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Code : 192071
Date of publication : 14/2/2018 7:42
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मिडिल ईस्ट में युद्ध हुआ तो इस्राईल का नामो निशान मिट जायेगा

अवैध राष्ट्र इस्राईल ने हमला किया तो उसके अपने हर क्षेत्र पर मिसाइलों की बरसात शुरू हो जाएगी और उसका कोई भी शहर पूरी तरह ध्वस्त हुए बग़ैर नहीं रहेगा। कारण जब अवैध राष्ट्र इस्राईल के दावों के अनुसार ईरान का ड्रोन विमान उसकी वायु सीमा को लांघते हुए तल अवीव तक आ पहुंचा और बिन गौरेन हवाई अड्डे को घंटों बंद रखना पड़ा तथा हैफ़ा और तेल अवीव में स्थितआपात शरणस्थलों को खोलना पड़ा, और इसी जाल में फंसाकर अवैध राष्ट्र इस्राईल के एफ़-16 विमान को ध्वस्त कर दिया गया तो उस समय क्या होगा जब लेबनान, सीरिया, ईरान और ग़ज्ज़ा पट्टी से इस्राईली शहरों पर मिसाइलों का ना ख़त्म होने वाला हमला शुरू होगा ?


विलायत पोर्टल :  ईरान और अवैध राष्ट्र इस्राईल के बीच युद्ध की सम्भावना पर हो रही चर्चा अवैध राष्ट्र इस्राईल की ताक़त का प्रतीक नहीं बल्कि उस पर छाए भय और संकट की निशानी है जो अब पागलपन की हद तक बढ़ चुकी है। इसका एक कारण यह है कि प्रतिरोधी आंदोलनों के ड्रोन विमान अलजलील इलाक़े तक पहुंच रहे हैं और सीरिया ने आधुनिक मिसाइलों के बजाए अपने पुराने मिसाइल के दम पर, जिसका प्रयोग 1970 के दशक में ही समाप्त हो चुका है, अवैध राष्ट्र इस्राईल के एफ़-16 युद्धक विमान को मार गिराया है ।
अवैध राष्ट्र इस्राईल के अत्याधुनिक युद्धक विमान एफ़-16 का मार गिराया जाना बहुत महत्वपूर्ण मोड़ है इससे हमें उस घटना की याद आती है जब दोनों सुपर पावरों के बीच मुक़ाबला अपने चरम बिंदु पर था तो सोवियत संघ ने ज़मीन से हवा में मार करने वाले मिसाइल एस-75 से अमेरिका के जासूसी विमान यू-2 को मई 1960 में मार गिराया था । उस समय अमेरिका में आइज़नहावर और सोवियत संघ में ख़्रुशचोफ़ की सरकार थी।
अमेरिका के जासूसी विमान का मार गिराया जाना अमेरिका को अरबों डालर का नुक़सान दे गया क्योंकि अमेरिका को यह जासूसी विमान अंड़र ग्राउंड करने पड़े और इनकी जगह पर नए जासूसी विमानों का निर्माण करना पड़ा जिसके राहस्य सोवियत संघ के पास न हों।
अरब जगत में यह तीसरा अवसर है जब एफ़-16 युद्धक विमान को गिराया गया है। पहला विमान यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन ने गिराया जो मोरक्को का था और सऊदी अरब की ओर से यमन पर हमले कर रहा था।
दूसरा एफ़-16 विमान जार्डन का गिराया गया जिसे पायलट मआज़ अलकसासबा उड़ा रहे थे जिसे दाइश ने इराक़ की सीमा में गिराया था जबकि तीसरा एफ़-16 युद्धक विमान अवैध राष्ट्र इस्राईल का गिरा है जिसे सीरिया ने निशाना बनाया है।
जार्डन और मोरक्को के युद्धक विमान पुराने थे जबकि अवैध राष्ट्र इस्राईल का एफ़-16 युद्धक विमान अत्याधुनिक था अतः इसके गिर जाने से विश्व बाज़ार में एफ़-16 युद्धक विमानों की मांग पूरी तरह गिर जाएगी।
बिल्कुल वैसे ही जैसे हिज़्बुल्लाह ने जर्मनी के लियुबर्ड और अमेरिका के अबराम टैंकों को विश्व बाज़ार में कड़ी टक्कर दे रहे अवैध राष्ट्र इस्राईल के मिर्कावा टैंक की धज्जियां उड़ा कर इस की मार्केट ख़त्म कर दी थी ।
ईरान सीरिया से बाहर नहीं निकलेगा क्योंकि सीरिया की सरकार ने उसे निमंत्रण देकर बुलाया है और ईरान ने छह साल तक आतंक के ख़िलाफ युद्ध करते हुए जानी व माली क़ुर्बानियां दी हैं तथा सीरिया की सरकार को बचाए रखने में बुनियादी भूमिका निभाई है जिस कारण सीरिया के ख़िलाफ़ अमेरिका और क्षेत्रीय देशों की बड़ी भयानक और अभूतपूर्व साज़िश नाकाम हो गई।
थोड़ी देर के लिए अगर हम ज़ायोनी अधिकारियों की धमकियों को गंभीरता से ले भी लें और यह मान लें कि ईरान और अवैध राष्ट्र इस्राईल के बीच युद्ध होने वाला है तो सवाल है कि यह युद्ध कहां होगा?
