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Date of publication : 14/6/2018 11:44
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ग़ुस्से और धमकी से बातचीत की मेज़ तक

जैसाकि बताया जा रहा है कि डोनाल्ड ट्रंप और किम जोंग की मुलाक़ात पर लगभग 2 करोड़ डॉलर का ख़र्च आया है, अब इस 2 करोड़ डॉलर के ख़र्च से कुछ तो नतीजा निकलना ही चाहिए, फ़िलहाल मीडिया द्वारा जो ख़बरें आ रही हैं उससे तो ऐसा ही लगता है कि 2 करोड़ डॉलर के ख़र्च में मीडिया बहुत दिलचस्पी दिखा रही है क्योंकि वरिष्ठ अधिकारियों की रिपोर्ट के अनुसार ज़्यादा ख़र्च दोनों राजनेताओं की सुरक्षा और प्रेस रिपोर्टर की ख़ातिरदारी पर हुए हैं, इस बातचीत के नतीजे आने वाले समय में कुछ भी हों लेकिन ज़ाहिर में कुछ ऐसे इशारे नहीं मिल सके हैं जिन से कुछ अंदाज़ा हो सके कि अब तक की बातचीत को किनारे फ़ेकते हुए यह महंगी मुलाक़ात जो हुई है क्या यह दुनिया को शांति की ख़ुशख़बरी देगी...., अमेरिका ने अभी तक किस समझौते और किस बातचीत का सम्मान किया है यह तो सभी जानते हैं जिसकी ताज़ा मिसाल ईरान के साथ होने वाला परमाणु समझौता है जिससे बाहर हो कर अमेरिका ने साफ़ कर दिया कि उस पर किस हद तक भरोसा और यक़ीन किया जा सकता है,



विलायत पोर्टल : कहते हैं कि अरस्तू की इल्मी बैठक चल रही थी, इल्म के रास्ते में आने वाली रुकावटों को सुलझाया जा रहा था, बड़े बड़े आलिम और विद्वान वहां मौजूद थे तभी एक जाहिल वहां आ पहुंचा और अरस्तू के दर्स में बैठे एक बहुत होनहार स्टूडेंट से उलझ गया और उसे बहुत खरी खोटी सुनाई, जब अरस्तू के उस बुध्दिमान शागिर्द ने यह देखा कि तो वह भी आपा खो बैठा उसने भी ईंट का जवाब पत्थर से दिया और ख़तरनाक से ख़तरनाक धमकियां दे दीं और भद्दी भद्दी गालियों को इल्मी रंग दे कर उस जाहिल को दे डाली, बीच बचाव करते हुए लोगों ने एक दूसरे को किसी तरह से अलग किया, जह वह जाहिल और अनपढ़ वहां से चला गया तो को अरस्तू ने ला हौल पढ़ने या अपने शागिर्द के समर्थन की जगह अपने ही शागिर्द से नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए उसकी बहुत आलोचना की।

शागिर्द ने अपने उस्ताद का सम्मान करते हुए निगाहें झुकाए हुए हाथ जोड़ कर कहा कि उस्ताद आपने तो देखा कि हम इल्मी मामलात पर चर्चा कर रहे थे और यह जाहिल ख़ुद यहां आ पहुंचा और आपने ख़ुद देखा कि बिना मेरे कुछ कहे हुए उसने मुझे क्या नहीं कहा, मैंने तो केवल उसका जवाब दिया और अगर मैं जवाब न देता तो हो सकता है कि वह कुछ और भी बकवास करता और तो और आपका भी अपमान करता लेकिन आप उल्टा मुझे ही सुना रहे हैं मेरा हौसला बढ़ाने के बजाए मेरा हौसला तोड़ रहे हैं और मेरी ही क्लास ले रहे हैं जबकि आपने ख़ुद देखा कि गालियां देना किसने शुरू की थी मैं तो उसको जानता तक नहीं था, वह जाहिल इंसान था और अपनी जेहालत का शिकार होकर मुझे ताना मार रहा था, आपको तो पता है मैं आपका शागिर्द हूं और एक पढ़ा लिखा इंसान हूं क्या कोई पढ़ा लिखा इंसान अपने अपमान को सहन कर पाएगा? मुझे तो आप पर आश्चर्य हो रहा है कि आपकी यह कैसी इल्म दोस्ती है कि एक आलिम के मुक़ाबले आने वाले जाहिल को तो कुछ कहा नहीं और मुझे ही सुनाए जा रहे हैं, अरस्तू ने जवाब दिया कि मैं इसी लिए तुम्हारी आलोचना कर रहा हूं कि तुम एक पढ़े लिखे आलिम हो और तुम जानते हो कब किस से किस तरह बात करना चाहिए, तुम आलिम और विद्वान हो और एक आलिम और विद्वान जाहिल और अनपढ़ को समझ सकता है इसलिए कि उसने एक ऐसा दौर गुज़ारा है जब वह ख़ुद जाहिल और अनपढ़ था तो आलिम जानता है कि जेहालत से इंसान के अंदर कितनी अकड़ और अहंकार पैदा होता है और जेहालत की वजह से वह क्या क्या बकवास और अपशब्द अपने मुंह से निकालता है लेकिन जो जाहिल और अनपढ़ होता है वह आलिम और विद्वान के मनोविज्ञान को नहीं समझता क्योंकि वह इल्म और शिष्टाचार से दूर है उसने अभी इल्म की ख़ुशबू तक नहीं सूंघी, इसलिए उसे क्या पता कि आलिम क्या होता है और उससे कैसे बात करना चाहिए, यह तो तुम्हारी ज़िम्मेदारी है कि किसी तरह की जवाबी कार्यवाही न करो और उसे अपनी जेहालत ज़ाहिर करने दो, क्योंकि जाहिल आलिम से नहीं उलझते....

