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Code : 192592
Date of publication : 13/3/2018 7:38
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आईएसआईएस के गठन में सऊदी अरब की भूमिका से अमेरिकी राजनयिक ने पर्दा उठाया

मेरा मानना है कि ईरान का हित अलकायदा और दाइश से मुकाबला करने में है, और स्पष्ट है कि ईरान का यह कार्य हर उस देश के लिए सहायक है जो आतंकवाद का खतरा झेल रहे हैं।


विलायत पोर्टल : प्राप्त जानकारी के अनुसार मिडिल ईस्ट समेत दुनिया के कई देशों में आतंकवाद का घिनौना खेल खेलकर मानवता को शर्मसार करने वाले वहाबी आतंकी संगठन आईएसआईएस अर्थात दाइश के गठन में अमेरिका समेत सऊदी अरब और उसके सहयोगी देशों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है तथा यह देश दाइश को सैन्य सहयोग से लेकर आर्थिक स्तर पर भी बहुत सहयोग करते रहे हैं ।
नाटो में अमेरिका के पूर्व दूत रॉबर्ट हंटर ने कहा है कि दाइश के गठन में सऊदी अरब ने महत्वपूर्ण किरदार निभाया है वहीँ रॉबर्ट के अनुसार इराक़ और सीरिया में दाइश को हराने और कट्टरपंथ को रोकने में ईरान ने अहम भूमिका निभाई है , राबर्ट हंटर के अनुसार आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई का फैसला ईरान के राष्ट्रीय हितों के तहत लिया जाता है, मेरा मानना है कि ईरान का हित अलकायदा और दाइश से मुकाबला करने में है, और स्पष्ट है कि ईरान का यह कार्य हर उस देश के लिए सहायक है जो आतंकवाद का खतरा झेल रहे हैं। उन्होंने आगे कहाः हमें आतंकवादी संगठनों के विरुद्ध ईरान की गतिविधियों को स्वागत करना चाहिए, इसमें कोई संदेह नही है कि ईरान क्षेत्र में आतंकवाद के विरुद्ध लड़ रहा है, और इसका स्वागत किया जाना चाहिए। हंटर ने इस प्रश्न के उत्तर में कि आखिर क्यों व्हाइट हाउस आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई में ईरान की भूमिका का इंकार करता है कहा कि यहां के अधिकारियों की नकारात्म सोंच को ईरान की यमन में भूमिका, बश्शार असद का समर्थन, हिज़्बुल्लाह और हमास की सहायता और बैलिस्टिक मिसाइलों से जोड़कर देखना होगा ।
उन्होंने कहा कि इस लिस्ट में, इस्राईल विरोधी विचारधारा को भी बढ़ा लीजिए, इस मुद्दे ने अमेरिका और कुछ दूसरे देशों द्वारा ईरान को किसी भी प्रकार की ढील दिए जाने को असंभव बना दिया है। नाटो में अमेरिकी राजदूत हंटर ने सऊदी अरब द्वारा अतिवाद और दाइश को वैचारिक, वित्तीय और सैन्य सहायता दिए जाने के बावजूद रियाज़ की नीतियों को अमेरिकी समर्थन पर कहा कि मैंने हमेशा स्पष्ट शब्दों में यमन में सऊदी अरब की भूमिका और इस देश द्वारा अतिवाद के समर्थन की निंदा की है, इन नीतियों ने पिछले कुछ वर्षों में दाइश को जन्म दिया है, और मैंने इसको स्पष्ट शब्दों में बयान किया है। हंटर ने कहा कि सऊदियों ने अमेरिका को कभी भी बड़ा शैतान नहीं कहा है, हालांकि उनके इस्राईल के साथ कोई आधिकारिक संबंध नहीं हैं, लेकिन वह इस्राईल को समाप्त करने की बात नहीं करते हैं, और हाल के सामय में सऊदी के अय्याश युवराज ने इस्राईल के साथ रिश्ते जोड़ने की बात कही है।
उन्होंने इस प्रश्न के उत्तर में कि अगर ईरान आतकंवाद के विरुद्ध लड़ाई में नहीं उतरता तो दमिश्क कट्टरपंथी बलों के हाथों में आ जाता, और यह क्षेत्र के सभी देशों के लिए खतरा होता, कहा मैं इस बारे मे कोई टिप्पणी नहीं करूँगा। हंटर ने कहा कि मैं इस बात पर ज़रूर ज़ोर दूँगा कि सीरिया के भयानक संकट से बाहर निकलने के लिए सीरियन समाज के सभी हिस्सों जिसमें अलवी भी शामिल हैं के बीच सुरक्षा और विश्वास पैदा करना ज़रूरी है।
हंटर ने कहा कि अगर केवल यह कहा जाए कि असद को सत्ता से जाना होगा, इसका अर्थ यह है कि सीरिया सऊदी अरब जैसे देशों के हाथ में आ जाए, यह गलत रणनीति है जिस पर पहले चला जा रहा था, और मैं अब भी नहीं देख रहा हूँ कि इस नीति को बदलने के लिए कुछ किया जा रहा हो। इसी प्रकार उन्होंने ईरान की क्षेत्रीय चिंताओं को पश्चिमी देशों द्वारा समझने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि मेरा विश्वास है कि यह आवश्यक है कि हमारा देश और दूसरे देश दूसरों की रक्षा चिंताओं को समझें, हमें ईरान और इराक़ युद्ध में ईरान की कड़वी यादों को याद करने की आवश्यकता है।
उन्होंने अंत में कहा कि अपने राजनयिक अनुभवों के आधार पर मुझे पता है कि वार्ता का रास्ता हमेशा खुला है, हमें ईरान के साथ वार्ता का रास्ता खुला रखना चाहिए।
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