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Date of publication : 17/5/2018 14:17
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रमज़ानुल मुबारक,तौबा व इस्तिग़फ़ार का महीना।

रमज़ानुल मुबारक में अल्लाह की एक बड़ी नेमत जिससे हमें ख़ास तौर पर फ़ायदा उठाने का हुक्म दिया गया है “तौबा और इस्तिग़फ़ार” है यानि रमज़ानुल मुबारक अपने गुनाहों को माफ़ करवाने का बेहतरीन अवसर है.......

विलायत पोर्टलः रमज़ानुल मुबारक में अल्लाह की एक बड़ी नेमत जिससे हमें ख़ास तौर पर फ़ायदा उठाने का हुक्म दिया गया है “तौबा और इस्तिग़फ़ार” है यानि रमज़ानुल मुबारक अपने गुनाहों को माफ़ करवाने का बेहतरीन अवसर है।
इस महीने को “मग़फ़िरत यानी गुनाहों की माफ़ी का महीना भी कहा जाता है, अल्लाह की तरफ़ लौटने का महीना। हां यह बात भी ध्यान में रहे कि इस्तेग़फ़ार केवल गुनाहों के लिए नहीं होता है यह और बात है कि हम गुनहगार हैं, पापी हैं हमसे न जाने कितनी ग़ल्तियां होती है गुनाह अंजाम पाते हैं जिनके लिए इस्तिग़फ़ार और तौबा करना ज़रूरी है। लेकिन यह भी ज़रूरी नहीं है कि इंसान ने गुनाह किए हों तभी इस्तिग़फ़ार करे, ग़ल्तियां की हों तभी माफ़ी मांगे बल्कि इस्तिग़फ़ार ख़ुद एक इबादत है जिससे इंसान में निखार आता है और उसकी रूह व आत्मा को सुकून मिलता है।
वैसे तो रमज़ानुल मुबारक के पूरे महीने में तौबा के लिए दावत दी गई है लेकिन कुछ ख़ास रातों यानि शबे क़द्र में इसकी ज़्यादा ताकीद हुई है।
इंसान जितना गुनाह करता है उतना अल्लाह तआला से दूर होता जाता है और तौबा व इस्तिग़फ़ार उसे अल्लाह की तरफ़ पलटाता है।
रमज़ानुल मुबारक अल्लाह की तरफ़ पलटने का, इंसान बैठे, सोचे अपने बारे में अपना आंकलन करे, अपने कामों का हिसाब करे, अपने अंदर पाई जाने वाली बुराईयों की समीक्षा करे। काग़ज़ क़लम लेकर बैठे, अपने अंदर पाई जाने वाली कमियों को ढ़ूंढ़े, बुराईयों को तलाश करे, अपने अंदर को टटोले और बुराईयों की समीक्षा करे और एक एक करके उन्हें काग़ज़ पर लिखे फिर अपने पूरे मन से क़बूल करे कि उसके अंदर यह बुराईयां पाई जाती हैं, फिर पक्का इरादा करे उन्हें छोड़ने का और इस मुबारक महीने में जितनी बुराईयों से छुटकारा मुमकिन है, छुटकारा हासिल करे, इसी काम का नाम तौबा है।
जब बुराईयों को छोड़ने और अल्लाह की तरफ़ पलटने का पक्का इरादा करले तो अल्लाह की बारगाह में दामन फैलाए और दुआ करेः ऐ मेरे परवरदिगार मैं इन गुनाहों से छुटकारा चाहता हूं, तेरी तरफ़ पलटना चाहता हूं मेरी मदद कर और मेरी तौबा को क़बूल कर ले और मेरे गुनाहों को माफ़ कर दे। इस पूरे प्रोसेस का नाम इस्तिग़फ़ार है।


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