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Date of publication : 25/3/2018 14:28
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इमाम अली नक़ी अ.स. के शागिर्द

अबू हम्माद राज़ी का बयान है कि मैं इमाम अली नक़ी अ.स. से मिलने सामरा गया, मैंने इमाम अ.स. से कुछ शरई मसलों के जवाब पूछे, इमाम अ.स. ने जवाब दिए, जब मैं वहां से चलने लगा तो इमाम अ.स. ने कहा ऐ हम्माद जब भी किसी शरई मसले का जवाब पूछना हो या दीनी मामले में किसी मुश्किल में फंस जाओ तो वहीं पर अब्दुल अज़ीम हसनी नाम से एक मुत्तक़ी और फ़क़ीह हैं उनसे पूछ लिया करो, और मेरा सलाम उन तक पहुंचा देना।
विलायत पोर्टल : जैसाकि हम सभी जानते हैं कि इमामों के दौर में चाहे बनी उमय्या की हुकूमत रही हो या बनी अब्बास की, इमामों के लिए घुटन का माहौल बनाने में किसी ने कोई कसर नहीं छोड़ी, यहां तक कि इमामों के लिए तक़रीर करना ख़ुत्बे देना यहां तक कि कुछ इमामों पर आम जनता से मुलाक़ात पर भी पाबंदी थी, ज़ाहिर है इमाम हुकूमत के डर से दीन की तबलीग़ से तो रुक नहीं सकते हां यह और बात है कि हालात को देखते हुए दीन की तबलीग़ के तरीक़े बदल दें।
यही वजह है कि हमारे कई इमामों ने शागिर्दों की तरबियत द्वारा दीन की तबलीग़ की और मआरिफ़ को लोगों तक पहुंचाया, हम इस लेख में हमारे दसवें इमाम हज़रत अली नक़ी अ.स. के शागिर्दों और उनके हालात को संक्षेप में बयान करेंगे। शैख़ तूसी र.ह. के अनुसार इमाम अली नक़ी अ.स. के शागिर्दों की तादाद 185 से अधिक थी जिनमें से अधिकतर फ़क़ीह और बड़े उलमा थे जिनकी ख़ुद की कई किताबें थीं, मशहूर आलिम सय्यद बाक़िर शरीफ़ क़रशी ने इमाम के शागिर्दों की तादाद 178 बयान की और उनसे हदीसें भी नक़्ल की हैं। आपके कुछ मशहूर शागिर्द इस तरह से हैं.......
अय्यूब इब्ने नूह र.ह. यह एक बहुत नेक और भरोसेमंद इंसान थे, आपके तक़वा और अल्लाह की इबादत को देखते हुए उलमा-ए-रेजाल ने उनको अल्लाह के नेक बंदे जैसी उपाधि दी है, आप इमाम अली नक़ी अ.स. और इमाम हसन असकरी अ.स. के वकील भी थे, आपने बहुत सारी हदीसें इमाम अली नक़ी अ.स. से नक़्ल की हैं।
हसन इब्ने राशिद र.ह. यह इमाम मोहम्मद तक़ी अ.स. और इमाम अली नक़ी अ.स. दोनों के शागिर्द रहे हैं, और दोनों ही इमाम इनका बहुत सम्मान करते थे, शैख़ मुफ़ीद र.ह. ने इन्हें बेहतरीन फ़क़ीह और इस्लामी जगत की अहम शख़्सियतों में से एक बताया है जिनसे लोग अल्लाह के अहकाम के बारे में सवाल पूछते थे, और इनको नापसंद करने और इनके द्वारा नक़्ल की गई हदीसों को क़ुबूल न करने की कोई वजह नहीं है। (मोजमो रेजालिल हदीस, जिल्द 4, पेज 324) शैख़ तूसी र.ह. ने इनका नाम इमाम अली नक़ी अ.स. के वकीलों में ज़िक्र किया है। (अल-ग़ैबत, पेज 212) मोहम्मद इब्ने फ़रज का बयान है कि मैंने इमाम अली नक़ी अ.स. से ख़त के द्वारा इब्ने राशिद के बारे में सवाल किया तो इमाम अ.स. ने जवाब में लिखा, अल्लाह उस पर रहमत नाज़िल करे उन्होने सईद बन कर ज़िंदगी गुज़ारी और शहीद हो कर इस दुनिया से गया। (रेजाले कश्शी, जिल्द 6)
