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Code : 192909
Date of publication : 3/4/2018 4:55
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हज़रत अली अ. स. न होते तो अरब में ही सिमट कर रह जाता इस्लाम।

इस्लामी तारीख में इस्लाम फैलाने के लिए जितना हजरत अली और उनके परिवार की मेहनत और कुर्बानियां नजर आती हैं उतनी किसी की नहीं हैं, जिन्होंने पूरी दुनिया में इस्लाम को फैलाने का काम किया।

विलायत पोर्टल : मौला ए काएनात हजरत अली के दौरे हुकूमत में कोई बंदा भूखा नहीं सोता था हजरत अली अपने घर की रोज़ी रोटी एक यहूदी के बाग़ में मेहनत कर कमाए हुए पैसे से चलाते थे और सरकारी पैसे को हाथ तक नहीं लगाते थे। यह बात जामिया नाज़मिया के प्रिंसिपल मौलाना हमीदुल हसन ने सोमवार को आयोजित टॉक शो में एक सवाल का जवाब देते हुए कही। हजरत अली के जन्मदिन के उपलक्ष्य में टॉक शो मनकुन्तो मौला का आयोजन वन वॉयस संस्था की ओर से क़ैसरबाग स्थित राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में किया गया था। कार्यक्रम के आरम्भ में संस्था के चेयरमैन व लश्करे अहले सुन्नत के अध्यक्ष सय्यद रफअत ने सम्बोधित करते हुए कहा कि जहां तक मैं समझता हूं तो अगर इस्लाम में हजरत अली न आते तो इस्लाम अरब में ही सिमट कर रह जाता। इस्लामी तारीख में इस्लाम फैलाने के लिए जितना हजरत अली और उनके परिवार की मेहनत और कुर्बानियां नजर आती हैं उतनी किसी की नहीं हैं, जिन्होंने पूरी दुनिया में इस्लाम को फैलाने का काम किया। टॉक शो में उपस्थित लोगों के सवालों का जवाब देने के लिए टीले वाली मस्जिद के इमाम कारी शाह फजलुल मन्नान रहमानी बरकाती, मौलाना रजा हुसैन, उन्नाव के सफीपुर स्थित खानकाहे बकाईया के शाह हसनैन बकाई व मसूद रिजवी मौजूद थे। सवालों का जवाब देते हुए वक्ताओं ने कहा कि हजरत अली ने मैदाने जंग के अलावा कभी किसी पर तलवार नहीं उठाई और जंग के दौरान भी पहले दुश्मन को समझाते और वापस लौट जाने को कहते, जब दुश्मन नहीं मानता, तब उससे जंग करते, टॉक शो का संचालन मिर्जा शफीक हुसैन शफक ने किया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन गय्युरुल हसन रिजवी ने कहा कि हजरत अली जैसी शख्सियत दुनिया में पैदा होना नामुमकिन है, क्योंकि उन्होने हर तरह का इल्म और बेपनाह ताकत होने के बावजूद एक आम इंसान की तरह जिंदगी बसर कर इंसानियत की शिक्षा दी। इस मौके पर स्वामी सारंग को निशाने हैदर, सांस्कृतिक संस्था सनअतकदा को निशाने बाबुल इल्म से सम्मानित करते हुए अन्य लोगों को भी सम्मानित किया गया । इस मौके पर हैदर बख्श वारसी ने अपने साथियों के साथ मनकुन्तो मौला, दमादम मस्त कलंदर, मौला अली-अली सहित अन्य कव्वालियों से माहौल को रूहानी बना दिया, जबकि मनीष तिवारी व निदा खान ने सूफियाना कलाम पेश किया।
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