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Date of publication : 14/5/2018 14:53
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क़ुद्स को छोड़ने का निर्णय काबे को छोड़ने के समान : मुफ़्ती-ए-आज़म सीरिया

अगर हम इतिहास से सीख न ले सकें ठीक से न पढ़ सकें तो आने वाला समय बहुत कठिन होगा मुफ़्ती ए आज़म बदरुद्दीन हसून ने कहा कि जिन्होंने मस्जिदे अक़्सा को अकेला छोड़ दिया और उसके लिए अपना कोई कर्तव्य नहीं समझते यह समझो कि उन्होंने खाना काबा को छोड़ दिया और उसके बारे में ग़फ़लत का शिकार हैं , बनी इस्राईल यहूदियों के लिए नील के साहिल से लेकर फ़रात तक एक देश का सपना संजोए हैं जबकि क़ुर्आन ने स्पष्ट किया है कि बनी इस्राईल खाना बदोश लोगों का क़बीला है उनका कोई देश था ही नहीं ।
विलायत पोर्टल : प्राप्त जानकारी के अनुसार सीरिया के मुफ़्ती ए आज़म शैख़ बदरुद्दीन हसून ने कहा कि आज क्षेत्र के हालात बहुत संकटपूर्ण हैं फिलिस्तीन और क्षेत्र की जनता के लिए बहुत संकट  का समय है ।
सीरिया ओर ईरान ने प्रतिरोध को बचाए रखने का  फैसला किया है चाहे हमे इसके लिए कितनी ही क़ुर्बानी देना पड़े, इस क्षेत्र में साज़िशों का जाल बिछाया जा रहा है, बहुत जल्दी लिखित में एक समझौता होने वाला है जिस के अनुरूप फिलिस्तीनियों के लिए मिस्र के सीना को एक देश के रूप प्रस्तुत किया जाएगा ।
अगर हम इतिहास से सीख न ले सकें ठीक से न पढ़ सकें तो आने वाला समय बहुत कठिन होगा मुफ़्ती ए आज़म बदरुद्दीन हसून ने कहा कि जिन्होंने मस्जिदे अक़्सा को अकेला छोड़ दिया और उसके लिए अपना कोई कर्तव्य नहीं समझते यह समझो कि उन्होंने खाना काबा को छोड़ दिया और उसके बारे में ग़फ़लत का शिकार हैं , बनी इस्राईल  यहूदियों  के लिए नील के साहिल से लेकर फ़रात तक एक देश का सपना संजोए हैं जबकि क़ुर्आन ने स्पष्ट किया है कि बनी इस्राईल खाना बदोश लोगों का क़बीला है उनका कोई देश था ही नहीं ।
उन्होंने कहा कि अगर ईरान ने फिलिस्तीन को छोड़ दिया होता तो यह देश आज खुद एयरबस बना रहा होता और अगर सीरिया ने प्रतिरोध का साथ न दिया होता तो आज सीरिया को दूसरा  स्विट्ज़रलैंड होता ।
 
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