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Date of publication : 12/3/2018 19:28
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मन ला यहज़ोरोहुल फ़क़ीह

इस किताब को लिखने का मुख्य कारण बल्ख़ शहर के रहने वाले एक बुज़ुर्ग सय्यद शर्फ़ुद्दीन अबू अब्दिल्लाह मोहम्मद इब्ने हुसैन थे, जो नेमत के नाम से मशहूर थे, इन्होंने शैख़ सदूक़ र.ह. ले कहा था कि मोहम्मद इब्ने ज़करिया की डाक्टरी के विषय पर मन ला यहज़ोरोहुत-तबीब किताब की तरह अहकाम और शरई मसाएल के लिए एक किताब लिखें, ताकि वह लोग जिनके आस पास कोई फ़क़ीह मुज्तहिद नहीं है वह इस किताब में बताए गए अहकाम पर अमल कर सकें।
विलायत पोर्टल :  मन ला यहज़ोरोहुल फ़क़ीह (जिसका मतलब वह शख़्स जिसके पास कोई फ़क़ीह मौजूद न हो) उसूले काफ़ी के बाद शियों की दूसरी सबसे अहम और भरोसेमंद किताब है, जिसको शैख़ सदूक़ र.ह. ने लिखा था, यह किताब हदीसों का संकलन है जिसमें अहकाम के बारे में हदीसों को जमा किया गया है, शैख़ सदूक़ र.ह. ने अपने हिसाब से इस किताब में सही और भरोसेमंद हदीसों को जमा किया है ताकि जिसके पास भी कोई फ़क़ीह मौजूद न हो तो वह इस किताब द्वारा शरई अहकाम की मालूमात कर सके।
यह किताब शैख़ सदूक़ र.ह. की अहम और बड़ी किताबों में से है, जिसके लिखने का तरीक़ा भी शुरूआती इस्लामी सालों में किताबें लिखने जैसा है, जिसमें उलमा केवल इमामों की हदीसें लिखते थे और उसकी तफ़सीर में अपनी तरफ़ से किसी भी चीज़ को नहीं लिखते थे, इस किताब में लगभग 6000 हदीसें हैं, और इस किताब की एक ख़ास बात यह है कि इस किताब में केवल अहकाम से संबंधित हदीसें हैं जबकि उसूले काफ़ी में अहकाम के अलावा अक़ाएद और अख़लाक़ वग़ैरह से संबंधित हदीसें भी मौजूद हैं। इस किताब को बुज़ुर्ग उलमा ने बहुत सराहा है, और इसकी अनेक लोगों ने शरह (तफ़सीर) भी लिखी है जिनमें से सबसे मशहूर अल्लामा बाक़िर मजलिसी र.ह. के वालिद अल्लामा मोहम्मद तक़ी मजलिसी र.ह. द्वारा लिखी गई रौज़तुल मुत्तक़ीन है।
शैख़ सदूक़ र.ह. ने इस किताब की हदीसों को अपने दौर से पहले के उलमा की किताबों से नक़्ल की है जिनमें से हुरैज़ इब्ने अबदुल्लाह सजिस्तानी, शैख़ अजल हलबी, अली इब्ने महज़ियार अहवाज़ी, अहमद इब्ने मोहम्मद इब्ने ईसा, इब्ने अबी उमैर, हुसैन इब्ने सईद अहवाज़ी विशेष हैं। शैख़ सदूक़ र.ह. का नाम मोहम्मद इब्ने अली इब्ने हुसैन इब्ने मूसा इब्ने बाबवैह क़ुम्मी था और आप शैख़ सदूक़ र.ह. के नाम से मशहूर थे, आप 305 हिजरी में पैदा हुए और आपकी वफ़ात 381 हिजरी में हुई, आप चौथी सदी हिजरी के मशहूर उलमा में से थे, आप क़ुम के हदीसी मकतब के महान फ़क़ीह और बुज़ुर्ग मोहद्दिस थे, और बयाता जाता है कि आपने लगभग 300 किताबें लिखी हैं जिनमें से अधिकतर आज मौजूद नहीं हैं, मन ला यहज़ोरोहुल फ़क़ीह के अलावा मआनिल अख़बार, उयूनुल अख़बार, एललुश-शराएअ, सिफ़ातुश-शिया आपकी अहम किताबों में से हैं।
इस किताब का विषय जैसाकि ऊपर भी ज़िक्र किया गया कि अहलेबैत अ.स. से नक़्ल होने वाली फ़िक़्ही हदीसें हैं जिनको आपने अपने हिसाब से सही और मोतबर किताबों से नक़्ल किया है। आपकी यह किताब हमेशा से उलमा और फ़ोक़हा के ध्यान का केंद्र रही है, दस से भी अधिक उलमा ने इस किताब की शरह (तफ़सीर) लिखी है और उसका फ़ारसी में तर्जुमा किया है। इस किताब में लगभग 6000 हदीसें हैं जिनको लगभग 650 अलग अलग विषयों में बयान किया गया है।
इस किताब को लिखने का मुख्य कारण बल्ख़ शहर के रहने वाले एक बुज़ुर्ग सय्यद शर्फ़ुद्दीन अबू अब्दिल्लाह मोहम्मद इब्ने हुसैन थे, जो नेमत के नाम से मशहूर थे, इन्होंने शैख़ सदूक़ र.ह. ले कहा था कि मोहम्मद इब्ने ज़करिया की डाक्टरी के विषय पर मन ला यहज़ोरोहुत-तबीब किताब की तरह अहकाम और शरई मसाएल के लिए एक किताब लिखें, ताकि वह लोग जिनके आस पास कोई फ़क़ीह मुज्तहिद नहीं है वह इस किताब में बताए गए अहकाम पर अमल कर सकें। यह किताब 1306 हिजरी में लखनऊ से पहली बार 6 जिल्दों में छपी उसके बाद ईरान, इराक़ के अलग अलग शहरों से कई बार छप कर सामने आई।
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