छी क्यों न लगती हो।
इसकी वजह यह है कि सच्चा ईमान सारी ख़ूबियों और अच्छाईयों का स्रोत होता है और क़यामत के दिन अल्लाह इंसानों को उनके ईमान और आमाल के मुताबिक़ सवाब और अज्र देगा, अगर एक औरत मोमिना है तो अल्लाह के नज़दीक वह उस औरत से बेहतर है जिसके पास ईमान नहीं है चाहे उस बे ईमान औरत के पास ख़ूबसरती और हुस्न के साथ साथ माल और दौलत का अंबार ही क्यों न हो।
इताअत
ऊपर ज़िक्र की गई आयत में एक औरत के अंदर पाई जाने वाली अच्छाईयों में से एक उसका इताअत करने वाली होना है, और अगर औरत में यह सिफ़त और ख़ूबी न पाई जाए तो उसकी ज़िंदगी फ़ितरी और नेचुरल ज़िंदगी से हट जाएगी, क्योंकि अल्लाह ने क़ुर्आन में इरशाद फ़रमाया है कि, मर्द औरतों के मुहाफ़िज़ और उनकी देखभाल के ज़िम्मेदार हैं उस चीज़ के लिए कि अल्लाह ने उनमें से कुछ को कुछ दूसरों पर फ़ज़ीलत दी है और उसकी वजह यह है कि वह अपने माल में से (परिवार वालों और बीवी) ख़र्च करते हैं, इस आयत में अल्लाह मर्दों की औरतों पर हुकूमत को नहीं बयान कर रहा है बल्कि उसकी फ़ज़ीलत की वजह यह है कि औरतें ज़िंदगी के कुछ कामों को मर्दों से बेहतर अंजाम नहीं दे सकती जिसके लिए उन्हें मर्दों का सहारा और उनकी मदद लेनी पड़ती है, और औरत अपने शौहर से सहारा और मदद उसी समय मांग सकती है जब उसके अंदर इताअत पाई जाए।
तौबा
तौबा यानी ग़लती का एहसास और उसे सुधारना, अगर इंसान की ज़िंदगी में केवल विरोध पाया जाए और वह हर क़दम पर अपनी ग़लतियों से ठोकर खा कर गिरे लेकिन अपने अंदर सुधार न लाए तो ऐसे में धीरे धीरे उसकी ज़िंदगी के वह स्तंभ जो उसे सहारा दिए हुए होते हैं वह कमज़ोर होना शुरू हो जाते हैं, ध्यान रहे ऐसी जगह पर इस बात में कोई फ़र्क़ नहीं कि वह गुनाह, अल्लाह के हुक़ूक़ को अनदेखा करते हुए अंजाम दिए गए हों या बंदों के हुक़ूक़ को रौंदा गया हो, दोनों हालत में अगर ग़लती के बाद शर्मिंदगी का एहसास करते हुए उसमें सुधार लाया जाए तो वही इंसान अल्लाह के नज़दीक फ़ज़ीलत का मालिक होगा और इंसानों की निगाह में भी उसकी अहमियत बनी रहेगी।
इबादत और बंदगी
ख़ुदा की इबादत करना इंसान की रूह और फ़िक्र पर सकारात्मक असर डालने के साथ दिली सुकून और मानवियत का कारण बनता है, इसी वजह से अल्लाह ने मिसाली औरतों की विशेषताओं और सिफ़ात में से एक सिफ़त इबादत और बंदगी को क़रार दिया है और अगर अल्लाह की इबादत बंदा बन कर की जाए तो यक़ीनन वह इबादत इंसान को बुराईयों से रोकने वाली होती है और जिसके नतीजे में शैतान इंसान को कभी हरा नहीं सकता, और हक़ीक़ी बंदा कहते ही उसे हैं जो सर से पांव तक अपने आक़ा और मौला की इताअत करता हो।
नतीजा यह हुआ कि क़ुर्आन की निगाह में मिसाली औरतें वह हैं जो इन सिफ़ात की मालिक हों और जिन औरतों में यह सिफ़ात नहीं पाए जाते उन्हें चाहिए कि वह इन सिफ़ात को अपने अंदर पैदा करें ताकि अल्लाह की अच्छी कनीज़ बनने के साथ साथ समाज में भी एक अच्छी मां, एक अच्छी बहन, एक अच्छी बीवी का किरदार अदा कर सकें।
...............................


आपका कमेंट



मेरा कमेंट शो न किया जाये
Security Code :

नवीनतम लेख

अफ़ग़ानिस्तान में शांति स्थापना के लिए ईरान का किरदार बहुत महत्वपूर्ण । वालेदैन के हक़ में दुआ हिज़्बुल्लाह के खिलाफ युद्ध की आग भड़काने पर तुला इस्राईल, मोसाद और ज़ायोनी सेना आमने सामने इराक की दो टूक, किसी भी देश के ख़िलाफ़ देश की धरती का प्रयोग नहीं होने देंगे फ़्रांस के दो लाख यहूदी नागरिकों को स्वीकार करेगा अवैध राष्ट्र इस्राईल इस्राईल का चप्पा चप्पा हमारी की मिसाइलों के निशाने पर : हिज़्बुल्लाह जौलान हाइट्स से लेकर अल जलील तक इस्राईल का काल बन गई है नौजबा मूवमेंट । हम न होते तो फ़ारसी बोलते आले सऊद, अमेरिका के बिना सऊदी अरब कुछ नहीं : लिंडसे ग्राहम आले सऊद की बेशर्मी, लापता हाजी सऊदी जेलों में मौजूद ट्रम्प पर मंडला रहा है महाभियोग और जेल जाने का ख़तरा । जॉर्डन के बाद संयुक्त अरब अमीरात ने दमिश्क़ से राजनयिक संबंध बहाल करने की इच्छा जताई क़ुर्आन की तिलावत की फ़ज़ीलत और उसका सवाब ट्रम्प को फ्रांस की नसीहत, हमारे आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करे अमेरिका । तुर्की अरब जगत के लिए सबसे बड़ा ख़तरा : अब्दुल ख़ालिक़ अब्दुल्लाह आतंकवाद से संघर्ष का दावा करने वाला अमेरिका शरणार्थियों पर हमले बंद करे : मलाला युसुफ़ज़ई