हसन इब्ने अली र.ह. शैख़ तूसी र.ह. ने इन्हें इमाम अली नक़ी अ.स. के असहाब में से बताया है, यह सय्यद मुर्तज़ा र.ह. और सय्यद रज़ी र.ह. की वालिदा के अजदाद में से थे, सय्यद मुर्तज़ा र.ह. इनके बारे में लिखते हैं कि इल्म और तक़वा में हसन इब्ने अली का मर्तबा चमकते हुए सूरज से ज़्यादा रौशन है और यही थे जिन्होंने इस्लाम को दैलम में फैलाया और इन्हीं की वजह से वहां के लोग गुमराही से बच कर हिदायत के रास्ते पर आए, उनके अख़लाक़ और नेक आदतों को कोई बयान नहीं कर सकता।
अब्दुल अज़ीम हसनी र.ह. यह इमाम हसन अ.स. की नस्ल से थे, और शैख़ तूसी र.ह. के अनुसार यह इमाम अली नक़ी अ.स. और इमाम हसन असकरी अ.स. के असहाब और शागिर्दों में से थे, हालांकि कुछ रिवायतों में आपको इमाम मोहम्मद तक़ी अ.स. और इमाम अली नक़ी अ.स. के शागिर्दों में से बताया गया है, आप एक मुत्तक़ी और बड़े फ़क़ीह थे और इमाम अली अ.स. के भरोसेमंद थे।
अबू हम्माद राज़ी का बयान है कि मैं इमाम अली नक़ी अ.स. से मिलने सामरा गया, मैंने इमाम अ.स. से कुछ शरई मसलों के जवाब पूछे, इमाम अ.स. ने जवाब दिए, जब मैं वहां से चलने लगा तो इमाम अ.स. ने कहा ऐ हम्माद जब भी किसी शरई मसले का जवाब पूछना हो या दीनी मामले में किसी मुश्किल में फंस जाओ तो वहीं पर अब्दुल अज़ीम हसनी नाम से एक मुत्तक़ी और फ़क़ीह हैं उनसे पूछ लिया करो, और मेरा सलाम उन तक पहुंचा देना।
उस्मान इब्ने सईद र.ह. इनको केवल 11 साल की उम्र में इमाम अली नक़ी अ.स. की शागिर्दी का शरफ़ हासिल हुआ और बहुत ही कम समय में इन्होंने इल्म तक़वा और फ़िक़्ही सूझ बूझ में वह मर्तबा हासिल कर लिया कि इमाम अ.स. इनको अपना भरोसेमंद शागिर्द बताते थे।
अहमद इब्ने इसहाक़ क़ुम्मी बयान करते हैं कि इमाम अली नक़ी अ.स. की ख़िदमत में हाज़िर हुआ और उनसे कहा मौला मेरा काम कुछ ऐसा है कि कभी अपने शहर में रहता हूं कभी शहर से बाहर, और कभी शहर में होते हुए भी आपसे मिलना संभव नहीं हो पाता ऐसे मौक़े पर मुझे अगर किसी मसले के बारे में पूछना हो तो किस से पूछूं? इमाम अ.स. ने फ़रमाया अबू अम्र उस्मान इब्ने सईद एक अमानतदार इंसान और हमारे भरोसेमंद हैं, वह कुछ भी बताए समझ लो मैंने ही बताया है, मेरे नाम से कुछ भी बताए उसे क़ुबूल करो और उस पर अमल करो।
