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Code : 192085
Date of publication : 15/2/2018 4:4
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सरदार क़ासिम सुलेमानी का ऐलान, अवैध राष्ट्र की बर्बादी है शहीद एमाद मुग़निया का इन्तेक़ाम ।

एमाद मुग़निया का मानना था कि दुश्मन को परास्त करना है तो इस्लामी जगत में एकता और जागरूकता लाना होगी वही थे जिन्होंने फिलिस्तीनी आंदोलनों और लेबनानी प्रतिरोध को एक दूसरे से जोड़ा, फिलिस्तीन के नेता यासर अराफात को पहली बार ईरान लेकर आने वाले व्यक्ति एमाद मुग़निया ही थे । उन्होंने ही हमास को शक्तिशाली बनाया तथा पॉपुलर फ्रंट फॉर द लिबरेशन ऑफ़ पलेस्टाइन – जनरल कमांड में नई जान फूंकी जिस ने ग़ज़्ज़ा को एक अभेद किले का रूप दे दिया ।


विलायत पोर्टल :  प्राप्त जानकारी के अनुसार वहाबी आतंकी संगठनों और मिडिल ईस्ट में साम्राज्यवादी शक्तियों का सिर कुचलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले आईआरजीसी बल की क़ुद्स ब्रिगेड के प्रमुख सरदार मेजर जनरल क़ासिम सुलेमानी ने कहा कि आज ग़ज़्ज़ा और लेबनान अवैध राष्ट्र इस्राईल के लिए भय और खौफ का स्रोत बन गए हैं । शहीद एमाद मुग़निया की बेटी की उपस्थिति में उनकी शहादत की याद में आयोजित समारोह को सम्बोधित करते हुए सरदार क़ासिम सुलैमानी ने कहा कि आज लेबनान में 3 शहीदों की याद में प्रोग्राम आयोजित किये जा रहे हैं , शहीद राग़िब हर्ब , शहीद सय्यद अब्बास मूसवी , और शहीद एमाद मुग़निया । उन्होंने कहा में आज पहली बार अपने अज़ीज़ दोस्त के बारे में बात करने जा रहा हूँ जिस के साथ मैंने अपनी ज़िन्दगी का एक बड़ा हिस्सा गुज़ारा है , ऐसा व्यक्तित्व जिसे आज तक इस्लामी प्रतिरोध चाहे शिया हों या सुन्नी या सच्चाई के लिए संघर्ष करने वाले अन्य धर्म के लोगों के बीच में पहचाना नहीं गया है । इमाम ख़ुमैनी के इंतेक़ाल के बाद कुछ उलमा के अलावा मैंने किसी ऐसे व्यक्ति को नहीं देखा जिसकी शहादत पर इतना दुःख और ग़म मनाया गया हो । एमाद मुग़निया का मानना था कि दुश्मन को परास्त करना है तो इस्लामी जगत में एकता और जागरूकता लाना होगी वही थे जिन्होंने फिलिस्तीनी आंदोलनों और लेबनानी प्रतिरोध को एक दूसरे से जोड़ा, फिलिस्तीन के नेता यासर अराफात को पहली बार ईरान लेकर आने वाले व्यक्ति एमाद मुग़निया ही थे । उन्होंने ही हमास को शक्तिशाली बनाया तथा पॉपुलर फ्रंट फॉर द लिबरेशन ऑफ़ पलेस्टाइन – जनरल कमांड में नई जान फूंकी जिस ने ग़ज़्ज़ा को एक अभेद किले का रूप दे दिया । आज ग़ज़्ज़ा और लेबनान अवैध राष्ट्र के लिए भय और खौफ का पर्याय बन चुके हैं बल्कि यूँ कहा जाए कि अवैध राष्ट्र कि ओर दाग़ी जानी वाली हर मिसाइल पर शहीद एमाद मुग़निया कि उँगलियों के निशान देखे जा सकते हैं । सरदार क़ासिम सुलेमानी ने कहा कि मैं एमाद मुग़निया की शहादत को याद करता हूँ तो हज़रत मालिके अश्तर की शहादत याद आ जाती है क्योंकि एमाद की शहादत ने भी एक दुनिया को खुशियां दी तो इस्लामी जगत को शोक में डुबो दिया लेकिन इस्लाम का करिश्मा है कि यहाँ व्यक्तित्व संवारा जाता है हालाँकि एमाद का जवाब नहीं आ सकता लेकिन इस्लाम सदैव ही महान हस्तियों की तरबियत करता रहा है । दुश्मन जानता है और इस बात का ध्यान रखे कि एमाद का इन्तेक़ाम कुछ मिसाइल फायर करने या कुछ दुश्मनों को मार कर पूरा नहीं होने वाला, उसका इन्तेक़ाम अवैध राष्ट्र की बर्बादी और उसको विश्व मानचित्र से मिटाकर ही पूरा होगा ।
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