Delicious facebook RSS दोस्तों को भेजें। प्रिंट सेव करें। XML TEXT PDF
Code : 192050
Date of publication : 12/2/2018 18:53
Hit : 328

अल्लामा शहीद मुर्तज़ा मुतह्हरी की ज़िंदगी पर एक निगाह

आप हमेशा इमाम ख़ुमैनी के साथ ही रहते थे जिसके चलते कहा जा सकता है कि 5 जून 1963 को इमाम ख़ुमैनी की देख रेख में तेहरान से शाह के साम्राज्य के विरुध्द आवाज़ उठाने और सड़कों पर निकल कर शाह के विरुध्द नारेबाज़ी करने की हिम्मत आप ही ने पैदा की थी, यही कारण है कि आपको उसी दिन शाह के विरुध्द एक तक़रीर के कारण गिरफ़्तार कर के जेल में डाल दिया गया जिसमें पहले से कुछ उलमा क़ैद थे, लगभग 43 दिन बाद बड़ी तादाद में उलमा और तेहरान के पास और दूर के लोगों ने तेहरान पहुंच कर शाह की हुकूमत पर दबाव बनाया जिसके बाद शाह को मजबूर हो कर शहीद मुतह्हरी समेत सभी उलमा को रिहा करना पड़ा।

