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Date of publication : 12/2/2018 5:26
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आख़िरी ज़माने की निशानियां पैग़म्बर स.अ. की ज़बानी

एक दौर ऐसा आएगा जब चेहरे तो इंसानों के होंगे लेकिन दिल शैतान के हो चुके होंगे, दरिंदगी इस हद को पहुंच चुकी होगी कि लोग भेड़िये की तरह ख़ून बहाएंगे, हराम कामों से किसी तरह का कोई परहेज़ नहीं होगा, बुरे कामों की ओर दिलचस्पी बढ़ती जाएगी, अगर आप उन लोगों के बीच जाएंगे तो हमेशा वह झूठ ही बोलेंगे, कोई ख़बर देंगे तो वह भी झूठी ही होगी, और अगर आप उनसे कोई बात करेंगे तो वह आपको झुठला देंगे, और जब उनके बीच से उठ के चले जाएंगे तो आपकी ग़ीबत करेंगे,

विलायत पोर्टल :  लोग एक ऐसे दौर से गुज़रेंगे जिसमें उन्हें अपने दीन को बचाने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी, उनके लिए दीनदारी उतनी ही कठिन होगी जितनी अपने हाथ पर आग रखना।
इस लेख में पैग़म्बर स.अ. की हदीसों की रौशनी में शिया और सुन्नी किताबों से आख़िरी ज़माने की निशानियों को बयान किया जाएगा, इन हदीसों में बयान की गई बातें इंसान के ज़मीर को झिंझोड़ देती हैं जिनको पढ़ना और उन पर ध्यान देना हम सभी पैग़म्बर स.अ. से मोहब्बत करने वालों के लिए ज़रूरी हो जाता है।
पैग़म्बर स.अ. फ़रमाते हैं कि एक दिन आएगा जब अल्लाह के दीन के टुकड़े टुकड़े कर दिए जाएंगे, मेरी सुन्नत को लोग बिदअत समझेंगे और बिदअत को मेरी सुन्नत समझ कर अमल करेंगे, दीनदार महान हस्तियों पर आरोप लगा कर उन्हें किनारे कर दिया जाएगा, और मक्कारों को महान बना कर पेश किया जाएगा, मोमिन लोगों की निगाह में ज़लील समझा जाएगा और गुनाहगार और नीच लोगों को सम्मान दिया जाएगा, मोमिन के बीवी बच्चों को गिरी हुई निगाह से देखा जाएगा और उनसे क़रीब होने वालों को ज़लील समझा जाएगा, ऐसे लोगों से अल्लाह अपनी रहमत को मोड़ लेगा।
वह झूठ ही बोलेंगे
एक दौर ऐसा आएगा जब चेहरे तो इंसानों के होंगे लेकिन दिल शैतान के हो चुके होंगे, दरिंदगी इस हद को पहुंच चुकी होगी कि लोग भेड़िये की तरह ख़ून बहाएंगे, हराम कामों से किसी तरह का कोई परहेज़ नहीं होगा, बुरे कामों की ओर दिलचस्पी बढ़ती जाएगी, अगर आप उन लोगों के बीच जाएंगे तो हमेशा वह झूठ ही बोलेंगे, कोई ख़बर देंगे तो वह भी झूठी ही होगी, और अगर आप उनसे कोई बात करेंगे तो वह आपको झुठला देंगे, और जब उनके बीच से उठ के चले जाएंगे तो आपकी ग़ीबत करेंगे, ऐसे लोगों पर बुरे से बुरे लोगों की हुकूमत होनी चाहिए ताकि इन पर किसी तरह का रहम न करें, और ऐसे लोगों की वजह से नेक लोगों की दुआएं भी क़ुबूल नहीं होंगी।
उनके पेट उनके ख़ुदा, उनका क़िब्ला उनकी औरतें और उनका दीन उनकी दौलत होगी
पैग़म्बर स.अ. फ़रमाते हैं कि लोग एक ऐसे दौर से गुज़रेंगे जिसमें कुछ लोगों का ख़ुदा बस उनका पेट होगा यानी केवल उसी की फ़िक्र होगी और अपनी औरतों को ही अपना क़िब्ला समझेंगे और दुनिया की दौलत ही को दीन बना लेंगे, दुनिया की चकाचौंध को ही दुनिया की सबसे क़ीमती चीज़ समझेंगे, ईमान और इस्लाम केवल नाम का रह जाएगा और क़ुर्आन केवल पढ़ाने के लिए बचेगा, मस्जिदें नमाज़ियों से भरी मिलेंगी लेकिन उनके दिल ख़ुदा की याद और उसकी हिदायत से ख़ाली मिलेंगे।
चार चीज़ों में घिरे होंगे
उस आख़िरी ज़माने में लोग चार चीज़ों में घिरे होंगे, सबसे पहले यह कि वह लोगों की इज़्ज़त (नामूस) से खिलवाड़ करते होंगे, दूसरे यह कि ताक़तवर और मालदारों द्वारा आम लोगों का अपमान होगा, तीसरे यह कि लोगों को सूखा पड़ने जैसी मुश्किल का सामना करना पड़ेगा और चौथे यह कि हाकिमों के ज़ुल्म से ज़मीन भर चुकी होगी।
लोगों ने हैरानी से पैग़म्बर स.अ. से पूछा कि या रसूलल्लाह स.अ. क्या वह लोग बुत परस्त होंगे?
