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Code : 192053
Date of publication : 13/2/2018 8:0
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अवैध राष्ट्र के काले कारनामे और उसके इतिहास पर एक निगाह ।

इस्राईल की जीत में अमेरिका की ओर से मिलने वाली सैन्य जानकारियों ने महत्वपूर्ण किरदार निभाया जिसकी बदौलत इस्राईल ने सीना के रेगिस्तान और जौलान हाइट्स पर क़ब्ज़ा करने में सफलता पाई । ज़ायोनी सेना 6 दिवसीय युद्ध के बाद मस्जिदे अक़्सा में पहुँचने में सफल रही, वह मस्ती की हालत में नाचते गाते हुए बोल रहे थे कि मोहम्मद मर गए और अपने पीछे लड़कियों को छोड़ गए हैं ।

विलायत पोर्टल :  फतह मूवमेंट का गठन. 1958 में कुवैत में पलिस्तीनियन नेशनल लिबरेशन मूवमेंट का गठन हुआ और मुस्लिम ब्रदरहुड से निकटता रखने वाले यासर अराफात उसके मुखिया बनाये गए ।
पलेस्टाइन लिबरेशन आर्गेनाइजेशन { पीएलओ }का गठन.
फिलिस्तीनी जनता को संगठित करने के लिए जमाल अब्दुल नासिर के समर्थन से फिलिस्तीनी जनता के 422 प्रतिनिधियों के साथ 1964 में पलेस्टाइन लिबरेशन आर्गेनाइजेशन {पीएलओ} का गठन किया गया ।
 इस संगठन का घोषणा पत्र निम्नलिखित है
1. फिलिस्तीनी धरती को ज़ायोनी चंगुल से मुक्त कराने के लिए सशस्त्र संघर्ष पर बल देना।
2 . फिलिस्तीन के किसी भी भाग की अनदेखी स्वीकार नहीं की जायेगी ।
3. फिलिस्तीन को आज़ाद कराने के लिए सेना का गठन करना ।
4. विश्व स्तर पर अधिक सहयोग जुटाने के लिए फिलिस्तीन मुद्दे को प्रचारित करना ।
6 दिवसीय युद्ध
1965 और 1966 में जमाल अब्दुल नासिर अरब जगत के लोकप्रिय चेहरे के रूप में अरब देशों की जनता के चहेते थे तथा उन्होंने लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया , अरब जगत उन्हें ऐसे ताक़तवर नेता के रूप में देख रहा था जो ज़ायोनी मूवमेंट का नामो निशान मिटाकर तल अवीव पर अधिकार कर लेगा तथा फिलिस्तीन को आज़ाद कर उसे अरब जगत को लौटाने में कामयाब रहेगा ।
इस अवधि में सीरिया के छापामार योद्धा अतिगृहित फिलिस्तीन में आते और छापामार कार्रवई कर अवैध राष्ट्र को उलझाए रखते थे ।
10 मई 1967 को तत्कालीन ज़ायोनी संयुक्त सैन्य कमान के अध्यक्ष इस्हाक़ रोबिन ने सीरिया को धमकी देते हुए कहा कि अगर सीरियाई छापामारों ने फिलिस्तीनी जनता का सहयोग जारी रखा तो इस्राईल दमिश्क़ पर धावा बोल कर उसे अपने अधीन ले लेगा ।
1967 में औपचारिक रूप से युद्ध शुरू होने से दो महीने पहले ही अवैध राष्ट्र ने फिलिस्तीनी जनता का सहयोग करने का आरोप लगाते हुए सीरिया की सैनिक रहित सीमा पर क़ब्ज़ा कर लिया ।
ज़ायोनी सेना के खतरे और हरकतों को देखते हुए अरब जगत के मुख्य और बड़े नेता होने के नाते जमाल अब्दुल नासिर ने संयक्त राष्ट्र से मांग की कि वह सीना के रेगिस्तान से अपनी सेना को वापस बुला ले।