ऊपर बयान की गई दास्तान शायद ट्रंप और किम जोंग ने एक साथ एक ही समय में पढ़ ली होगी शायद यही वजह है कि उन्होंने अरस्तू की नसीहत पर अमल करते हुए दुनिया के सामने अपने आपको बहुत पढ़ा लिखा, चालाक और होशियार पेश करने की अच्छी कोशिश की, जहां एक तरफ़ उत्तरी कोरिया की सेना के जनरल गुआम हमले की तैयारियां पूरी होने के बाद हमले के आदेश की प्रतीक्षा कर रहे थे और समुद्र की लहरें परमाणु बम का इंतेज़ार कर रही थीं वहीं दूसरी तरफ़ रॉकेट मैन को चुप करने के लिए आग और क़हर की बारिश बरसने की बात कही जा रही थी, कोई किसी को पागल कह रहा था तो कोई किसी को बेवक़ूफ़ और जाहिल, ऐसे में आग और क़हर की बारिश की जगह सुलह और बातचीत की के लिए तैयार हो जाना बेशक एक अच्छा संकेत है, कम से कम इतना तो कहा जा सकता है कि परमाणु शक्ति वाले दो देशों ने अरस्तू की नसीहत पर एक साथ एक ही समय में अमल किया अब यह तो समय तय करेगा इन दोनों में कौन सा राजनेता जाहिल और पागल था औक कौन सा अक़्लमंद और चालाक, लेकिन ग़ुस्से और धमकी के बीच से सुलह और बातचीत का निकल कर आना यह ख़ुद एक अच्छी बात है लेकिन फिर कभी ऐसा न हो कि बातचीत और सुलह की मेज़ पर कोई ज्वालामुखी फट जाए।

फ़िल्हाल उत्तरी कोरिया की अमेरिका से राष्ट्रपति से बातचीत का जो ख़बरें आ रही हैं उनमें तो अमेरिकी राष्ट्रपति, किम जोंग की क़ाबिलियत का कलमा पढ़ते दिखाई दे रहे हैं और किसी रिपोर्टर के इस जवाब को सारी दुनिया के लोग अचंभित हो कर सुन रहे हैं कि किम जोंग बहुत क़ाबिल हैं वह बहुत कम उम्र में सत्ता में आए और कठिन परिस्तिथियों में देश को संभाला, ट्रंप ने इन शब्दों का प्रयोग ऐसे इंसान के लिए किया जिन्हें कुछ महीने पहले वह रॉकेट मैन और ऐसे देश का राजनेता कह चुके थे जिसे दुनिया बुरा समझती है, इधर उत्तरी कोरिया ने केवल इतना ही बयान दिया है कि हमने पिछली बातों को छोड़ने का फ़ैसला किया है और दुनिया के बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे।