अली इब्ने जाफ़र हुमानी र.ह. यह भी एक भरोसेमंद शागिर्द थे और इमाम अली नक़ी अ.स. और इमाम हसन असकरी अ.स. दोनों के वकील थे और इनके किरदार से दोनों इमाम अ.स. राज़ी थे। इमाम हसन असकरी अ.स. आप पर इतना ज़्यादा भरोसा करते थे कि इन्हें रूक़ूमे शरई भी ख़र्च करने के लिए देते थे।
हुसैन इब्ने सईद अहवाज़ी र.ह. इनको मुफ़स्सिर और मोहद्दिस के रूप में जाना जाता है, इन्हें तीन इमामों इमाम रज़ा अ.स., इमाम मोहम्मद तक़ी अ.स. और अली नक़ी अ.स. की शागिर्दी हासिल हुई। इनकी ज़िंदगी और कैसे इमामों से इल्म हासिल किया इस बारे में इतिहास में अधिक जानकारी नहीं पाई जाती लेकिन इतना साफ़ है कि आप एक इल्मी घराने से संबंध रखते थे और इनकी नस्ल इमाम सज्जाद अ.स. के भरोसेमंद शागिर्द से चली और इनके भाई हुसैन इब्ने सईद अहवाज़ी भी भरोसेमंद शिया रावियों में से थे और यही अली इब्ने महज़ियार और इसहाक़ इब्ने इब्राहीम को इमाम रज़ा अ.स. के पास इल्म हासिल करने के लिए ले गए थे।
इब्राहीम इब्ने दाऊद हाशमी याक़ूबी र.ह. यह इमाम मोहम्मद तक़ी अ.स. और इमाम अली नक़ी अ.स. के शागिर्दों में से थे, यह एक इल्मी घराने में पैदा हुए थे और कूफ़ा और सामरा में आपने इल्म हासिल किया और वहीं ज़िंदगी गुज़ारी, इनके बेटे ने भी हदीस के नक़्ल करने वालों में से हैं और उन्होंने अपने वालिद से बहुत सारी हदीसें नक़्ल की हैं। यह उन लोगों में शामिल हैं जो इमाम अली नक़ी अ.स. से ख़त के द्वारा लोगों की मुश्किलों और शरई सवालों का जवाब हासिल करते थे और कभी कभी ज़रूरत पड़ने पर सीधे इमाम अ.स. ले मुलाक़ात भी करते थे।
इब्राहीम इब्ने अब्दुह नेशापूरी र.ह.
यह भी शियों के भरोसेमंद मोहद्दिस थे और इमाम अली नक़ी अ.स. के शागिर्दों में से थे और इनको इमाम हसन असकरी अ.स. ने नेशापूर में अपना वकील भी बनाया था, इनके ख़ादिम के अनुसार सफ़ा की पहाड़ी पर इमाम ज़माना अ.स. से इनकी मुलाक़ात भी हुई थी। इमाम अली नक़ी अ.स. द्वारा लिखे गए ख़तों में इनकी तारीफ़ के साथ साथ इनके दौर के दूसरे लोगों को इनकी अहमियत समझने पर भी ज़ोर दिया गया है, यहां तक कि अब्दुल्लाह इब्ने हमदूया बीहक़ी को लिखे गए एक ख़त में इमाम अ.स. ने लिखा कि मैंने इब्राहीम को लोगों से ख़ुम्स की रक़म वसूलने का हुक्म दिया है वह मेरा भरोसेमंद और अमानतदार है।
इब्राहीम इब्ने मोहम्मद हमदानी र.ह. यह भी भरोसेमंद हदीस नक़्ल करने वालों में से थे और इन्हें भी इमाम अली नक़ी अ.स. और इमाम हसन असकरी अ.स. की शागिर्दी का शरफ़ हासिल था, और केवल यही नहीं बल्कि इनको इमाम ज़माना अ.स. ने भी अपना वकील बनाया था और इनके बाद यही वकालत इनके बेटे को मिली थी, ...................


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