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Code : 191193
Date of publication : 28/12/2017 5:55
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मानवता की दुश्मन ज़ायोनी मूवमेंट तथा उसकी स्थापना

1903 में ब्रिटिश सरकार ने पूर्वी अफ्रीका में यूगांडा को यहूदी राष्ट्र के गठन के रूप में देने की पेशकश की इसी समय हेर्त्ज़ेल ने अपने कुछ साथियों के साथ यहूदी राष्ट्र के लिए स्थान की तलाश में अर्जेंटीना का सफर किया , लेकिन चूँकि यूगांडा और अर्जेंटीना यहूदियों को पसंद नहीं आये तो अगले साल होने वाली कांफ्रेंस में ज़ायोनियों ने इस पेशकश को ठुकरा दिया तथा ज़ायोनियों ने तौरैत की आयत का सहारा लेते हुए फिलिस्तीन में बसने की मांग की ।

विलायत पोर्टल :  ज़ायोनिज़्म का नामकरण ज़ायोनिज़्म शब्द की उतपत्ति सहयून शब्द से हुई है, सहयून भौगोलिक रूप से क़ुद्स के निकट एक पर्वत का नाम है , यह क़ुद्स शहर में स्थित चार पवित्र पर्वतों में से एक है, यहूदी धर्म में यह पर्वत पवित्र ज़मीन का सिम्बल माना जाता है, यहूदी खुद को सहयून की बेटी कहते हैं और वादा की गयी धरती की ओर पलटने का विचार यहूदियों का भावनात्मक विचार है, अतः ज़ायोनियों की राजनैतिक मूवमेंट इस विचार को चरित्रार्थ करने के लिए शुरू की गई ।
ज़ायोनी मूवमेंट क्या है ?
ज़ायोनिज़्म उस मूवमेंट को कहा जाता है जो फिलिस्तीन की ओर आने और एक यहूदी सत्ता की स्थापना के इच्छुक हैं, धार्मिक ज़ायोनिज़्म वह विचार है जो वादा दी गई भूमि की ओर पलटने की आस्था रखते हैं, लेकिन राजनैतिक ज़ायोनिज़्म वह विचारधारा है जो फिलिस्तीन की ओर पलटने का आह्वान करती है ।
यह विचारधारा थिओडोर हेर्त्ज़ेल { Theodore Hertezel } द्वारा “यहूदी सरकार” नामक किताब लिखे जाने के बाद 1894 ईस्वी में अस्तित्व में आई । थिओडोर हेर्त्ज़ेल को ज़ायोनी विचारधारा का असली जनक माना जाता है वह यहूदियों के लिए एक अलग देश की स्थापना को ज़रूरी मानता था तथा उसने यहूदियों के फिलिस्तीन में बसाने को लेकर बहुत प्रयास किये ।
बेलफोर घोषणा
थिओडोर हेर्त्ज़ेल Theodore Hertezel ने शुरू में यहूदी सरकार की स्थापना के लिए कोई एक विशेष स्थान चिन्हित नहीं किया था बल्कि इसे यहूदी समुदाय के विवेक पर छोड़ दिया था, 1903 में ब्रिटिश सरकार ने पूर्वी अफ्रीका में यूगांडा को यहूदी राष्ट्र के गठन के रूप में देने की पेशकश की इसी समय हेर्त्ज़ेल ने अपने कुछ साथियों के साथ यहूदी राष्ट्र के लिए स्थान की तलाश में अर्जेंटीना का सफर किया , लेकिन चूँकि यूगांडा और अर्जेंटीना यहूदियों को पसंद नहीं आये तो अगले साल होने वाली कांफ्रेंस में ज़ायोनियों ने इस पेशकश को ठुकरा दिया तथा ज़ायोनियों ने तौरैत की आयत का सहारा लेते हुए फिलिस्तीन में बसने की मांग की ।
ज़ायोनियों के दबाव में आकर तत्कालीन ब्रिटिश विदेश मंत्री ऑर्थर जेम्स बेलफोर ने 1917 में एक बयान जारी करते हुए फिलिस्तीन में यहूदी राष्ट्र के गठन की सहमति देते हुए कहा कि ब्रिटेन यहूदी राष्ट्र के गठन में किसी भी प्रकार सहायता करने से पीछे नहीं हटेगा । इस घोषणा के 7 महीने बाद ही उस्मानी खिलाफत और ब्रिटिश फौजों की मुठभेड़ के बाद फिलिस्तीन पर ब्रिटिश फौजों का नियंत्रण हो गया । ज़ायोनिज़्म मूवमेंट को दिए गए वादे को निभाने के लिए हुए इस युद्ध के बाद फिलिस्तीन ब्रिटिश कॉलोनी बन गया और दुनिया भर के यहूदी ब्रिटेन और यहूदी पूंजीवादियों की सहायता से फिलिस्तीन में आ आ कर बसने लगे ।
बेलफ़ोर घोषणा पत्र
विदेश मंत्रालय ,
२ नवम्बर 1917
लॉर्ड रोथचिल्ड़ !
बेहद प्रसन्नता का अवसर है कि मैं ब्रिटिश सरकार की ओर से यहूदियों की इच्छा और उनके अरमानों को पूरा करने वाला यह बयान आप तक पहुंचा रहा हूँ जो मंत्रालय को दिखाया गया और स्वीकृत भी हो गया है । ब्रिटिश सरकार एक यहूदी राष्ट्र के गठन को लेकर गंभीर है और इस इच्छा को पूरा करने में अपनी ओर से पूरा प्रयास करेगी । लेकिन ध्यान रहे कि फिलिस्तीन में रह रहे अन्य धर्म के लोगों के धार्मिक एवं नागरिक अधिकारों का हनन नहीं होना चाहिए , न ही कोई ऐसी बात हो जिससे अन्य देशों के यहूदियों के राजनैतिक अधिकारों या उनकी स्थिति पर कोई आंच आये । मुझे आशा है कि आप ज़ायोनिज़्म संघ को इस सन्देश के बारे में बता देंगे ।
आपका निष्ठावान
ऑर्थर बेलफ़ोर
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