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Code : 192133
Date of publication : 18/2/2018 15:43
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हज़रत ज़हरा स.अ. ग़ैर मुस्लिमों की निगाह में

ऐ हमेशा नर्म दिली और मोहब्बत से पेश आने वाली, ऐ पाकीज़ा ज़िंदगी गुज़ारने वाली, ऐ दो ऐसे फूलों को जन्म देने वाली जिसकी ख़ुशबू से आज भी दुनिया महक रही है, ऐ पैग़म्बर स.अ. की बेटी, ऐ अली अ.स. की बीवी, ऐ हसनैन अ.स. की मां और ऐ इस पूरी दुनिया की सबसे महान हस्ती......

विलायत पोर्टल : हज़रत ज़हरा स.अ. की अज़मत और आपकी फज़ीलत के लिए बस यही चार चीज़ें काफ़ी हैं, पहली यह कि आप पैग़म्बर स.अ. की बेटी हैं दूसरी यह कि आप इमाम अली की बीवी हैं तीसरी यह कि आप इमाम हसन अ.स. और इमाम हुसैन अ.स. की मां हैं और चौथी यह कि आप आलमीन की औरतों के लिए आइडियल हैं। आप न केवल अपने वालिद, शौहर और बच्चों से बहुत क़रीब थीं बल्कि आप अल्लाह से भी बहुत क़रीब थीं, और इसी तरह आपकी अज़मत के आगे न केवल मुसलमानों ने सिर झुकाया है बल्कि ग़ैर मुस्लिम भी आपकी अज़मत और मर्तबे के आगे नतमस्तक है। इस लेख में आपके बारे में कुछ ग़ैर मुस्लिमों द्वारा बयान की गई बातों को नक़्ल किया जाएगा।
सुलैमान लेनिन
यह एक मशहूर लेखक हैं जिनकी किताबों को इस्लामी जगत में भी सराहा गया है, हज़रत ज़हरा स.अ. के बारे में लिखते हैं कि आपका मर्तबा बहुत बुलंद है जिसकी ओर इतिहास और हदीसों ने इशारा किया है, और आपकी अज़मत उस से कहीं अधिक है जिसको इतिहास में बयान किया गया है, आपकी महानता और आप की अज़मत के लिए यही चार चीज़ें बहुत हैं कि आप पैग़म्बर स.अ. की बेटी, इमाम अली अ.स. की बीवी, हसनैन अ.स. की मां और आलमीन के लिए आइडियल हैं। सुलैमान लेनिन अपनी किताब के अंत में लिखते हैं कि ऐ मुस्तफ़ा स.अ. की बेटी, ऐ ज़मीन वालों के लिए रहमत बन कर आने वाली, आप केवल दो मौक़ों पर मुस्कुराईं, पहली बार तब जब पैग़म्बर स.अ. ने अपनी वफ़ात की ख़बर दी तब आप बहुत रोईं लेकिन थोड़े समय बाद ही आपके कान में कहा कि बेटी मेरी वफ़ात के बाद सबसे पहले मुझ से मुलाक़ात करने वाली तुम ही होगी यह सुनने के बाद हज़रत ज़हरा स.अ. बहुत ख़ुश हुईं और मुस्कुराईं, दूसरी बार जब आपकी शहादत का समय आया तो आप अपने वालिद से मुलाक़ात की उत्सुकता के कारण मुस्कुराईं, ऐ हमेशा नर्म दिली और मोहब्बत से पेश आने वाली, ऐ पाकीज़ा ज़िंदगी गुज़ारने वाली, ऐ दो ऐसे फूलों को जन्म देने वाली जिसकी ख़ुशबू से आज भी दुनिया महक रही है, ऐ पैग़म्बर स.अ. की बेटी, ऐ अली अ.स. की बीवी, ऐ हसनैन अ.स. की मां और ऐ इस पूरी दुनिया की सबसे महान हस्ती।
एक दूसरी जगह पर आप लिखते हैं कि बहादुर वह नहीं है जिसके जिस्म और हाथ पैरों में अधिक ताक़त हो बल्कि बहादुर वह है जो अपनी अक़्ल, सोंच और समझ का सही प्रयोग करे, और बहादुरी भी इसी को कहा जाता है कि इंसान तर्क और अक़्ल को प्रयोग करते हुए अपने मक़्सद तक पहुंच जाए, हज़रत ज़हरा स.अ. की बहादुरी और शुजाअत भी इसी तरह की है कि आपका जिस्म तो कमज़ोर था लेकिन आपने अपने विचारों और तार्किक गुफ़्तुगू से हुकूमत समेत अन्य विरोधियों को ला जवाब करते हुए ज़ाहिर कर दिया था कि उनके हक़ को उनसे और उनके शौहर से छीना गया है।
