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Date of publication : 2/6/2018 13:20
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पाकिस्तान, शिया समुदाय, वहाबी आतंकी संगठनों के साथ साथ सरकारी आतंक से परेशान !

डेढ़ साल हो चुके हैं और हमारे पास उसकी कोई ख़बर नहीं है, "अगर उन्होंने उसे मार दिया है या वो ज़िंदा है तो वह मुझे कुछ तो बताएं. मैंने उसे पूरे शहर में खोजने की कोशिश की. रोते-रोते थक गई हूं. दुआएं मांगते-मांगते थक गई हूं ।
विलायत पोर्टल : प्राप्त जानकारी के अनुसार पाकिस्तान का शिया समुदाय कभी वहाबी आतंकियों की टार्गेट कीलिंग तो कभी सरकारी मशीनरी के भेदभाव का शिकार होता रहा है , पाकिस्तान में अब तक शिया समुदाय के अन गिनत लोगों को सरकारी एजेंसियां बिना किसी अपराध के मामूली पूछताछ का बहाने उठा कर ले गई हैं जिन का अभी तक कोई सुराग़ नहीं है।
पाकिस्तान की एक स्थानीय मस्जिद की सीसीटीवी तस्वीरों में दिखता है कि 30 साल के नईम हैदर को हथकड़ी लगाकर दर्जनभर बंदूकधारी लोग ले जा रहे हैं, इनमें से कई लोगों के चेहरे ढके हैं तो कुछ पुलिस की वर्दी में हैं, ये 16 नवंबर 2016 की रात थी, इसके बाद हैदर कभी दिखाई नहीं दिए । सीसीटीवी की तस्वीरों के बावजूद पुलिस और ख़ुफ़िया एजेंसियां कोर्ट में इस बात को ख़ारिज करती रही हैं कि वो उनकी हिरासत में हैं । शिया समुदाय के कार्यकर्ताओं का कहना है कि बीते दो सालों में 140 पाकिस्तानी शिया कथित तौर पर ग़ायब हुए हैं जिनमें से हैदर भी एक हैं ।
उनके परिवार का मानना है कि उन्हें ख़ुफ़िया एजेंसियों ने हिरासत में लिया था हैदर समेत ग़ायब हुए 25 लोग पाकिस्तान के सबसे बड़े शहर कराची से थे ।
हैदर के परिवार का कहना है कि ग़ायब होने के दो दिन पहले ही वो अपनी गर्भवती पत्नी के साथ कर्बला (इराक़) की धार्मिक यात्रा से लौटे थे, इसके बाद उनकी पत्नी उज़्मा हैदर ने एक बच्चे को जन्म दिया जिसने आज तक अपने पिता को नहीं देखा है । बीबीसी से बात करते हुए उज़्मा कहती हैं, "मेरे बच्चे हमेशा मुझसे पूछते हैं कि उनके पिता घर कब वापस आएंगे?" वो कहती हैं, "मैं उन्हें क्या जवाब दे सकती हूं? कोई भी हमें यह नहीं बताता कि वो कहां हैं या कैसे हैं, कम से कम हमें यही बता दें कि उन पर क्या आरोप हैं." 'ग़ायब' हुए और दूसरे शिया लड़कों के परिवारों की भी ऐसी ही कहानी है, उन्हें भी सुरक्षाबलों द्वारा रात में उनके घर से उठा लिया गया था । कराची के एक शिया इलाक़े के एक घर में बिलखती हुई महिलाओं ने कहा कि प्रशासन ने उनको कभी भी कोई सूचना नहीं दी कि उनके परिजन कहां हैं और उन पर क्या आरोप हैं । हालांकि, शिया समुदाय के नेताओं का कहना है कि उन्हें बताया गया था कि उन लड़कों के कथित तौर पर सीरिया के मिलिशिया संगठन 'ज़ैनबियून ब्रिगेड' से संबंध थे. पैग़ंबरे इस्लाम स.अ. मोहम्मद की नातिन के नाम पर रखा गया है जिनका शिया इस्लाम में काफ़ी बड़ा स्थान है, जनाब ज़ैनब बिन्ते अली का रोज़ा सीरिया की राजधानी दमिश्क में है और 'ज़ैनबियून ब्रिगेड' का मक़सद इस रोज़े को इस्लामिक स्टेट जैसे वहाबी आतंकी समूहों के नुक़सान से बचाना था क्योंकि उनका मानना है कि ये धर्म विरोधी है ।
यह भी माना जाता है कि ज़ैनबियून ने अलेप्पो समेत सीरिया में कई महत्वपूर्ण लड़ाईयां लड़ीं. हालांकि, पाकिस्तानी गृह मंत्रालय की ब्लैक लिस्ट में इस संगठन का नाम नहीं हैं और न ही 'ग़ायब' हुए इन लोगों पर किसी अपराध का मामला दर्ज किया गया ।