आपने फ़रमाया, हां उन लोगों को पैसों से इस हद तक मोहब्बत होगी कि लोग पैसे से उसी तरह चिपके होंगे जिस तरह बुतों की पूजा करने वाले बुतों से चिपकते हैं। उलमा से ऐसे भागेंगे जैसे भेड़िये को देख कर भेड़ें भागती हों
शिया और सुन्नी दोनों की किताबों में पैग़म्बर स.अ. से यह हदीस मौजूद है कि आपने फ़रमाया कि एक दिन ऐसा आएगा जब लोग उलमा से ऐसे ही दूर भागेंगे जैसे भेड़िये को देख कर भेड़ें भागती है, ऐसे समय में अल्लाह इन लोगों को तीन तरह की मुसीबतों में गिरफ़्तार कर देगा,
पहली यह कि उनके माल और दौलत की बरकत को छीन लेगा,
दूसरी यह कि ज़ालिम हाकिमों को उनका हाकिम बना देगा और
तीसरी यह कि ऐसे लोग बे ईमान इस दुनिया से जाएंगे।
आपके एक सहाबी ने पूछा, या रसूलल्लाह स.अ. ऐसे दौर में लोगों के दीन का क्या होगा? आपने फ़रमाया ऐसे दौर में हर किसी का अपने दीन को बचा कर रखना बहुत कठिन होगा, दीनदारी को बचाना ऐसे ही होगा जैसे आग को हाथ पर रख कर हाथ को जलने से बचाना।
क़ुर्आन केवल किताब और इस्लाम केवल नाम का रह जाएगा
बिहारुल अनवार जिल्द 52 पेज 90 में एक हदीस है जिसमें पैग़म्बर स.अ. फ़रमाते हैं एक ज़माना आएगा जिसमें केवल क़ुर्आन काग़ज़ पर लिखा रह जाएगा और इस्लाम केवल मुसलमानों के नाम में रह जाएगा, मस्जिदें नमाज़ियों से भरी होंगी लेकिन उनके दिलों में ईमान और हिदायत नाम की भी नहीं होगी, उस दौर में क़ुर्आन और अहले क़ुर्आन की कोई अहमियत नहीं होगी।
इस्लामी क़ानूनों को अनदेखा किया जाएगा
एक दिन ऐसा आएगा जब लोग एक दूसरे से दूर भागेंगे और एकता को बुरा समझेंगे, और इस्लामी और क़ुर्आनी क़ानूनों से ऐसे मुंह मोड़ लेंगे जैसे क़ुर्आन इनकी हिदायत नहीं बल्कि यह क़ुर्आन की हिदायत कर रहे हैं, हक़ का केवल नाम रह जाएगा, क़ुर्आन के केवल पन्ने बचेंगे उस पर अमल करने वाले बस कुछ ही लोग होंगे।
हराम रास्ते से रोज़ी कमाई जाएगी
एक ऐसा दौर आएगा जब लोग हराम रास्तों से कमाई करेंगे, यही वह दौर होगा जब लोग मां बाप के हाथों बर्बाद हो जाएंगे और अगर मां बाप नहीं हैं तो बीवी बच्चों के हाथों बर्बाद हो जाएंगे और अगर कोई न हुआ तो पड़ोसियों के हाथों बर्बाद हो जाएंगे और बर्बादी भी ऐसी होगी कि ग़रीब और फ़क़ीर भी निंदा करेंगे, और कुछ लोगों की हरामख़ोरी इतनी बढ़ जाएगी कि लोग हलाकत तक पहुंच जाएंगे।
आख़िरी ज़माने में कुछ झूठे और धोखेबाज़ लोग ऐसे होंगे जो नई नई हदीसें और रिवायतें सुनाएंगे, इसी तरह कंज़ुल उम्माल में भी पैग़म्बर स.अ. से हदीस नक़्ल हुई है कि आख़िरी ज़माने में लोग झूठी हदीसें पेश करेंगे, ऐसी हदीसें जिसे ना आपने ना आपके बाप दादा ने पहले सुना होगा और ना ही कहीं पढ़ा होगा, ख़बरदार ऐसी हदीसों से दूर रहना उनके धोखे में मत आना। ज़ाहिर है हर कोई इस दौर की जो सिफ़ात और विशेषताएं बताई गई हैं उनसे बचना चाहेगा, इन हालात से बचने के लिए ज़रूरी है ईमान को मज़बूत बनाएं, केवल अल्लाह के लिए अमल अंजाम दें, और हर पल हर घड़ी अल्लाह से ऐसे हालात में महफ़ूज़ रहने के लिए दुआ करते रहें।
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