विलायत पोर्टल : उस्ताद आयतुल्लाह शहीद मुतह्हरी 3 फ़रवरी 1920 को मशहद शहर से 75 किलोमीटर दूर फ़रीमान नामी शहर के एक मज़हबी और दीनदार घराने में पैदा हुए, आपने अपने शहर के स्कूल से अपनी पढ़ाई की शुरूआत की। आपकी तालीम आप 12 साल की उम्र में मशहद शहर के एक मदरसे में इल्म हासिल करने पहुंचे, 1938 में ईरान के शाह रज़ा ख़ान की पाबंदियों और कुछ दोस्तों के कहने पर आप अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए मशहद से क़ुम शहर की ओर आए, आपके क़ुम आने के कुछ ही समय पहले क़ुम के हौज़े की बुनियाद रखने वाले आयतुल्लाह शैख़ अब्दुल करीम हायरी का इंतेक़ाल हो चुका था और हौज़े की ज़िम्मेदारी तीन और महान हस्तियों आयतुल्लाह हुज्जत, आयतुल्लाह सदरुद्दीन और आयतुल्लाह ख़ुनसारी पर थी।
आपके उस्ताद
आप क़ुम में 15 साल आयतुल्लाह बुरूजर्दी के फ़िक़्ह और उसूल और इमाम ख़ुमैनी के फ़लसफ़ा, इरफ़ान, अख़लाक़ और उसूल और अल्लामा तबातबाई के फ़लसफ़े के दर्स में जाते थे, आप इल्म के हासिल करने में इस हद तक गंभीर थे कि आयतुल्लाह बुरूजर्दी के क़ुम आने से पहले आप उनके शहर बुरूजर्द उनके दर्स में शामिल होने जाया करते थे। आप कुछ साल आयतुल्लाह मिर्ज़ा अली आक़ा शीराज़ी के अख़लाक़ और इरफ़ान के दर्स में भी गए और और आयतुल्लाह सय्यद मोहम्मद हुज्जत के उसूल और आयतुल्लाह मोहक़्क़िक़ दामाद के फ़िक़्ह के दर्स में भी शामिल हुए।
दीनी और मज़हबी गतिविधियां
आपको आपकी पढ़ाई के दौरान ही भविष्य के एक माहिर उस्ताद के रूप में देखा जाने लगा था और फिर आप ख़ुद 1953 में क़ुम से तेहरान की ओर चले गए और वहां मदरसे और स्कूल दोनों जगह आपने पढ़ाना शुरू किया और साथ ही साथ आपने तक़रीरें और मजलिसें पढ़ना और किताबें लिखना भी शुरू कर दीं। 1956 में पहली बार आपके द्वारा स्टूडेंट यूनियन के लिए इल्मे तफ़सीर का दर्स रखा गया और उसी साल आपने तेहरान यूनिवर्सिटी में इस्लामी अक़ीदे और मआरिफ़ के दर्स देना भी शुरू कर दिए, और जब 1959-1960 में इस्लामिक चिकित्सक एसोसिएशन बनी आप इस एसोसिएशन के मेन स्पीकर में से थे और फिर 1962 से 1972 में आप अकेले ही इस एसोसिएशन के स्पीकर थे, आपके द्वारा अपनी तक़रीरों और स्पीच में बयान की गई अहम बातें आज भी मौजूद हैं जिनसे हज़ारों उलमा और कॉलेज और यूनिवर्सिटी के स्टूडेंटस उन से बहुत कुछ सीखते हुए तरक़्क़ी के रास्ते पर तेज़ी से बढ़ रहे हैं।
राजनीतिक गतिविधियां
5 जून 1963 - आप हमेशा इमाम ख़ुमैनी के साथ ही रहते थे जिसके चलते कहा जा सकता है कि 5 जून 1963 को इमाम ख़ुमैनी की देख रेख में तेहरान से शाह के साम्राज्य के विरुध्द आवाज़ उठाने और सड़कों पर निकल कर शाह के विरुध्द नारेबाज़ी करने की हिम्मत आप ही ने पैदा की थी, यही कारण है कि आपको उसी दिन शाह के विरुध्द एक तक़रीर के कारण गिरफ़्तार कर के जेल में डाल दिया गया जिसमें पहले से कुछ उलमा क़ैद थे, लगभग 43 दिन बाद बड़ी तादाद में उलमा और तेहरान के पास और दूर के लोगों ने तेहरान पहुंच कर शाह की हुकूमत पर दबाव बनाया जिसके बाद शाह को मजबूर हो कर शहीद मुतह्हरी समेत सभी उलमा को रिहा करना पड़ा।
दलों को सही राह दिखाना -
उस समय सभी कमेटियों और एसोसिएशंस को मिला कर एक दल बना दिया गया था ताकि सब मिल कर एक साथ काम करें, हालांकि और भी उलमा इस मिशन में आपके साथ थे लेकिन आपको इमाम ख़ुमैनी की ओर से इस दल के नेतृत्व की ज़िम्मेदारी दी गई थी, अचानक उसी समय किसी ने प्रधानमंत्री की हत्या कर दी जिसका आरोप इसी दल पर लगा और चूंकि इस दल का नेतृत्व आप कर रहे थे इसलिए आपके विरुध्द केस तैयार किया गया लेकिन जिस कोर्ट में आपका केस गया उसका जज क़ुम में आपका शागिर्द रह चुका था, उसने आपके पास पैग़ाम भेजा आप मेरे उस्ताद हैं और आपका मुझ पर हक़ है उसी को अदा करते हुए आपको इस केस से बरी कर दूंगा।
भटके हुए और गुमराह लोगों से मुक़ाबला
आप उस समय अलग अलग विषय पर किताबें और आर्टिकल लिखते और अलग अलग जगहों पर वहां की ज़रूरत के अनुसार तक़रीरें करते, क्योंकि आप केवल आंदोलन में विश्वास नहीं रखते थे बल्कि आपका मानना था कि इस्लामी आंदोलन होना चाहिए, और इसी इस्लामी आंदोलन और क्रांति के लिए आपने भटके हुए और गुमराह लोगों के लिए अलग अलग तरह की आइडियालॉजी तैयार कीं, ताकि उनकी गुमराही का मुक़ाबला किया जा सके। 1967 में कुछ लोगों की मदद से इरशाद (हिदायत) के नाम से एक इमामबाड़ा बनवाया और उसको सेंटर बना कर अपने मिशन को शुरू किया, लेकिन कुछ ही समय में आपके कुछ साथियों की मनमानी और आपका कहना न मानने और लगातार ग़लतियां करने की वजह से 3 साल बाद ही आपने इरशाद नामी संस्था से इस्तीफ़ा दे दिया।
फ़िलिस्तीन के मज़लूमों का समर्थन
 1969 में आपने अल्लामा तबातबाई और आयतुल्लाह अबुल फ़ज़्ल ज़ंजानी के साथ मिल कर फ़िलिस्तीम की बेघर जनता की मदद करने के लिए लोगों को एक तक़रीर द्वारा उकसाया लेकिन शाह की हुकूमत ने मज़लूम जनता के समर्थन को जुर्म बताते हुए आपको गिरफ़्तार करते हुए कुछ समय के लिए जेल में डाल दिया।
मुनाफ़िक़ों से ख़तरा मोल लेना

