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Date of publication : 15/3/2018 6:8
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वीरता और साहस का नया अध्याय लिखते 3 साल से आतंकी संगठनों की नाकाबंदी मे घिरे फ़ौआ और कफरिया के नागरिक ।

सीरिया के पूर्वी गोता को आतंकवादियों का आखिरी ठिकाना कहा जाता है, खबरों के मुताबिक इस क्षेत्र में अरब और पश्चिमी देशों की खुफिया एजेंट भी हैं, पूरी दुनिया में पश्चिमी देशों ने पूर्वी गोता के लिए हंगामा मचा रखा है, न जाने कैसे- कैसे और न जाने कहां- कहां से फोटो और वीडियो क्लिप लाकर गोता के ” आम नागरिक” पर आंसू बहाए जा रहे हैं मगर कहीं पर भी ” कफरिया व फौआ” के लोगों की बात नहीं की जाती, शायद इस लिए क्योंकि उनके बीच आतंकवादी और पश्चिमी खुफिया एजेंट नहीं बल्कि वह आतंकवादियों की नाकाबंदी मे घिरे आम नागरिक हैं।

विलायत पोर्टल :  उत्तरी सीरिया में इदलिब के निकट शिया मुसलमानों की ” कफरिया व फौआ” नाम की एक बस्ती है। इस बस्ती के लोगों ने संघर्ष की ऐसी मिसाल पेश की है जिसके बारे मे जान कर हर इंसान दांतों तले उंगली दबा लेता है। आतंकवादियों की नाकाबंदी मे घिरे इस बस्ती के लोगों का जीवन, सीरिया के अन्य क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की तरह बिल्कुल नहीं है ।
आतंकवादियों ने शिया बहुल ” कफरिया व फौआ” को लगभग तीन वर्षों से घेर रखा है, बस्ती वाले, आतंकवादियों को, बस्ती में घुसने नहीं दे रहे हैं और आतंकवादी, बस्ती से किसी को कहीं जाने नहीं दे रहे हैं। इस खींच तान में तीन साल का समय बीत गया लेकिन इस दौरान बस्ती के लोगों ने जिंदा रहने के नये नये तरीक़े खोज लिए हैं इस बस्ती की महिलाएं तरह तरह की चीज़ों को पीस कर उनका आटा बनाती हैं और उससे रोटियां पकाती हैं।
तेल व गैस की दौलत से समृद्ध सीरिया में दूसरे इलाक़ों के लोग गैस के चूल्हों पर खाना पकाते हैं लेकिन ” कफरिया व फौआ” के लोग, लकड़ी जला कर खाना तैयार करते हैं और यही उनका ईंधन है क्योंकि तीन वर्षों से जारी घेराबंदी की वजह से ईंधन के नाम पर बस यही चीज़ वहां बची है। इस बस्ती में टैक्सी नाम की कोई चीज़ नहीं, कार भी नहीं चल सकती क्योंकि कार, लकड़ी से तो नहीं चल सकती और तेल है नहीं इस लिए लोग, ठेलों से सामान इधर उधर ले जाते हैं और खुद भी इसी की सहायता से आसपास का सफर करते हैं, इतनी कठिनाइयों के बावजूद इस इलाक़े के लोगों का संकल्प ज़रा सा भी प्रभावित नहीं हुआ और पूर्वी इदलिब में सीरियाई सेना की कार्यवाहियों से उनके मन में आशा की जोत जागी है उत्तरी सीरिया के इदलिब नगर के निकट स्थित कफरिया और फ़ौआ शिया बहुल क्षेत्र हैं इस क्षेत्र के लोगों ने वहाबी आतंकी संगठनों के विरुद्ध संघर्ष की वह अनूठी मिसाल पेश की है जिसे सुनकर इंसान दांतो तले ऊँगली दबा ले तथा उनके सहस को सलाम करने लगे । पिछले तीन साल से वहाबी आतंकी संगठनों की नाकाबंदी में जी रहे इस क्षेत्र के लोगों ने साहस और वीरता का नया अध्याय लिख दिया है जब जब वह सीरियाई सेना की तोपों की गरज सुनते हैं, खुशी से झूम उठते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि सेना, कफरिया व फौआ” की ओर बढ़ रही है और जल्द ही उन्हें आतंकवादियों की घेराबंदी से छुटकारा मिल जाएगा, सीरिया के पूर्वी गोता को आतंकवादियों का आखिरी ठिकाना कहा जाता है, खबरों के मुताबिक इस क्षेत्र में अरब और पश्चिमी देशों की खुफिया एजेंट भी हैं, पूरी दुनिया में पश्चिमी देशों ने पूर्वी गोता के लिए हंगामा मचा रखा है, न जाने कैसे- कैसे और न जाने कहां- कहां से फोटो और वीडियो क्लिप लाकर गोता के ” आम नागरिक” पर आंसू बहाए जा रहे हैं मगर कहीं पर भी ” कफरिया व फौआ” के लोगों की बात नहीं की जाती, शायद इस लिए क्योंकि उनके बीच आतंकवादी और पश्चिमी खुफिया एजेंट नहीं बल्कि वह आतंकवादियों की नाकाबंदी मे घिरे आम नागरिक हैं।
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