जमाल अब्दुल नासिर ने अवैध राष्ट्र को लाल सागर से जोड़ने वाले एकमात्र मार्ग तैरान जलड़मरू को बंद कर दिया, यह काम इस्राईल के लिए बहुत बड़े खतरे का संकेत था क्योंकि इस काम से इस्राईल के लिए लाल सागर और स्वेज़ नहर और तैरान के सभी मार्ग बंद हो गए थे । ज़ायोनी अधिकारियों ने मिस्र के इस काम को अवैध राष्ट्र से जंग का ऐलान माना तो जमाल अब्दुल नासिर ने भी ज़ायोनी अधिकारियों की धमकियों का कड़ा जवाब देते हुए उन से मुक़ाबला करने की बात कही । 30 मई को जॉर्डन के राजा हुसैन ने जमाल अब्दुल नासिर से मुलाक़ात की तथा मिस्र और जॉर्डन ने संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किये इराक और कुवैत जैसे कुछ और अरब देशों ने भी सीरिया , मिस्र और जॉर्डन के गठबंधन की सहायता के लिए अपनी सेना को मिस्र के लिए रवाना कर दिया ।
आंकड़ों के हिसाब से इस युद्ध में अरब देशों का पलड़ा भारी लग रहा था क्योंकि यह देश सैन्य शक्ति और सैन्य उपकरण में इस्राईल से बहुत आगे थे, मिस्र ने 450 युद्धक विमान , 1200 टैंक तथा 246 हज़ार जवानों के साथ इस युद्ध में भाग लिया ।
5 जून 1968 में इस्राईल ने कई मोर्चों से अरब देशों पर हमला किया रेडियो सेवा अरब की आवाज़ ने युद्ध के शुरूआती दिनों में अरब सेना की जीत की खबरें देते हुए कहा कि अरब सेना ने ज़ायोनी सेना के सैंकड़ों युद्धक विमानों को मार गिराया है जबकि सच्चाई कुछ और थी , युद्ध शुरू होने की पहली ही रात इस्राईल ने अरब देशों की ग़फ़लत से फायदा उठाते हुए मिस्र, जॉर्डन और सीरिया के विमानों को उनके एयरबेस के रनवे पर ही तबाह कर डाला ।
अरबों को एक के बाद एक संगीन नुकसान हो रहे थे यहाँ तक कि जंग के छठे दिन इस्राईल ने जॉर्डन नदी के पश्चिमी तट और ग़ज़्ज़ा के एक भाग पर भी क़ब्ज़ा कर लिया ।
इस्राईल की जीत में अमेरिका की ओर से मिलने वाली सैन्य जानकारियों ने महत्वपूर्ण किरदार निभाया जिसकी बदौलत इस्राईल ने सीना के रेगिस्तान और जौलान हाइट्स पर क़ब्ज़ा करने में सफलता पाई ।
ज़ायोनी सेना 6 दिवसीय युद्ध के बाद मस्जिदे अक़्सा में पहुँचने में सफल रही, वह मस्ती की हालत में नाचते गाते हुए बोल रहे थे कि मोहम्मद मर गए और अपने पीछे लड़कियों को छोड़ गए हैं ।
अरब लोगों का मज़ाक़ उड़ाते हुए ज़ायोनी नारे लगा रहे थे " ख़ैबर ख़ैबर " अर्थात हमने इस जंग मे जंगे ख़ैबर का बदला लिया है ।
इस्राईल की स्थायी राजधानी की घोषणा
27 जून को 6 दिवसीय युद्ध की जीत के नशे में चूर ज़ायोनी नेताओं ने पूर्वी क़ुद्स का पश्चिमी क़ुद्स मे विलय करते हुए इस शहर को हमेशा के लिए अवैध राष्ट्र इस्राईल की राजधानी घोषित करते हुए ऐलान किया कि इस मुद्दे पर किसी भी बातचीत की कभी कोई गुंजाइश नहीं है । .............................


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