आपकी सबसे अहम गतिविधि और इस्लामी इंक़ेलाब की ख़िदमत करते हुए सबसे अहम काम आपका समय की ज़रूरत को महसूस करते हुए किताबों का लिखना और लोगों के बीच रह कर उनकी कमज़ोरियों को महसूस करते हुए उनके लिए तक़रीर करना थी, आपका यह मिशन 1973 से 1979 तक अपने शिखर पर था और आप इसी तरह बेबाकी से अपने मिशन को आगे बढ़ाते रहे तभी कुछ जाहिल और मुनाफ़िक़ लोगों ने आपके विरुध्द साज़िशें रचना शुरू कर दीं, क्योंकि शहीद मुतह्हरी पूरी तरह से इमाम ख़ुमैनी के रास्ते और उनकी आइडियालॉजी को अपना कर शाह और मुनाफ़िक़ दोनों की साज़िशों का मुक़ाबला कर रहे थे।
आपकी शहादत
आप पूरी बेबाकी और निडरता से इंक़ेलाब की राह में आगे बढ़ते रहे और मुनाफ़िक़ों की साज़िशों को नाकाम करते रहे, तभी अचानक 1980 की एक रात जब आप 10 बज कर 20 मिनट पर किसी मीटिंग से वापस घर आ रहे थे तभी फ़ुरक़ान नामी मुनाफ़िक़ टोले के एक शख़्स ने आपके गोली मार दी जो आपके सिर में लगी जिसके कारण आप शहीद हो गए, आपकी शहादत के बाद इमाम ख़ुमैनी जिनको आपसे बहुत अधिक उम्मीदें थीं सबसे ज़्यादा ग़मगीन हुए और आपने राष्ट्रीय शोक का ऐलान किया।
 .............................


आपका कमेंट



मेरा कमेंट शो न किया जाये
Security Code :

नवीनतम लेख

दमिश्क़, आम लोगों पर मौत बनकर बरसे अमेरिकी विमान, 40 से अधिक की मौत। इस्राईल का भविष्य दांव पर, अकेले कई अरब देशों को हराना वाला अवैध राष्ट्र आज हमास से नहीं जीत सकता : ज़ायोनी सैन्याधिकारी ट्रम्प की एक और हार, अदालत ने दिया सीएनएन पत्रकार का पास जारी करने का आदेश ट्रम्प, बिन सलमान, और नेतन्याहू के शैतानी त्रिकोण को संकट का सामना : हिज़्बुल्लाह आईएसआईएस इस्लाम का प्रतीक नहीं, हरमैन शरीफ़ैन के साथ विश्वासघात कर रहे हैं आले सऊद सऊदी के बाद आर्थिक मदद मांगने संयुक्त अरब अमीरात जाएंगे इमरान खान ख़ाशुक़जी का सर काट कर रियाज़ ले गए थे सऊदी हत्यारे । बस एक साल, और हिज़्बुल्लाह की तरह शक्तिशाली होगा हमास : लिबरमैन इस्राईल को दमिश्क़ का कड़ा संदेश, जौलान सीरिया का है और हम जानते हैं उसे कैसे लेना है । इमाम हसन असकरी अ.स. की ज़िंदगी पर एक निगाह अमेरिका का युग बीत गया, पश्चिम एशिया से विदाई की तैयारी कर ले : मेजर जनरल मूसवी सऊदी अरब ने यमन के आगे घुटने टेके, हुदैदाह पर हमले रोकने की घोषणा। ईरान को दमिश्क़ से निकालने के लिए रूस को मनाने का प्रयास करेंगे : अमेरिका आईएसआईएस आतंकियों का क़ब्रिस्तान बना पूर्वी दमिश्क़ का रेगिस्तान,30 आतंकी हलाक ग़ज़्ज़ा, प्रतिरोधी दलों ने ट्रम्प की सेंचुरी डील की हवा निकाली : हिज़्बुल्लाह