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Date of publication : 16/3/2018 20:36
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अल्लाह संकट और कठिनाईयों को क्यों भेजता है?

अमीरुल मोमेनीन अ.स. फ़रमाते हैं कि, गुनाहों से दूरी रखो, क्योंकि खरोच और चलते हुए ठोकर लगने जैसे संकट, कठिनाईयों, कष्टों और मुसीबतों का कारण यही गुनाह होते हैं।


विलायत पोर्टल :  यह बात हमें समझ लेना चाहिए कि अल्लाह हिकमत, अद्ल और इंसाफ़ वाला है, और उसका हर काम हिकमत और अद्ल के अनुसार होता है, यह और बात है कि हम अपनी समझ के सीमित होने के कारण उन्हें समझ न सकें। यह बात भी ध्यान में रहना चाहिए कि बहुत सारे संकट, कठिनाईयाँ और मुसीबतों का कारण इंसान ख़ुद होता है, और इंसान की बहुत सारी असफ़लता का कारण ख़ुद उसका आलस और मेहनत से दूर भागना होता है, और बहुत सारी आध्यात्मिक बीमारियों का कारण लालच और ख़्वाहिशात की पैरवी होती है, और समय का व्यर्थ करना बहुत सारे दुखों का कारण और आपसी लड़ाई झगड़ा हमेशा कष्ट पहुँचाने का कारण बनता है। इन सब के अलावा बहुत सारे संकट और मुसीबत का कारण इंसान द्वारा किए गए गुनाह की इस दुनिया में मिलने वाली सज़ा होता है। अमीरुल मोमेनीन अ.स. फ़रमाते हैं कि, गुनाहों से दूरी रखो, क्योंकि खरोच और चलते हुए ठोकर लगने जैसे संकट, कठिनाईयों, कष्टों और मुसीबतों का कारण यही गुनाह होते हैं। (बिहारुल अनवार, जिल्द 83, पेज 350) अल्लाह ने भी क़ुर्आन में फ़रमाया कि, हर तरह की मुसीबत और कष्टों का कारण तुम्हारे आमाल हैं। (सूरए निसा, आयत 79) अल्लाह की ओर से आने वाली कठिनाईयों के कुछ इस प्रकार जवाब दिये गए हैं.....
1. अल्लाह की ओर से इम्तेहान के कारण
2. उपेक्षा को दूर और जागरूकता को बढ़ावा देने के कारण
3. अल्लाह के निकट पहुँचने और उसके बारे में सच्चा ज्ञान प्राप्त करने के लिए
4. आमाल की सज़ा के कारण
5. गुनाहों से पाक करने के कारण
6. मोमिन के हित के कारण
7. इरादों की मज़बूती के कारण इन कारणों से अल्लाह बंदों के सामने मुसीबत और कठिनाईयों को लाता है। (मारिफ़े इस्लामी(1), पेज 150-188)
 इस्लामी फ़िलॉसफ़ी में भी इसके कुछ जवाब इस प्रकार दिए गए हैं.....
1. हो सकता है कि यह केवल हमारी नज़र में कठिनाई और संकट हो लेकिन हक़ीक़त में उसमें हमारी भलाई छुपी हो।
2. यह कठिनाईयाँ और मुसीबतें हमारे कारण हैं, क्योंकि अल्लाह ने क़ुर्आन में फ़रमाया है कि, अल्लाह से ख़ैर जारी होता है। यानी शर और बुराई को अल्लाह के बारे में सोचा ही नहीं जा सकता।
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