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Date of publication : 29/8/2018 17:47
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ग़दीरे ख़ुम की दास्तान

कहा जाता है कि 90 हज़ार या एक लाख चौदह हज़ार या एक लाख 20 हज़ार या एक लाख 24 हज़ार या इससे भी ज़्यादा तादाद में मुसलमान पैग़म्बर स.अ. के साथ रवाना हुए, लेकिन आपके साथ हज करने वालों की तादाद इससे कहीं ज़्यादा थी, क्योंकि मक्का मुसलमान और जो लोग यमन से इमाम अली अ.स. और अबू मूसा के साथ आए थे वह भी अल्लाह के नबी के क़ाफ़िले में शामिल हो गएl

विलायत पोर्टल : पैग़म्बर स.अ. ने सन् 10 हिजरी में लोगों के बीच यह एलान कराया कि हज के लिए मक्का चलने की तैयारी करें, पैग़म्बर स.अ. के हुक्म के बाद आसपास के इलाक़ों से भी मुसलमानों की एक बहुत बड़ी तादाद हज को अदा करने के लिए मदीने में आ कर जमा हो गईl
पैग़म्बर स.अ. ने हिजरत से लेकर अपनी वफ़ात तक इस हज के अलावा कोई और हज अंजाम नहीं दिया थाl
पैग़म्बर स.अ. ने सनीचर के दिन ज़ीक़ादा की 24 या 25 तारीख़ को गु़स्ल कर के और एहराम के दो कपड़ों के टुकड़ों को पहन कर  पैदल मदीने से बाहर तशरीफ़ ले आए और औरतों को महमिल में सवार कर के अपने ख़ानदान के सभी लोगों, मोहाजिरीन, अंसार, अरब के क़बीले वालों और आसपास के इलाक़ों की एक बड़ी तादाद के साथ सफ़र के लिए निकल पड़ेl
इत्तेफ़ाक़ की बात यह है कि उन दिनों चेचक और टाइफ़ाइड की सख़्त बीमारी फैली हुई थी इसलिए बहुत से लोग पैग़म्बर स.अ. के साथ हज करने नहीं जा सके, इन सबके बावजूद एक बहुत बड़ी तादाद अल्लाह के आख़िरी नबी के साथ हज के लिए निकली जिसकी सही तादाद अल्लाह के अलावा कोई नहीं जानताl
कहा जाता है कि 90 हज़ार या एक लाख चौदह हज़ार या एक लाख 20 हज़ार या एक लाख 24 हज़ार या इससे भी ज़्यादा तादाद में मुसलमान पैग़म्बर स.अ. के साथ रवाना हुए, लेकिन आपके साथ हज करने वालों की तादाद इससे कहीं ज़्यादा थी, क्योंकि मक्का मुसलमान और जो लोग यमन से इमाम अली अ.स. और अबू मूसा के साथ आए थे वह भी अल्लाह के नबी के क़ाफ़िले में शामिल हो गएl
कुछ दिन के पैदल सफ़र के बाद आप सभी मुसलमानों और हाजियों के साथ मक्का पहुंचे, मुसलमानों ने अपने आख़िरी नबी के साथ हज को अंजाम दिया और फिर मदीने की तरफ़ वापसी के लिए निकल पड़े, मदीने लौटते हुए जब पैग़म्बर स.अ. सारे हाजियों के साथ 18 ज़िल्हिज को जोहफ़ा के इलाक़े ग़दीरे ख़ुम नाम की जगह पहुंचे, यह वह जगह थी जहां से मदीना, मिस्र और इराक़ के रास्ते अलग अलग होते थे, यहीं पर जिब्रईल अल्लाह की तरफ़ से पैग़म्बर स.अ. पर नाज़िल हुए और अल्लाह के पैग़ाम को आयत की शक्ल में उन तक पहुंचा दिया जिसमें अल्लाह ने अपने नबी को हुक्म दिया है ऐ रसूल जिसके बारे में आपको बताया जा चुका है उसे लोगों तक पहुंचा दीजिए, जिसे हम आयते बल्लिग़ कहते हैंl
यानी अल्लाह ने आपको हुक्म दिया है कि इमाम अली अ.स. को इमाम और वली के रूप में पहचनवाएं और सारे लोगों के बीच ऐलान कर दें कि इमाम अली अ.स. की इताअत सब पर वाजिब हैl
इस हुक्म के आने के बाद पैग़म्बर स.अ. ने हुक्म दिया कि जो लोग आगे जा चुके हैं उन्हें वापस बुलाया जाए और जो अभी क़ाफ़िले से पीछे रह गए हैं उनका इंतज़ार किया जाए, उसके बाद सारे हाजियों को जोहफ़ा में ग़दीरे ख़ुम नाम की जगह पर जमा किया, ज़ोहर की नमाज़ की अज़ान दी गई, धूप की तपिश का हाल यह था कि लोग अपनी रिदा का एक कोना अपने सर पर दूसरा अपने पैरों के नीचे दबाए हुए थे, पैग़म्बर स.अ. नमाज़ पढ़ाने के बाद ऊंटों के पालान से तैयार किए गए मिम्बर पर तशरीफ़ ले गए और लोगों से इस तरह गुफ़्तगू की कि सब लोगों ने आपकी आवाज़ को सुना, आपने फ़रमाया:
सारी तारीफ़ों का हक़दार अल्लाह है, हम उसी से मदद चाहते हैं और उसी पर ईमान रखते हैं और उसी पर भरोसा करते हैं, और नफ़्से अम्मारह के गुमराह करने और अपने बुरे आमाल के लिए उसी से पनाह चाहते हैं, वह अल्लाह जिसके अलावा कोई गुमराह लोगों की हिदायत करने वाला नहीं है, मैं गवाही देता हूं कि ख़ुदा का कोई शरीक और साथी नहीं है और मोहम्मद (स.अ.) उसके बंदे और रसूल हैंl
फिर फ़रमाया:
ऐ लोगों अलीम और मेहरबान अल्लाह ने मुझे ख़बर दी है कि मेरी ज़िंदगी के दिन बहुत जल्द ख़त्म होने वाले हैं और बहुत जल्द मैं उसकी बारगाह में वापस जाने वाला हूं.....
लोगों ने आपके इस बयान के बाद कहा: हम सब गवाही देते हैं कि आपने अल्लाह की रिसालत को पहुंचा दिया और नेकी की हिदायत की इसलिए अल्लाह आपको ख़ैर अता करेl
फिर आपने फ़रमाया: क्या तुम लोग गवाही नहीं देते हो कि अल्लाह के अलावा कोई माबूद नहीं है और यह कि मोहम्मद (स.अ.) उसके बंदे और रसूल हैं? जन्नत, जहन्नम और मौत हक़ है? और इसमें कोई शक नहीं कि क़यामत आएगी और अल्लाह हर एक को क़ब्रों में ज़िंदा कर के उठाएगा?
लोगों ने कहा: हम सब इसकी गवाही देते हैंl
आपने फ़रमाया: ख़ुदाया तू गवाह रहना....
फिर फ़रमाया: ऐ लोगों तुम सुन रहे हो?
लोगों ने कहा: जी हां
आपने फ़रमाया: मैं तुम लोगों से पहले हौज़े कौसर पर पहुचूंगा और तुम लोग वहां मेरे पास आओगे....... इसलिए ध्यान रहे कि मेरे बाद तुम लोग सक़लैन का कैसे रखते हो....
लोगों के बीच से किसी ने सवाल किया: या रसूलल्लाह यह सक़लैन क्या है?
आपने फ़रमाया: एक अल्लाह की किताब क़ुरआन है जिसका एक सिरा अल्लाह के पास है दूसरा तुम्हारे हाथ में है, इसलिए उसे मज़बूती से पकड़े रहो ताकि गुमराह न हो, दूसरा मेरी इतरत मेरे अहलेबैत (अ.स.) हैं, अलीम और मेहरबान अल्लाह ने मुझे ख़बर दी है कि यह दोनों कभी आपस में जुदा नहीं होंगे यहां तक कि हौज़े कौसर पर मुझ से मुलाक़ात करेंगे इसलिए इनसे आगे निकलने की कोशिश मत करना और न ही उनके बारे में लापरवाही करना वरना हलाक हो जाओगेl
इसके बाद आपने इमाम अली अ.स. का हाथ पकड़ कर उठाया और जब सभी लोगों का ध्यान आपकी तरफ़ आ गया तब आपने फ़रमाया: ऐ लोगों! कौन है जो मोमेनीन पर उनके नफ़्सों से ज़्यादा विलायत और अधिकार रखता है?
लोगों ने कहा अल्लाह और उसका रसूल बेहतर जानते हैंl
आपने फ़रमाया: अल्लाह मेरा मौला है और मैं मोमेनीन का मौला हूं और उन पर विलायत और अधिकार रखता हूं और जिस जिस का मैं मौला हूं उसके यह अली (अ.स.) भी मौला हैंl
इस जुमले को आपने तीन बार दोहरायाl
इसके बाद आपने और भी बहुत सारी बातें मुसलामानों से कहीं और आख़िर में इस बात पर ज़ोर देकर कहा कि जो यहां हाज़िर हैं वह इस ख़बर को जो यहां मौजूद नहीं हैं उन तक पहुंचा दें, अभी लोग वहां से हटे भी नहीं थे कि जिब्रईल इस आयत को लेकर नाज़िल हुए.....
आज मैंने तुम्हारे दीन को कामिल कर दिया और अपनी नेमतों तुम पर तमाम कर दियाl
फिर लोगों ने इमाम अली अ.स. को मुबारकबाद देना शुरू कर दीl


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