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Date of publication : 14/3/2018 18:14
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मुत्तक़ीन के सिफ़ात इमाम अली अ.स. की निगाह में

उनका ईमान यक़ीनी होता है, इमाम अली अ.स. फ़रमाते हैं कि तुम में से केवल वही ईमान का मज़ा चख सकता है जिसको इस बात का यक़ीन हो कि अल्लाह उसके साथ जो भी करेगा वह ग़लत नहीं होगा और जो ग़लत है वह उसके साथ नहीं होगा।

विलायत पोर्टल :  हम्माम एक बहुत मुत्तक़ी और परहेज़गार इंसान थे, एक दिन इमाम अली अ.स. के पास आए और इमाम अ.स. से मुत्तक़ी लोगों के सिफ़ात और विशेषताएं इस तरह बताने को कहा कि जैसे उन्हें देख रहे हों, इमाम अ.स. ने थोड़ी देर सोचने के बाद सूरए नहल की आयत नं 128 की तिलावत की और कहा ऐ हम्माम केवल ख़ुदा के लिए तक़वा अपनाओ क्योंकि अल्लाह मुत्तक़ी और नेक लोगों को पसंद करता है, इमाम अ.स. ने केवल इतना ही कहा लेकिन हम्माम ने आग्रह किया कि मौला कुछ और बताइए, फिर इमाम अ.स. ने मुत्तक़ीन के कुछ इस तरह सिफ़ात बताए.... (नहजुल बलाग़ा, ख़ुत्बा 193, कुछ एडीशन में 184)
1. वह हमेशा नर्म और मीठे बोल बोलते हैं।
2. वह हमेशा साधारण कपड़े पहनते हैं।
3. रास्ता चलते हुए अकड़ नहीं दिखाते हैं।
4. ना महरम को नहीं देखते हैं।
5. उनके कान केवल काम की बातों को सुनते हैं, यानी वह ऐसी जगह बैठते ही नहीं जहां किसी तरह का कोई फ़ायदा उनको न पहुंचे।
6. दिन ख़राब हों या अच्छे वह हमेशा एक जैसे रहते हों, यानी न नेमत मिलने पर अकड़ते हैं न छिन जाने पर शिकायत करते हैं।
7. हमेशा अल्लाह से मुलाक़ात के लिए उत्सुक रहते हैं।
8. वह केवल अल्लाह को बड़ा समझते हैं और उसके अलावा हर किसी को छोटा।
9. उनका यक़ीन बहुत मज़बूत होता है, उनके यक़ीन की मिसाल ऐसी है कि जैसे जन्नत का ज़िक्र आए तो वह उसे देख रहे होते और उस जन्नत में वहां की नेमतों से लाभ उठा रहा होते हैं और इसी तरह जैसे जहन्नम का ज़िक्र आए तो वह उसे देख रहे होते और वहां के अज़ाब में ख़ुद को गिरफ़्तार पाते हैं।
10. उनके दिल हमेशा दुखी रहते हैं, जैसाकि इमाम अली अ.स. की एक हदीस भी है कि मोमिन का चेहरा हमेशा खिला हुआ और दिल हमेशा दुखी होता है।
11. लोग उनकी शरारत से हमेशा बचे रहते हैं, यानी वह किसी को किसी भी तरह का नुक़सान नहीं पहुंचाते।
12. उनके बदन अल्लाह की याद और तक़वा की वजह से कमज़ोर होते हैं।
13. फ़ुज़ूल ख़र्ची नहीं करते।
14. उनकी रूह पाकीज़ा होती है।
15. इस दुनिया की कुछ सालों की परेशानियों और कठिनाइयों को हंसी ख़ुशी झेल लेते हैं और उसके बदले में उन्हें हमेशा का सुख और आराम मिलता है।
16. दुनिया की चकाचौंध में घिरे हुए नहीं हैं, दुनिया उनके सामने बन ठन के आती ज़रूर है लेकिन उनको अपनी ओर आकर्षित नहीं कर पाती, वह हमेशा ख़ुद को दुनिया के धोखे से बचाए रखते हैं।
17. वह पूरी पूरी रात खड़े हो कर अल्लाह की इबादत और क़ुर्आन की तिलावत में गुज़ारते हैं।
