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Code : 192090
Date of publication : 15/2/2018 5:41
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शहीद एमाद मुग़निया

हिज़्बुल्लाह - इस्राईल के बीच हुए 33 दिवसीय युद्ध का असली हीरो

आप कहा करते थे कि अगर मैं अपने दूसरे भाईयों को साम्राज्यवाद से लड़ने की दावत दूं और ख़ुद मौत से डर के पीछे पीछे रहूं तो यह इस्लाम के जांबाज़ सिपाहियों के साथ धोखा होगा और ईमान का सबसे पहला ज़ीना ही यही है कि जो मैं उनके लिए पसंद करूं वही अपने लिए भी होना चाहिए।


विलायत पोर्टल : लेबनान की हिज़्बुल्लाह के सैन्य कमांडर और युध्द की रणनीति के माहिर एमाद मुग़निया की शहादत को दस साल हो गए हैं, आप हाज रिज़वान के नाम से मशहूर थे, आपका जन्म 1962 में हुआ और 2008 में ज़ायोनी आतंकियों के हाथों धोखे से शहीद कर दिए गए , आप हिज़्बुल्लाह की सैन्य इकाई के संस्थापक थे और आप हिज़्बुल्लाह की इस्राईल के विरुध्द होने वाली 33 दिनों की जंग के कमांडर थे।
आप इस्लामी प्रतिरोध के समय पल पल हिज़्बुल्लाह की पूरी सेना के साथ साए की तरह रहते थे, अमेरिकी सरकार ने आप के बारे में किसी भी तरह की ख़बर लाने पर इनाम रखा था, आपकी सीरिया में 2008 में हत्या कर दी गई और आप शहीद हो गए, आपकी शहादत पर आयतुल्लाह ख़ामनेई ने संदेश जारी कर आपको अल्लाह की राह में जेहाद के लिए हर समय तैयार रहने वाला कहा था।
आप 7 दिसंबर 1962 को दक्षिणी लेबनान के सूर नामी शहर में पैदा हुए आपके वालिद फ़ाएज़ मुग़निया थे और आपके दो भाई जेहाद और फ़ोवाद भी साम्राज्यवादी ताक़तों से मुक़ाबला करते हुए शहीद हो गए थे, आपका एक बेटा भी 17 जनवरी 2015 को इस्राईली हमले में सीरिया में शहीद हो गया। आपके वालिद सूर शहर से ज़ाजिया शहर मे शिफ़्ट हो गए थे यहीं पर आपने अपनी शुरूआती पढ़ाई की उसके बाद आप अमेरिकन यूनिवर्सिटी बैरूत AUB में अपनी पढ़ाई के लिए गए।
आप 1980 के शुरू में फ़िलिस्तीनी लिबरेशन मूवमेंट का हिस्सा बने, यह लिबरेशन अबू अम्मार, अबू जेहाद और अबू अयाद जैसे जाबांज़ों की सुरक्षा के लिए बनाया गया था।
उसी समय से फ़िलिस्तीनी लिबरेशन मूवमेंट और हिज़्बुल्लाह का इस्लामी प्रतिरोध के लिए साथ शुरू हुआ लेकिन 1982 में ज़ायोनी दरिंदों के कारण यह गठबंधन टूट गया, और फ़िलिस्तीनी लिबरेशन मूवमेंट के मेम्बर लेबनान छोड़ कर फ़िलिस्तीन वापस चले गए। आपकी एक बहुत ख़ास बात आपकी सुरक्षा रणनीतियां थीं आप हर जगह मौजूद होते लेकिन आप के साथ रहने वाले और आपको देखने वाले आपको पहचान नहीं पाते थे, आपकी यही बात आपकी ताक़त थी कि आप आसानी से हर मोर्चे पर निगरानी रखते थे, आप छोटी बड़ी हर मीटिंग में सादगी के साथ शामिल होते जिसके चलते आपको कोई भी पहचान नहीं पाता था, आप ग़ैर ज़रूरी किसी भी जगह नहीं जाते थे, आपकी यह आदतें आपकी ज़िंदगी का हिस्सा बन गई थीं, आप व्यक्तिगत रक्षा की तकनीक के माहिर थे और आपके साथ रहने वाले बहुत से कमांडर और कर्नल ने आपसे यह टेक्निक सीखी थी।
आपने अपनी शहादत से कुछ घंटे पहले सीरिया में इस्लामी प्रतिरोध के महासचिव कमांडर रमज़ान अब्दुल्लाह और आईआरजीसी के थल सेना प्रमुख ब्रिगेडियर मोहम्मद पाकपूर के साथ मीटिंग की, ब्रिगेडियर मोहम्मद पाकपूर का बयान है कि उस दिन आधी रात को भी हमारी मीटिंग होनी थी, और हम लोग कई दिनों से लगातार सैन्य और सुरक्षा क्षमताओं को बढ़ाने को लेकर मीटिंग कर रहे थे, आपकी एक और ख़ास बात यह थी कि आप मीटिंग में हमेशा देर से आते थे और इसके पीछे क्या कारण था इसको केवल आप ही जानते थे, लेकिन आपके साथी इतना ज़रूर बताते हैं कि आप जिस समय मीटिंग में मुस्कुराते हुए आते आपके देर से आने को हर कोई भूल जाता था। जिस समय ब्लास्ट हुआ ब्रिगेडियर मोहम्मद पाकपूर ही वह आदमी थे जो एमाद मुग़निया के पास पहुंचे, ब्रिगेडियर का बयान है कि मैं जिस समय पहुंचा मैंने देखा कि आप सजदे की हालत में ज़मीन पर पड़े थे और शहीद हो चुके थे।
