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Date of publication : 15/3/2018 7:25
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अवैध ज़ायोनी राष्ट्र - सीरिया,मिस्र युद्ध ।

दोनों देशों ने तेज़ी से सैन्य कार्रवाई करते हुए दुश्मन के हौसले पस्त कर दिए, मिस्र सेना ने सिर्फ 18 घंटे में ही अवैध राष्ट्र के घमंड को तोड़ते हुए बारलू लाइन को पार कर दिखाया और सिर्फ 40 घंटे में ही बिना अधिक नुकसान उठाये स्वेज़ नहर को पूर्ण रूप से अपने नियंत्रण में ले लिया । मिस्र ने रणनीति बनाई थी कि पहले स्वेज़ नहर और बारलू लाइन को अपने अधीन लेना है उसके बाद सीना को वापस लेने का अभियान शुरू किया जायेगा लेकिन अनवर सादात जीत के नशे में चूर था उसने अपने सेनानायकों की चेतावनियों और मुख़ालेफ़त की अनदेखी करते हुए फ़ौज की तैयारी न होनेके बाद भी सीना को वापस पाने के लिए सेना को आगे बढ़ने पर विवश कर दिया ।

विलायत पोर्टल :  अक्टूबर युद्ध 1973 में फिलिस्तीन में कई अहम् घटनाएं हुई इस साल तक पॉपुलर फ्रंट फॉर दि लिबरेशन ऑफ़ फिलिस्तीन ने अपनी छापामार गतिविधियों को फिलिस्तीन से बाहर भी विस्तार दे दिया था । फिलिस्तीनी दिलेरों ने अललद एयरपोर्ट पर गोरिल्ला हमला कर 31 ज़ायोनियों को मौत के घाट उतारते हुए 80 अन्य को घायल कर दिया ।
अप्रैल 1973 में अवैध राष्ट्र इस्राईल ने इस हमले का बदला लेने के लिए एक हथियारबंद ग्रुप को बैरुत के समुद्र तट पर उतारा और इस हत्यारे टोले ने फतह मूवमेंट के ठिकाने पर हमला कर इस संगठन के 3 उच्चाधिकारियों की हत्या कर दी । मिस्र में जमाल अब्दुल नासिर के उत्तरधिकारी अनवर सादात इस समय मिस्र के सीना को आज़ाद करने की मुहिम छेड़ने की तैयारियां कर रहे थे अवैध राष्ट्र को फिलिस्तीनी छापामारों के साथ उलझा देख कर उन्होंने सीरिया के साथ मिलकर सीना और जौलान हाइट्स समेत ग़ज़्ज़ा को ज़ायोनी कब्ज़े से मुक्त कराने के लिए समझौता किया अनवर सादात ने अपनी योजना में लेबनान और जॉर्डन को शामिल नहीं किया । सामरिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण जौलान हाइट्स पर अवैध राष्ट्र का कब्ज़ा सीरिया के लिए बहुत चिंता जनक था और अवैध राष्ट्र के कब्ज़े के बाद यह क्षेत्र एक अभेद किले के रूप मे बदल गया था , इस्राईल को यक़ीन था कि सीरिया अब इस क्षेत्र में घुसपैठ नहीं कर सकता ।
दूसरी ओर इस्राईल ने स्वेज़ नहर के बाद 20 मीटर चौड़ी बारलू लाइन बिछाई जिसमे सदैव ज्वलनशील पदार्थ भरे रहते और उसी क्षेत्र में 25 ख़ुफ़िया बंकर भी थे जिस के बारे में उसका दावा था कि इस क्षेत्र से पार पाने के लिए मिस्र को अमेरिका या रूसी सेना की इंजीनियरिंग यूनिट की सेवा लेना होगी । सीरिया एयरफोर्स और ज़ायोनी सेना के बीच हुई पहली झड़प में ही सीरिया के 13 विमान सागर में ही नष्ट हो गए जिसके बाद सीरिया ने मिस्र से आग्रह किया कि वह निर्धारित समय से पहले ही अवैध राष्ट्र के विरुद्ध संघर्ष छेड़ दे ।