इसके दो ही जवाब हैं, एक तो यह कि अवैध राष्ट्र इस्राईल और ईरान के बीच प्रत्यक्ष टकराव हो दूसरे यह कि सीरिया या लेबनान की धरती पर छद्म युद्ध लड़ा जाए। पहले विकल्प की संभावना नहीं के बराबर है क्योंकि ईरान अतिगृहित फ़िलिस्तीन से 2000 किलोमीटर से अधिक दूरी पर स्थित है और यदि अवैध राष्ट्र इस्राईल के पास इतनी हिम्मत और ताक़त होती कि ईरान के प्रतिष्ठानों पर हमला करे तो वह अब तक कर चुका होता। अतः यह लगता है कि टकराव सीरिया या लेबनान की धरती पर हो सकता है। मगर यह टकराव भी हुआ तो इसके भी बड़े ख़तरे हैं।
पहली बात तो यह है कि अवैध राष्ट्र इस्राईल को रूस इस बात की अनुमति नहीं देगा कि सीरिया की धरती पर उसने जो सफलताएं हासिल की हैं उन्हें ख़त्म कर दे, दूसरी बात यह है कि अवैध राष्ट्र इस्राईल ने हमला किया तो उसके अपने हर क्षेत्र पर मिसाइलों की बरसात शुरू हो जाएगी और उसका कोई भी शहर पूरी तरह ध्वस्त हुए बग़ैर नहीं रहेगा।
कारण जब अवैध राष्ट्र इस्राईल के दावों के अनुसार ईरान का ड्रोन विमान उसकी वायु सीमा को लांघते हुए तल अवीव तक आ पहुंचा और बिन गौरेन हवाई अड्डे को घंटों बंद रखना पड़ा तथा हैफ़ा और तेल अवीव में स्थित आपात शरणस्थलों को खोलना पड़ा, और इसी जाल में फंसाकर अवैध राष्ट्र इस्राईल के एफ़-16 विमान को ध्वस्त कर दिया गया तो उस समय क्या होगा जब लेबनान, सीरिया, ईरान और ग़ज्ज़ा पट्टी से इस्राईली शहरों पर मिसाइलों का ना ख़त्म होने वाला हमला शुरू होगा ? तीसरी बात यह है कि इस समय सीरिया की सेना हालिया कई साल के युद्ध से ज़बरदस्त अनुभव प्राप्त करके युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार है, सीरियाई सेना के पास इस समय जितना अनुभव है उतना अनुभव ज़ायोनी सेना के पास नहीं है ।
 ईरान को सीरिया मे थल, वायु या नौसैनिक ठिकाने बनाने की ज़रूरत ही नहीं है सीरिया ने तो अपने दरवाज़े ईरान के लिए खोल दिए हैं। इसी तरह पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान से आने वाले उन स्वयंसेवियों के लिए भी सीरिया ने दरवाज़े खुले रखें हैं जिन्होंने सीरियाई जनता और सरकार की अतुल्य सेवा की है।
अवैध राष्ट्र इस्राईल के एफ़-16 युद्धक विमान को ध्वस्त कर दिए जाने की घटना में अभी और भी चौंकाने वाली बातें सामने आएंगी। पुराने मिसाइल से इस्राईली विमान को गिराकर यह संदेश दिया गया है कि आधुनिक मिसाइलों के हमले अवैध राष्ट्र इस्राईल नहीं झेल पाएगा अतः अपनी औक़ात में रहे वरना उसे पाषाण युग में भेज दिया जाएगा।
 संभव है कि अवैध राष्ट्र इस्राईल के पास हथियारों का बड़ा भंड़ार हो लेकिन वह अपने से पचास गुना अधिक बड़े ईरान को तबाह करने मे असक्षम है जबकि ईरान और उसके सहयोगी अवैध राष्ट्र इस्राईल को पूरी तरह नष्ट करने की क्षमता रखते हैं ।
अरबों के साथ युद्ध में अपनी वायु शक्ति का प्रयोग करके अवैध राष्ट्र इस्राईल के युद्ध जीत लेने का ज़माना बीत चुका है,अब तो ईरान, सरिया, लेबनान और फ़िलिस्तीन के गठजोड़ की जीत का समय है।
इस्राईली विमान मार गिराए जाने के बाद सबसे बड़ा बदलाव यह आया है कि अरब जनता मे सकारात्मक संदेश गया है तथा उनका मनोबल भी बहुत बढ़ा है, अवैध राष्ट्र इस्राईल और अमेरिका से लड़ने वाले इस्लामी प्रतिरोधी मोर्चे का आत्मविश्वास भी चरम पर है, यदि युद्ध छिड़ता है तो यह अवैध राष्ट्र इस्राईल की परीक्षा होगी कि वह अपना अस्तित्व बचा पाएगा या नहीं?
ईरान, सीरिया, लेबनान, और फ़िलिस्तीन का जहां तक सवाल है तो उनकी जड़े बहुत गहराई तक फैली हुई हैं और वह हज़ारों साल से इस इलाक़े में मौजूद हैं। ...........................


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