कराची में 'शिया लापता व्यक्ति समिति' के प्रमुख राशिद रिज़वी हैं जिन्होने लोगों को रिहा करने या अदालत में पेश करने को लेकर शहर में कई आंदोलनों का नेतृत्व किया है । वह कहते हैं कि जिन लोगों को हिरासत में लिया गया था उनमें से अधिकतर मध्य-पूर्व की धार्मिक यात्रा से लौटे थे । राशिद रिज़वी ने बीबीसी को बताया, "राष्ट्रीय संस्थाओं के कुछ प्रतिनिधि मुझसे मिलने आए थे, उन्होंने हमें प्रदर्शन समाप्त करने के लिए सहमत करने की कोशिश की." "मैंने उनसे पूछा था कि उन्होंने उन लड़कों को क्यों उठाया? उन्होंने कहा था कि उन्हें लगता था कि वे सीरिया में दाइश (आईएसआईएस) और अलक़ायदा के ख़िलाफ़ लड़ने गए हैं" रिज़वी आगे बताते हैं, "मैंने उनसे कहा कि अगर ये मामला है तो उनका मामला क्यों नहीं शुरू करते हैं, वरना जजों और कोर्ट के होने का क्या तुक है?" जिसका पाकिस्तानी सुरक्षाबलों ने कोई जवाब नहीं दिया पाकिस्तान में 'गुमशुदा लोगों' का मुद्दा कई संवेदनशील मुद्दों में से एक है, आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, देश में कथित तौर पर ग़ायब किए गए 1,500 से अधिक मामले अनसुलझे हैं ।
जो दूसरे लोग हिरासत में लिए गए थे, उसमें संदिग्ध जातीय राष्ट्रवादी कार्यकर्ता और पाकिस्तानी सेना के धर्मनिरपेक्ष आलोचक हैं । हिरासत में लिए गए और फिर छूटकर आए एक शख़्स ने पहचान न ज़ाहिर करने की शर्त पर बताया कि उसे एक 'छोटे से और बिना रोशनी के सेल' में रखा गया था जहां उसे ख़ुफ़िया एजेंसियों द्वारा बिजली के झटकों समेत 'बुरी तरह से प्रताड़ित' किया जाता था ।
उस नौजवान का कहना था कि वह उससे 'ज़ैनबियून' को लेकर सवाल करते थे कि वो उस ब्रिगेड में किसे जानता है और इसकी फ़ंडिंग कहां से आती है. एक दूसरे सामाजिक कार्यकर्ता समर अब्बास को इस्लामाबाद में जनवरी 2017 को हिरासत में लिया गया था । यह वही समय था जब पाकिस्तानी सेना के ख़िलाफ़ लिखने वाले कई ब्लॉगर्स को हिरासत में लिया गया था, सार्वजनिक विरोध के कारण कुछ सप्ताह बाद उन्हें रिहा कर दिया गया था. लेकिन मार्च 2018 तक अब्बास हिरासत में रहे, उनके एक रिश्तेदार को भी हिरासत में लिया गया था जो अभी भी 'ग़ायब' हैं । अब्बास ने कहा कि उनसे की गई पूछताछ ज़ैनबियून पर केंद्रित थी, "उन्होंने मुझसे कहा कि तुम सीरिया में लोगों को लड़ने के लिए भेजने में शामिल हो, हमें उनके नाम बताओ." "मैंने कहा कि मैं अपनी ज़िंदगी में कभी भी वहां (सीरिया) नहीं गया"
65 साल की शमीम आरा हुसैन कहती हैं, "ख़ुदा के लिए मुझे बता दो कि मेरा बच्चा कहां है." सुरक्षाबलों द्वारा जब उनके छोटे बेटे आरिफ़ हुसैन को ले जाया गया तो वह उस वक़्त को याद करके रो पड़ती हैं ।
"उन्होंने कहा कि हम इन्हें कुछ सवाल पूछने के लिए ले जा रहे हैं और इन्हें छोड़ देंगे. अब डेढ़ साल हो चुके हैं और हमारे पास उसकी कोई ख़बर नहीं है, "अगर उन्होंने उसे मार दिया है या वो ज़िंदा है तो वह मुझे कुछ तो बताएं. मैंने उसे पूरे शहर में खोजने की कोशिश की. रोते-रोते थक गई हूं. दुआएं मांगते-मांगते थक गई हूं ।
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बीबीसी


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