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Code : 192636
Date of publication : 15/3/2018 5:1
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असेंबली मिंबर की अजीब सोंच

उसने मेरी बातों का बहुत ही नाक भौं चढ़ा कर अजीब तरह से जवाब दिया, वह कहता है कि, यह तुम क्या कह रहे हो, और किस बात पर विरोध जता रहे हो, आज यूरोप नौकर की तरह हमारे लिए काम कर रहा है, हमारे पास तेल है पैसा है, हम उनको पैसा देते हैं और वह नौकर की तरह हमारे लिए काम करते हैं, यह उस समय के असेंबली मिंबर की सोच थी, वह दौर पतन का दौर था, ऐसी सोच थी कि क्यों हम ख़ुद निर्यात करें, क्यों हम ख़ुद सामान बनाएं, क्यों हम सभी ज़रूरी चीज़े सीखें,
विलायत पोर्टल :  1965 या 1966 में मशहद में अपने एक दोस्त से मिलने गया हुआ था, अचानक देखा वहां क़ौमी असेंबली का एक मिंबर भी मौजूद हैं, हमारी जवानी के दिन थे हम ने दोस्त के साथ कुछ ख़ुफिया एजेंटों और ईरानी जनता के साथ उनके ग़लत रवैये के बारे में खुल कर बात की, जबकि हम नहीं जानते थे कि वह क़ौमी असेंबली का सदस्य है, (उस समय असेंबली मिंबर के लिए चुनाव नहीं होता था बल्कि असेंबली वही जाता था जिसका हुक्म शाह की ओर से आता था), उसने मेरी बातों का बहुत ही नाक भौं चढ़ा कर अजीब तरह से जवाब दिया, वह कहता है कि, यह तुम क्या कह रहे हो, और किस बात पर विरोध जता रहे हो, आज यूरोप नौकर की तरह हमारे लिए काम कर रहा है, हमारे पास तेल है पैसा है, हम उनको पैसा देते हैं और वह नौकर की तरह हमारे लिए काम करते हैं, यह उस समय के असेंबली मिंबर की सोच थी, वह दौर पतन का दौर था, ऐसी सोच थी कि क्यों हम ख़ुद निर्यात करें, क्यों हम ख़ुद सामान बनाएं, क्यों हम सभी ज़रूरी चीज़े सीखें, हम अपने घरों में मालिक बने बैठे रहें और वह सब आकर हमारी ज़रूरत का सामान बना कर हम तक पहुंचाएं, हम तेल का पैसा भी उनको दे रहे हैं और शान की ज़िंदगी जी रहे हैं, यह सोच उस समय की हुकूमत के एक उच्च स्तर के अधिकारी की थी।
(23 फ़रवरी 2005 में तकनीक और औधोगिक के उच्च स्तर के इंजीनियरों के बीच आयतुल्लाह ख़ामेनई का बयान)
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