हम बदलाव की शुरूआत का इंतेज़ार करेंगे और हम ही नहीं हर इंसान को इंतेज़ार करना होगा कि शायद इतिहास की सबसे महंगी मुलाक़ात से कुछ हासिल हो सके और सच है जब किसी एक बातचीत और चर्चा पर ख़र्च होने वाला बजट इतना अधिक हो तो इंसान का उस चर्चा के नतीजे को ले कर संवेदनशील तो होना ही चाहिए, जैसाकि बताया जा रहा है कि डोनाल्ड ट्रंप और किम जोंग की मुलाक़ात पर लगभग 2 करोड़ डॉलर का ख़र्च आया है, अब इस 2 करोड़ डॉलर के ख़र्च से कुछ तो नतीजा निकलना ही चाहिए, फ़िलहाल मीडिया द्वारा जो ख़बरें आ रही हैं उससे तो ऐसा ही लगता है कि 2 करोड़ डॉलर के ख़र्च में मीडिया बहुत दिलचस्पी दिखा रही है क्योंकि वरिष्ठ अधिकारियों की रिपोर्ट के अनुसार ज़्यादा ख़र्च दोनों राजनेताओं की सुरक्षा और प्रेस रिपोर्टर की ख़ातिरदारी पर हुए हैं, इस बातचीत के नतीजे आने वाले समय में कुछ भी हों लेकिन ज़ाहिर में कुछ ऐसे इशारे नहीं मिल सके हैं जिन से कुछ अंदाज़ा हो सके कि अब तक की बातचीत को किनारे फ़ेकते हुए यह महंगी मुलाक़ात जो हुई है क्या यह दुनिया को शांति की ख़ुशख़बरी देगी...., अमेरिका ने अभी तक किस समझौते और किस बातचीत का सम्मान किया है यह तो सभी जानते हैं जिसकी ताज़ा मिसाल ईरान के साथ होने वाला परमाणु समझौता है जिससे बाहर हो कर अमेरिका ने साफ़ कर दिया कि उस पर किस हद तक भरोसा और यक़ीन किया जा सकता है, लेकिन क्या उत्तरी कोरिया अपने पिछले समझौतों पर बाक़ी रहा है या फिर अपने फ़ायदे की ख़ातिर वही किया जो बड़े बड़े राजनेता और सियासत के मैदान के माहिर खिलाड़ी करते हैं, थोड़ी नज़र उस पर भी डालते हैं...
1992 में उत्तरी कोरिया ने परमाणु हथियार न बनाने और उनका प्रशिक्षण न करने के समझौते पर हस्ताक्षर किए थे
1994 में उसने कहा था कि मदद के बदले में प्लूटोनियम हथियारों को बनाने का काम रोक देगा
2005 में उसने कहा था कि वह पिछले सारे परमाणु हथियार नष्ट कर देगा और अपना हालिया पर परमाणु कार्यक्रम भी रोक देगा।

यह वह समझौते हैं जो इससे पहले हो चुके हैं लेकिन अब इनका कुछ पता नहीं और यह बात यूरोपीय मीडिया में घूम रही है उत्तर कोरिया ने पिछले जिनते समझौते किए उन सबसे मुखर गया है, नहीं मालूम यूरोपीय मीडिया की यह ख़बरें झूठी हैं या सच्ची, उसके सच या झूठ के लिए तारीख़ी दस्तावेज़ की ज़रूरत है जो किसी के पास हों या न हों ट्रंप के पास ज़रूर महफ़ूज़ रखे होंगे, अब सवाल यह है कि इतना सब होने के बाद अगर दोनों देश बातचीत की मेज़ पर आए हैं तो दोनों ही के दिमाग़ में दुनिया में होने वाली चर्चोओं को ले कर कुछ न कुछ ज़रूर चल रहा है वह क्या है उसको आने वाला समय ही बताएगा कि किस के दिमाग़ क्या था, हालांकि फ़िलहाल ग़ुस्सा और धमकी के बाद होने वाली बातचीत की  तस्वीर शायद इन दो बातों से साफ़ हो जाए कि एक तरफ़ सी.वी.आई.डी. के नाम की गूंज है जिसके कारण उत्तर कोरिया को ख़ुद को परमाणु और न्यू क्लियर से दूर रखना है जिसे लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति का यह जुमला कुछ कह रहा है "उन्हें (उत्तर कोरिया को) ख़ुद को न्यू क्लियर से दूर करना ही होगा अगर वह ऐसा नहीं करते तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा” इस के विपरीत यह बात भी ध्यान देने के क़ाबिल है कि इसी बातचीत के बाद किसी रिपोर्टर ने किम जोंग से परमाणु नष्ट करने को ले कर सवाल किया तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया, किम जोंग का उसी मुद्दे पर चुप रहना जिस के लिए ट्रंप ने ज़ोर दिया है यह ख़ुद ज़ाहिर किए दे रहा है कि अरस्तू की क्लास में अक़्लमंद, पढ़ा लिखा और होशियार कौन है और जाहिल और अनपढ़ कौन है, अब यह समय बताएगा कि ग़ुस्से और धमकी के बीच से निकलने वाली इस बातचीत का असर सिंगापुर के सेंटोसा द्वीप के कैपला होटल में कब तक बाक़ी रहता है।



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