आप कहा करते थे कि अगर मैं अपने दूसरे भाईयों को साम्राज्यवाद से लड़ने की दावत दूं और ख़ुद मौत से डर के पीछे पीछे रहूं तो यह इस्लाम के जांबाज़ सिपाहियों के साथ धोखा होगा और ईमान का सबसे पहला ज़ीना ही यही है कि जो मैं उनके लिए पसंद करूं वही अपने लिए भी होना चाहिए।
12 फ़रवरी 2008 को हिज़्बुल्लाह के उप सचिव एमाद मुग़निया सीरिया के दमिश्क़ के पश्चिमी इलाक़े के एक शहर में हिज़्बुल्लाह की ब्रांच मे गए, आप एक अपार्टमेंट में दाख़िल हुए जिसमें इस्लामी प्रतिरोध के कई उच्चाधिकारी जमा थे जिसमें फ़िलिस्तीन और आईआरजीसी के भी कुछ उच्चाधिकारी शामिल थे ताकि सैन्य प्रशिक्षण और सुरक्षा मुद्दों पर चर्चा हो सके।
मीटिंग ख़त्म होने से पहले ही आप वहां से बाहर निकल आए और उन लोगों से कहा आप चर्चा जारी रखें, थोड़ी देर बाद ब्लास्ट की आवाज़ आई मीटिंग में बैठे सब यही सोंच रहे थे कि रोज़ की तरह कोई हमला या कोई धमाका हुआ है, लेकिन बाहर से आने वाली चीख़ों ने उन सभी को मीटिंग छोड़ कर बाहर निकलने पर मजबूर कर दिया, बाहर आते ही देखा सीरियन पुलिस एंबुलेंस वग़ैरह वहां पर पहुंच चुके हैं और लोग उसी अपार्टमेंट के बाहर किसी को घेरे हुए खड़े हैं, जब यह लोग पहुंचे तो देखा कि एमाद मुग़निया ख़ून मे लतपथ सजदे की हालत में ज़मीन पर पड़े हैं। ब्लास्ट इतना ख़तरनाक था कि उसके अंश आपकी आंखों को चीरते हुए आपके सिर के दूसरी ओर निकल गए थे, आप तुरंत उसी जगह पर शहीद हो गए थे, जैसे ही आपके साथियों ने देखा कि आप शहीद हो गए हैं उसी समय आपके जनाज़े को लेबनान भेज दिया।
हिज़्बुल्लाह के मौजूद दूसरे सैन्याधिकारियों ने अपने जनरल सेक्रेटरी सय्यद हसन नसरुल्लाह को फ़ोन कर के आपकी शहादत की ख़बर दी, और फिर उन्हीं के कहने पर शहीद एमाद मुग़निया के जनाज़े को उनके बताए हुए लेबनान के एक अस्पताल में ले जाया गया, ताकि सय्यद हसन नसरुल्लाह आख़िरी बार अपने भरोसेमंद क़ाबिल दोस्त को देख सकें, और उनके जनाज़े को इमाम हुसैन अ.स. के हरम के उस परचम में लपेट सकें जो उनको कर्बला से मिला था, और आपकी शहादत की ख़बर को आपके घर वालों तक पहुंचा सकें।
ज़ायोनी आपकी हत्या के 6 महीने पहले से आपके सभी शेड्यूल को फ़ॉलो कर रहे थे और आपकी भविष्य की मीटिंग और सभी यात्राओं के शेड्यूल को अपने जासूसों द्वारा हासिल कर लिया था, वह आपकी सभी गतिविधियों पर निगाहें जमाए बैठे थे, और फिर पूरी प्लानिंग के साथ 12 फ़रवरी को ब्लास्ट कर के आपको शहीद कर दिया।
ब्लास्ट की जगह पर कई संदिग्ध लोग ऐसे पाए गए जिनकी जांच पड़ताल के बाद उनका ज़ायोनी से साथ मिले रहने का यक़ीन हुआ, और साथ ही उसी समय घटना स्थल के ऊपर से इस्राईली विमान भी गुज़रता दिखाई दिया साथ ही ब्लास्ट से एक दिन पहले रात में ज़ायोनी सेना नाव द्वारा लेबनान के कुछ इलाक़ों को घेरे थीं ताकि हिज़्बुल्लाह और लेबनान सेना का ध्यान वहीं पर रहे और वह उनकी साज़िश को समझते हुए सीरिया कोई मदद न भेज सकें और मौक़े पर कई ऐसी चीज़ें इस्राईल की बनी हुई बरामद हुईं जिससे एमाद मुग़निया की हत्या के पीछे इस्राईल का हाथ होने में कोई शक नहीं रह जाता।
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