18. वह अपने दर्द का इलाज क़ुर्आन में तलाश करते हैं।
19. वह क़ुर्आन से बातें करते हैं, यानी वह जब भी क़ुर्आन की तिलावत करते और कोई ऐसी आयत आती जिसमें अल्लाह ने किसी नेक अमल को अंजाम देने को कहा हो तुरंत उस पर अमल करते हैं।
20. वह अल्लाह के लिए इतने रुकूअ और सजदे करते हैं कि अपनी उसी सिफ़त से पहचाने जाते हैं।
21. हमेशा अल्लाह से उसके अज़ाब से बचे रहने की दुआ करते हैं।
22. दिन में विनम्र आलिम की तरह ज़िंदगी गुज़ारते हैं।
23. मुत्तक़ी लोग हमेशा नेकियों के पीछे रहते हैं, यानी वह केवल नेक काम ही अंजाम देते हैं।
24. अल्लाह के अज़ाब के ख़ौफ़ की वजह से उनके बदन कमज़ोर होते हैं।
25. वह दिखने में ऐसे होते हैं कि उन्हें देखने वाला मरीज़ और पागल समझता है जबकि न उन्हें किसी तरह की कोई बीमारी होती है और न ही वह पागल होते हैं बल्कि मौत और जहन्नम के अज़ाब के ख़्याल ने उनकी यह हालत बना रखी है।
26. वह अपने कम आमाल से कभी संतुष्ट नहीं होते और ज़्यादा आमाल को कभी ज़्यादा नहीं समझते, वह हमेशा यही कहते कि हम अपने आमाल की वजह से डरे हुए हैं।
27. लोगों की तारीफ़ों से घबराते हैं, जब भी उनकी कोई तारीफ़ करता तो वह कहते हम अपने बारे में बेहतर जानते हैं और अल्लाह हमारे बारे में हम से भी बेहतर जानता है, और फिर वह अल्लाह से दुआ करते हैं कि ख़ुदाया लोगों की तारीफ़ों के सिलसिले में हम से सवाल जवाब मत करना, और यह लोग मेरी जो बुराईयां नहीं जानते हैं उनको माफ़ कर दे।
28. दीनी मामलों में बहुत गंभीर होते हैं, यानी दीनी अहकाम, अक़ाएद और दूसरे दीन के बुनियादी मामलों में किसी तरह की नर्मी और सुस्ती नहीं दिखाते हैं।
29. उनका रवैया बहुत नर्म होता है और उनमें दूरदर्शिता पाई जाती है।
30. उनका ईमान यक़ीनी होता है, इमाम अली अ.स. फ़रमाते हैं कि तुम में से केवल वही ईमान का मज़ा चख सकता है जिसको इस बात का यक़ीन हो कि अल्लाह उसके साथ जो भी करेगा वह ग़लत नहीं होगा और जो ग़लत है वह उसके साथ नहीं होगा।
31. वह हमेशा इल्म हासिल करने के लिए उत्सुक रहते हैं।
32. उनके पास इल्म के साथ साथ विनम्रता भी पाई जाती है।
33. वह फ़ुज़ूल ख़र्ची नहीं करते हैं, उनके पास ज़्यादा पैसे हों या कम वह हमेशा एक जैसा रवैया रखते हैं।
34. वह पूरी विनम्रता के साथ अल्लाह की इबादत करते हैं। पैग़म्बर स.अ. से नमाज़ में विनम्रता के बारे में पूछा गया तो आपने फ़रमाया कि नमाज़ पढ़ते समय इंसान का पूरा ध्यान अल्लाह की ओर रहे।
35. वह ग़रीब और फ़क़ीर होते हुए भी साफ़ सुथरे और बन ठन कर रहते हैं।
36. मुसीबत और परेशानियों के समय सब्र और धीरज से काम लेते हैं।
37. हमेशा हलाल रोज़ी कमाने के पीछे रहते हैं।
38. वह हक़ के रास्ते में कभी संकोच नहीं करते बल्कि पूरी तरह ख़ुश रहते हैं।
39. उनमें लालच नहीं पाई जाती वह हमेशा लालच से दूर रहते हैं।
40. अपने नेक आमाल के बावजूद अल्लाह के अज़ाब से डरे हुए रहते हैं।
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