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Date of publication : 15/5/2018 14:26
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फिलिस्तीनियों का क़त्ले आम बंद हो, इस्राईल के केंद्र को निशाना बनाएगा हिज़्बुल्लाह : सय्यद हसन नसरुल्लाह

अब वह ज़माना गुज़र गया जब वह जहाँ चाहता था हमला कर भाग जाता था अब अगर इस्राईल ने कोई भूल की तो प्रतिरोधी दल इस्राईल के केंद्र को हमलों का निशाना बनाएँगे ।अरब देशों की मेहरबानी के कारण ज़ायोनी देश के हाथों क़ुद्स का अपमान हो रहा है सऊदी अरब ने ज़ायोनी देश से संबंध स्थापित करने की होड़ शुरू कर तथा उनके आगे घुटने टेकने पर दीन और धर्म की मोहर लगा दी है जिन्हे भी सऊदी अरब और मानवाधिकार आयोग तथा अंतर्रार्ष्ट्रीय संगठनों से इस संकट के समाधान की उम्मीद है वह भूल कर रहे हैं,अपना अधिकार पाने का सिर्फ एक रास्ता है संघर्ष और प्रतिरोध ।
विलायत पोर्टल :  प्राप्त जानकारी के अनुसार सय्यद ज़ुल्फ़िक़ार के नाम से मशहूर हिज़्बुल्लाह के दिलेर कमांडर शहीद मुस्तफा अमीन बदरुद्दीन की याद में आयोजित समरोह को सम्बोधित करते हुए हिज़्बुल्लाह के जनरल सेक्रेटरी सय्यद हसन नसरुल्लाह ने कहा कि सय्यद ज़ुल्फ़िक़ार हिज़्बुल्लाह का वह शेर था जिसने लेबनान से लेकर सीरिया तक मज़लूमों की सहायता की तथा ज़ालिमों के विरुद्ध मैदान में डटा रहा तथा सीरिया में मौजूद आतंकी संगठनों के विघटन में अहम् भूमिका निभाई। उन्होंने सीरिया के हालिया घटनाक्रम में सीरियन सेना की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि इस्राईल जानता है अब वह ज़माना गुज़र गया जब वह जहाँ चाहता था हमला कर भाग जाता था अब अगर इस्राईल ने कोई भूल की तो प्रतिरोधी दल इस्राईल के केंद्र को हमलों का निशाना बनाएँगे ।
सय्यद हसन नसरुल्लाह ने कहा कि अमेरिका के लिए मानवता तथा मानव मूल्य का कोई महत्व नहीं है वह क्षेत्र में अपने हितों को साधने के लिए किसी भी हद तक गिर सकता है तथा अपने सहयोगियों के साथ भी ईमानदार नहीं है। अमेरिका जल्द ही फिलिस्तीन संकट को लेकर सेंचुरी डील का ऐलान कर सकता है फिलिस्तीन में पिछले सत्तर साल से जो हो रहा है वह मानवता के दामन पर बदनुमा धब्बा है । उन्होंने कहा कि वर्तमान संकट और सेंचुरी डील के लिए सबसे बेहतरीन उपाय यही है कि फिलिस्तीन का कोई दल, कोई पक्ष इस पर हस्ताक्षर न करे, इस साज़िश के तीन कोण है, नेतन्याहू, सऊदी अरब का युवराज मोहम्मद बिन सलमान और ट्रम्प, इन तीनों में से किसी एक का शासन समाप्त होते ही इस डील की हवा निकल जाएगी ।
फिलिस्तीन और क़ुद्स के मुद्दे पर हम अरब देशों के विश्वाससघात का शिकार हो रहे हैं कुछ अरब देशों की मेहरबानी के कारण ज़ायोनी देश के हाथों क़ुद्स का अपमान हो रहा है सऊदी अरब ने ज़ायोनी देश से संबंध स्थापित करने की होड़ शुरू कर तथा उनके आगे घुटने टेकने पर दीन और धर्म की मोहर लगा दी है जिन्हे भी सऊदी अरब और मानवाधिकार आयोग तथा अंतर्रार्ष्ट्रीय संगठनों से इस संकट के समाधान की उम्मीद है वह भूल कर रहे हैं,अपना अधिकार पाने का सिर्फ एक रास्ता है संघर्ष और प्रतिरोध । प्रतिरोधी आंदोलन, संगठन, समाज और हमारे दोस्त देशों को प्रतिरोध और संघर्ष करना ही होगा तभी हम आज़ादी पा सकते हैं हालाँकि इस रास्ते में ज़ुल्म और अत्याचार का सामना करना पड़ेगा और दुश्मन की ओर से अत्याचार और बढ़ेंगे ।
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