हेनरी कार्बन
हेनरी कार्बन के बारे में कहा जा सकता है कि यूरोप के यह सबसे पहले वह इंसान हैं जिन्होंने शिया मज़हब को पहचानने की काफ़ी कोशिश की है और अपनी बहुत सारी किताब में इसका ज़िक्र भी किया है। हेनकी कार्बन ने अपनी किताब अर्ज़े मलकूत व कालबिदे इंसान दर रूज़े रस्ताख़ीज़ में हज़रत ज़हरा स.अ. के बारे में भी कई बातें लिखी हैं, वह लिखते हैं कि ईरान के इस्लामी फ़लसफ़े का यूरोप में इतना चर्चा नहीं था, न ही शिया फ़लसफ़े को कोई जानता था न सुन्नी फ़लसफ़े को,
वह शिया मज़हब के बारे में लिखते हैं कि शिया मज़हब जो पैग़म्बर स.अ. और उनके अहले बैत अ.स. से पहचाना जाता है वह पांच सौ साल पहले सफ़वी हुकूमत द्वारा ईरान पहुंचा और वहां का राष्ट्रीय मज़हब हुआ, यूरोप में अधिकतर लोगों का ख़्याल है कि शिया मज़हब राजनीतिक मज़हब है, जबकि नवीं सदी हिजरी तक इमामों के असहाब और उलमा की बातों में इस चीज़ का दूर दूर तर ज़िक्र नहीं मिलता, इसके बाद लिखते हैं कि इस्लाम में पैग़म्बर स.अ. की मारेफ़त हासिल करना ज़रूरी है तो शिया फ़लसफ़े के अनुसार पैग़म्बर स.अ. के साथ साथ इमाम अ.स. की मारेफ़त भी ज़रूरी है, जिस तरह शिया पैग़म्बर स.अ. के अहम कामों में से एक अल्लाह की ओर से पैग़ाम को ले कर उसे शब्दों में लोगों तक पहुंचाना समझते हैं उसी तरह इमाम अ.स. के कामों में भी लोगों की हिदायत और सही ग़लत रास्ते को बताना है, शियों मज़हब के लोग चौदह हस्तियों को मासूम मानते हैं उनमें पैग़म्बर स.अ. और बारह इमामों के अलावा जो हस्ती है उसे हज़रत फ़ातिमा ज़हरा स.अ. कहा जाता है।
लुईस मास्सिगनन
फ़्रांस के मशहूर लेखक जिसने अपनी ज़िंदगी का कुछ हिस्सा हज़रत ज़हरा स.अ. की मारेफ़त हासिल करने में ख़र्च किया और जिन्होंने शहज़ादी के जीवन को समझने के लिए कई साल तहक़ीक़ की और काफ़ी मेहनत और कोशिश के बाद एक पूरा आर्टिकल लिखा जिसमें आपने ईसाईयों का पैग़म्बर स.अ. से सन् 10 हिज्री में होने वाले मुबाहेले का ज़िक्र किया है, आपके इस आर्टिकल में कई बहुत रोचक बातें हैं जैसे आपने हज़रत इब्राहीम की उस दुआ का ज़िक्र किया जिसमें बारह नूर का हज़रत ज़हरा स.अ. की नस्ल से होने का ज़िक्र है या हज़रत मूसा की तौरैत का ज़िक्र किया जिसमें पैग़म्बर स.अ. और आपकी बेटी का बयान मौजूद है और साथ यह भी कि इस्माईल और इस्हाक़ नबी की तरह हज़रत ज़हरा स.अ. के भी दो बेटे (हसन अ.स. और हुसैन अ.स.) होंगे या हज़रत ईसा की इंजील का ज़िक्र किया जिसमें पैग़म्बर स.अ. के आने की ख़बर दी गई थी और यह भी बताया गया था कि उनकी एक बेटी होगी जिनके दो बेटे होंगे।
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