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Date of publication : 14/6/2018 12:2
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ईदुल फ़ितर के आमाल

शबे ईद और ईदुल फ़ितर अपने आमाल के हिसाब किताब का बेहतरीन मौक़ा है कि माहे रमज़ान में हमारे आमाल क्या अल्लाह की बारगाह में पेश करने के क़ाबिल हैं या नहीं? ताकि अगर कोई कमी रह गई हो तो इस शबे ईद में या कल आने वाले ईद के दिन में उस कमी को पूरा कर के हम अपने आमाल को अल्लाह की बारगाह में पेश कर सकें।

विलायत पोर्टल : माहे रमज़ान की मुबारक रातों में से एक अहम रात शबे ईदे फ़ितर है, जिसकी फ़ज़ीलत और आमाल और उस रात की इबादत के सवाब के बारे में बहुत सारी हदीसें भी नक़्ल हुई हैं, यहां तक कि हदीसों में मौजूद है कि यह रात शबे क़द्र से कम नहीं है, शबे ईद और ईदुल फ़ितर अपने आमाल के हिसाब किताब का बेहतरीन मौक़ा है कि माहे रमज़ान में हमारे आमाल क्या अल्लाह की बारगाह में पेश करने के क़ाबिल हैं या नहीं? ताकि अगर कोई कमी रह गई हो तो इस शबे ईद में या कल आने वाले ईद के दिन में उस कमी को पूरा कर के हम अपने आमाल को अल्लाह की बारगाह में पेश कर सकें।
इमाम मोहम्मद बाक़िर अ.स. ने पैग़म्बर स.अ. से नक़्ल किया है कि जिस समय शव्वाल का पहला दिन (ईद का दिन) आता है मुनादी आवाज़ आवाज़ देता है कि ऐ मोमिनों अपने अमल का ईनाम और उसका सवाब लेने के लिए दौड़ो।
इस रात की अहमियत और फ़ज़ीलत को समझने के लिए मासूमीन अ.स. से हदीसें नक़्ल हुई हैं और कुछ आमाल भी बयान किए गए हैं।

शबे ईदुल फ़ितुर के आमाल
शबे ईदुल फ़ितर उन रातों में से है जिसकी बहुत फ़ज़ीलत बयान की गई है और इस रात जाग कर इबादत करने को भी हदीस में बयान किया गया है और इस रात की शबे क़द्र जैसी अहमियत बयान हुई है, इस शब के लिए कुछ आमाल इस तरह ज़िक्र हैं....
** सूरत डूबते समय ग़ुस्ल करना
** शबे ईद रात भर जाग कर नमाज़ और दुआएं पढ़ना और अल्लाह की बारगाह में इस्तेग़फ़ार करते हुए पूरी रात मस्जिद में गुज़ारना
** मग़रेबैन, सुबह और ईद की नमाज़ के बाद नक़्ल होने वाली दुआओं को पढ़ना

ईदुल फ़ितर के दिन के आमाल
** तकबीर, सुबह और ईद की नमाज़ बाद यह तकबीर पढ़े..   अल्लाहो अकबर, अल्लाहो अकबर, ला इलाहा इल्लल्लाहो वल्लाहो अकबर, अल्लाहो अकबर, व लिल्लाहिल हम्द, अल्हमदो लिल्लाहे अला मा हदाना, व लहुश-शुक्र अला मा अवलाना
** नमाज़े ईद से पहले फ़ितरे का निकालना, अगर ज़रूरतमंद मिले को उसे तुरंत पहुंचा दिया जाए वरना फ़ितरा निकाल कर किनारे रख दे, एक इंसान का फ़ितरा लगभग 3 किलो बताया गया है, और फ़ितरे में गेहूं या वह दूसरी चीज़ जो उसके इलाक़े में सबसे ज़्यादा खाई जाती हो, ध्यान रहे फ़ितरा देना ऐसा वाजिब अमल है जिस पर बहुत ज़ोर दिया गया है और माहे रमज़ान के आमाल के क़ुबूल होने की शर्त भी फ़ितरा ही है, अल्लाह ने क़ुर्आन में भी नमाज़ से पहले फ़ितरा अदा करने की बात कही है जैसाकि इरशाद है बेशक कामयाब है वह जिसने ज़कात अदा की, परवरदिगार को याद किया और फिर नमाज़ अदा की।
** ग़ुस्ल करना, और शैख़ तूसी र.ह. के अनुसार ग़ुस्ल करने का समय ईद की सुबह से ईद की नमाज़ से पहले तक है, और ग़ुस्ल करने से पहले यह दुआ पढ़े.... अल्लाहुम्मा ईमानन बिका व तसदीक़न बेकिताबेका व इत्तेबाआ सुन्नते नबिय्येका मोहम्मदिन सल्लल्लाहो अलैहि व आलेहि
इसके बाद बिस्मिल्लाह करते हुए नीयत करे और ग़ुस्ल करे।
 




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