यह जंग अक्टूबर के अंतिम दिनों में होना थी लेकिन सीरिया का ज़ोर था कि यह जंग निर्धारित समाय से पहले ही शुरू हो जाना चाहिए, अंत में मिस्र और सीरिया ने 6 अक्टूबर को इस्राईल के खिलाफ जंग छेड़ने पर सहमति जता दी यह जंग 10 रमज़ान को शुरू हुई इसलिए इस युद्ध का रमज़ान युद्ध या अक्टूबर युद्ध भी कहा जाता है । मिस्र और सीरिया ने अवैध राष्ट्र पर गोरिल्ला हमला बोल अवैध राष्ट्र के होश उड़ा दिए उस दिन ज़ायोनी सेना अपने पवित्र दिनों की छुट्टियां मनाते हुए कैपूर नामक त्यौहार की छुट्टी मना रही थी ।
दोनों देशों ने तेज़ी से सैन्य कार्रवाई करते हुए दुश्मन के हौसले पस्त कर दिए, मिस्र सेना ने सिर्फ 18 घंटे में ही अवैध राष्ट्र के घमंड को तोड़ते हुए बारलू लाइन को पार कर दिखाया और सिर्फ 40 घंटे में ही बिना अधिक नुकसान उठाये स्वेज़ नहर को पूर्ण रूप से अपने नियंत्रण में ले लिया ।
मिस्र ने रणनीति बनाई थी कि पहले स्वेज़ नहर और बारलू लाइन को अपने अधीन लेना है उसके बाद सीना को वापस लेने का अभियान शुरू किया जायेगा लेकिन अनवर सादात जीत के नशे में चूर था उसने अपने सेनानायकों की चेतावनियों और मुख़ालेफ़त की अनदेखी करते हुए फ़ौज की तैयारी न होने के बाद भी सीना को वापस पाने के लिए सेना को आगे बढ़ने पर विवश कर दिया । इस्राईल ने मिस्री सेना के लिए मैदान बिल्कुल खुला छोड़ दिया फिर मिस्र की सेना पर पलटवार करते हुए एक ही हवाई हमले में मिस्र के लगभग 250 टैंकों को तबाह कर दिया । युद्ध के दूसरे मोर्चे पर सीरियन सेना ने अवैध राष्ट्र को चौंकाते हुए जौलान हाइट्स में घुसपैठ करते हुए मुर्ताफा अल शैख़ चोटी पर मौजूद इस्राईल के सैन्य अड्डों को ध्वस्त कर दिया ।
इस्राईल की खडराब हालत देख युद्ध के बीच में ही अमेरिका इस्राईल को एयर संचार की सारी सुविधा देते हुए उसकी सैन्य सहायता को आ पहुंचा, इस्राईल ने अमेरिका की सहायत से स्वेज़ नहर पर पल बनाकर इस मोर्चे में सेंध लगाने में सफलता पा ली तथा इस क्षेत्र में मिस्र की वायु सेना को भी अपनी थल सेना को ज़रूरी सहायता पहुँचाने से रोक दिया जिस कारण मिस्र की वायु सीमा इस्राईल के युद्धक विमानों के लिए आज़ाद हो गई और मिस्र की सेना का तीसरा भाग भी सीना के रेगिस्तानों में दुश्मन सेना की नाकाबंदी में घिर चुका था । 1973 के युद्ध ने इस्राईल के अपराजय होने दावों की धज्जियां उड़ा दी और यह बात अरब देशों के लिए भी साबित हो गई कि अवैध राष्ट्र अपराजय नहीं है । इस युद्ध में अरब सेना को मिली शुरूआती जीत ने अरब सैनिकों का हौसला बढ़ाया तथा उन्हें ज़ायोनी सैनिकों का मुक़ाबला करने के लिए उत्साहित किया , जबकि उस से पहले 1967 की 6 दिवसीय जंग ने अरब सैनिकों के हौसलों को पस्त कर दिया था ।
जारी है.....
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